फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Fatehabad News ›   medicine found on road

जो दवाईयां बाजार में नहीं मिलती, झाड़ियों पर मिला उसका जखीरा

Fri, 11 Mar 2016 12:39 AM IST
fatehabad/bureau
fatehabad/bureau Updated Fri, 11 Mar 2016 12:39 AM IST
विज्ञापन
सिरसा रोड पर नेशनल हाइवे के किनारे सरकारी दवाइयों का जखीरा झाड़ियों में मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। अमर उजाला संवाददाता ने मामले की गहराई से पड़ताल कर इसकी सूचना विभाग को दी। मौके पर पहुंची डिप्टी सीएमओ डा. सुजाता बंसल तथा डा.गिरीश चौधरी भी एकबारगी इतनी दवाइयां सड़क पर देखकर हैरान रह गईं।
विज्ञापन


उन्होंने सारी दवाइयों को कब्जे में लेकर अस्पताल भिजवा दिया। खुद सिविल सर्जन ने अस्पताल पहुंच कर सड़क पर मिली दवाइयों की जांच की। उन्होंने तुरंत मामले की जांच करने के लिए तीन डाक्टरों की एक कमेटी बनाने की घोषणा कर दी। दवाइयों के बारे जानकारी के लिए जिला ड्रग कंट्रोलर रमन श्योराण को भी वहीं पर बुला लिया।
विज्ञापन


बड़ी बात यह सामने आई है कि यह वो दवाइयां हैं जिनके लिए दिनभर मरीज लाइन में लगते हैं, सरकारी कर्मचारी हैं कि उन्हें दवाईयां नहीं देते। यह लाइफ सेवर ड्रग्स के नाम से जानी जाती हैं। जहां पर दवाइयों का जखीरा मिला है वहां से सिविल अस्पताल से मरीजों को दिए जाने वाले टॉकन भी मिले हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


दिल की बीमारी से लेकर बीपी की दवाइयां भी शामिल
नेशनल हाइवे पर झाड़ियों में मिले दवाइयों के जखीरे में दिल की बीमारी से लेकर बीपी तक की दवाइयां भी शामिल हैं। इतना ही नहीं, डिलीवरी के दौरान इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण दवाइयां भी सड़क पर मिली हैं। मौके पर पहुंची डिप्टी सिविल सर्जन सुजाता बंसल ने कहा कि ये दवाइयां तो आमतौर पर मिलती भी नहीं हैं।

उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि इन दवाइयों में अधिकतर की डेट एक्सपायर नहीं हुई हैं। ऐसे में उनका यूं इस तरह सड़क पर पड़ेे मिलने से किसी बड़े घोटाले की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता। हालांकि उन्होंने इसकी पूरी जांच करवाने की बात भी कही।

दवाइयों के 4 लिफाफे अस्पताल से बाहर निकलने की आशंका
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो बीते कुछ दिनों में सरकारी अस्पताल से अलग अलग दिनों में इसी प्रकार के 4 लिफाफे बाहर भेजे गए हैं जिनमें दवाइयां भरी थी। उच्चाधिकारयों को भी शुरुआती जांच में ऐसे ही संकेत मिले हैं। खुद सिविल सर्जन ने इस बात के बाहर आने के बाद ही तीन सदस्यीय टीम से इसकी जांच करवाने की घोषणा की है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि अधिकतर दवाइयों की अभी एक्सपायरी डेट बाकी थी, ऐसे में पूरी आशंका है कि दवाइयों को बेचने के इरादे से बाहर भेजा गया हो, जिसके बाद एक्सपायरी डेट की दवाई भी बीच में डाल दी गई हो।


ये दवाइयां थी जखीरे में शामिल
विभाग के सूत्रों की मानें तो सड़क किनारे मिले दवाइयों के जखीरे में मेट्रोपरोल, क्लोपीडोग्रल, सेलिनस, फोलिक एसिड टेबलेट, पेरासिटामोल, डिलीवरी में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां, पेनकिलर, डायबीटीज, ओसेट टेबलेट, कैल्श्यिम सहित लगभग 15 से 20 प्रकार की दवाइयां थी।

जांच में हो सकते हैं कई खुलासे
सिविल अस्पताल की दवाईयां ऐसे सड़क पर मिलने के पीछे जांच में कई खुलासे हो सकते हैं। कई कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है। एक्सपायरी डेट की दवाईयों को भी नष्ट करने से पहले की औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। एक्सपायरी डेट की दवाईयों की लिस्ट बनाई जाती है। जिसके बाद एक कमेटी बनती है और उसके बाद इन्हें नष्ट किया जाता है। बिना एक्सपायरी डेट की दवाईयों का भी अगर स्टॉक ज्यादा है तो इन्हें दूसरे अस्पताल में ट्रांसफर कर दिया जाता है ताकि एक्सपायर होने से पहले दवाईयों की खपत हो जाए।

कुछ दिन पहले लाखों की दवाईयां हुई थी गायब
सिविल अस्पताल से अभी कुछ समय पहले ही लाखों के हीमोफीलिया के इंजेक्शन गायब हो गए थे। 8 दिन तक मामले को दबाए रखा गया। मामला जब मीडिया में आया और अस्पताल ने इसकी शिकायत पुलिस चौकी में दी तो उसी दिन दवाईयां भी जादू से बाहर निकल आई। ऐसे में डिस्पेंसरी में हो रहे मोटे घोटालों से इंकार नहीं किया जा सकता है।

एक्सपर्ट व्यू
एक्सपर्ट के अनुसार ये दवाईयां सरकारी रिकॉर्ड में मरीजों को वितरित कर दर्शाई गई होंगी। जिम्मेवार कर्मचारी इसे बेचने की मंशा से इसे अपने पास रखे हुए था। बाजार में दवाइयां न बिकते देख व विभाग की सख्ती के डर से कर्मचारियों ने इसे शहर से 3 से 4 किलोमीटर दूर फेंक दिया।


मामला मेरे सामने आया है। इसमें एक्सपायर व बिना एक्सपायरी डेट की दवाइयां है। इसमें जनरल यूज की दवाइयां भी है। दवाइयों की लिस्ट बनाई जाएगी। तीन डाक्टरों की कमेटी बनाकर इसकी जांच की जाएगी। जांच में जो दोषी पाया जाएगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।
डा. अशोक चौधरी
सिविल सर्जन फतेहाबाद।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed