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नेताओं और पुलिस को जिम्मेदार ठहराया
ब्यूरो अमर उजाला
Updated Tue, 15 Mar 2016 01:32 AM IST
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कमेटी
- फोटो : अमर उजाला
दंगों के दौरान हुई तोडफ़ोड़ व आगजनी की जांच के लिए गठित प्रकाश सिंह कमेटी की टीम ने सोमवार सायं भिवानी के प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। जाट धर्मशाला में निरीक्षण के दौरान लोगों ने आरोप लगाए कि कुछ नेताओं और पुलिस कर्मियों के कारण तोड़फोड़ और आगजनी हुई। प्रकाश सिंह ने बताया कि वे जांच रिपोर्ट ओपन नहीं कर सकते। पूरी जांच की जा रही है और 45 दिन में पूरी रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी।
सोमवार सायं करीब छह बजे तीन सदस्यीय आयोग की टीम स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों डीसी पंकज, एसपी प्रतीक्षा गोदारा, एसडीएम सतपाल सिंह के साथ जाट धर्मशाला में पहुंची। यहां निरीक्षण के बाद मौजूद लोगों से बातचीत की। सभा के उप प्रधान सुरेंद्र, विरेंद्र सिंह, मास्टर करतार सिंह, रणबीर धनानिया ने आयोग सदस्यों को घटना के बारे में जानकारी दी। लोगों ने दो पुलिस अधिकारियों को तोडफ़ोड़ और आगजनी के लिए जिम्मेवार ठहराया तो सरकार के ही कुछ नेताओं पर भी आरोप लगाए। टीम सदस्यों ने सीसीटीवी कैमरों के बारे में पूछा तो लोगों ने बताया कि वे भी तोड़ दिए। कुछ ऐसे भी रहे जिनका कहना था कि डीसी, एसपी की सूझबूझ के कारण भिवानी में स्थिति नहीं बिगड़ी। यहां लोगों से बातचीत के बाद टीम रेस्ट हाउस पहुंची। जहां हिसार रेंज के आईजी अनिल राव भी मौजूद रहे। यहां बंद कमरे में प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों से बातचीत हुई।
आयोग से प्रकाश सिंह ने बताया कि आंदोलन के दौरान स्थानीय प्रशासन की क्या भूमिका रही इसकी जांच की जा रही है। अधिकारियों ने अपनी संवैधानिका भूमिका का सही निर्वहन किया या नहीं। अपनी जिम्मेवारी से भागे तो नहीं। इसी की जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। 45 दिन में रिपोर्ट पूरी कर सरकार को सौंपनी है। प्रयास रहेगा निर्धारित समयावधि में रिपोर्ट तैयार हो। जरूरत हुई तो सप्ताह-10 दिन का समय और लग सकता है।
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सोमवार सायं करीब छह बजे तीन सदस्यीय आयोग की टीम स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों डीसी पंकज, एसपी प्रतीक्षा गोदारा, एसडीएम सतपाल सिंह के साथ जाट धर्मशाला में पहुंची। यहां निरीक्षण के बाद मौजूद लोगों से बातचीत की। सभा के उप प्रधान सुरेंद्र, विरेंद्र सिंह, मास्टर करतार सिंह, रणबीर धनानिया ने आयोग सदस्यों को घटना के बारे में जानकारी दी। लोगों ने दो पुलिस अधिकारियों को तोडफ़ोड़ और आगजनी के लिए जिम्मेवार ठहराया तो सरकार के ही कुछ नेताओं पर भी आरोप लगाए। टीम सदस्यों ने सीसीटीवी कैमरों के बारे में पूछा तो लोगों ने बताया कि वे भी तोड़ दिए। कुछ ऐसे भी रहे जिनका कहना था कि डीसी, एसपी की सूझबूझ के कारण भिवानी में स्थिति नहीं बिगड़ी। यहां लोगों से बातचीत के बाद टीम रेस्ट हाउस पहुंची। जहां हिसार रेंज के आईजी अनिल राव भी मौजूद रहे। यहां बंद कमरे में प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों से बातचीत हुई।
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आयोग से प्रकाश सिंह ने बताया कि आंदोलन के दौरान स्थानीय प्रशासन की क्या भूमिका रही इसकी जांच की जा रही है। अधिकारियों ने अपनी संवैधानिका भूमिका का सही निर्वहन किया या नहीं। अपनी जिम्मेवारी से भागे तो नहीं। इसी की जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। 45 दिन में रिपोर्ट पूरी कर सरकार को सौंपनी है। प्रयास रहेगा निर्धारित समयावधि में रिपोर्ट तैयार हो। जरूरत हुई तो सप्ताह-10 दिन का समय और लग सकता है।
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