National Sports Day: अपने ही गढ़ में परवान नहीं चढ़ पा रही हॉकी, बदलते वक्त के साथ चमक हो गई फीकी

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Sat, 29 Aug 2020 02:06 PM IST
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खेल दिवस।
खेल दिवस। - फोटो : अमर उजाला।

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खेल दिवस (29 अगस्त) पर देश दुनिया हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को याद कर रही है। उन्होंने जिस खेल की बदौलत भारत की बादशाहत कायम की और विश्व पटल पर हॉकी को पहचान दी, आज वही खेल गोरखपुर में ही खत्म होने के कगार पर है। यह इलाका कभी हॉकी का गढ़ माना जाता था। इस खेल के दिग्गजों की मानें तो गोरखपुर ही नहीं पूरे प्रदेश में हॉकी परवान नहीं चढ़ पा रही है। इसके पीछे बड़ा कारण खेलों का बदला स्वरूप और स्कूल स्तर पर हॉकी को बढ़ावा न देना है।
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ओलंपियन अली सईद, प्रेम माया, डॉ. आरपी सिंह, दिवाकर राम, प्रीति दुबे, निधि खुल्लर, रीता मिश्रा, रंजनी चौधरी, सनवर अली, जनार्दन गुप्ता, प्रवीण शर्मा जैसे दिग्गज हॉकी खिलाड़ी गोरखपुर की धरती से निकले। इन खिलाड़ियों ने अपनी कलात्मक हॉकी के खेल से अंतरराष्ट्रीय फलक पर देश का नाम रोशन किया।
इन अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने एमएसआई के मैदान से हॉकी खेलने की शुरुआत की। यह वही मैदान है जहां गोरखपुर मंडल के जितने भी खिलाड़ी हैं, खेलकर आगे बढ़े। लेकिन आज इस मैदान की रौनक खत्म होती जा रही है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण टीमों का न होना है।
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खेल का माहौल नहीं बन रहा

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