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Himachal Samosa Row: हिमाचल में समोसा विवाद क्यों छिड़ा, CID जांच की बात कहां से आई, सरकार-विपक्ष क्या कह रहे?
Fri, 08 Nov 2024 08:27 PM IST
संध्या
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: संध्या
Updated Fri, 08 Nov 2024 08:27 PM IST
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हिमाचल में समोसे पर विवाद
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को समोसा न मिलने के कारण इसकी जांच सीआईडी से करवाई गई है। सीएम सुक्खू हाल ही में सीआईडी के एक कार्यक्रम के लिए इसके मुख्यालय पहुंचे थे। सीआईडी के इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे थे। यहां सीएम के लिए मंगाए गए समोसे उन्हें नहीं मिले, जिसके बाद सीआईडी के द्वारा इसकी आंतरिक जांच करवाई गई। इसी जांच में एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे 'सरकार विरोधी' कृत्य कहा, जिससे मामले में विवाद बढ़ गया। इस मामले के सामने आते ही इसने राजनीतिक रंग भी ले लिया। भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा है कि विपक्ष ने समोसे नहीं खाए, यह सरकार विरोधी कृत्य कैसे हो गया।आइये जानते हैं कि हिमाचल में समोसे पर विवाद क्यों छिड़ा? सीआईडी जांच की बात कहां से आया? जांच रिपोर्ट पर सवाल क्यों उठे? भाजपा क्या कह रही है? सीएम ने मामले पर क्या प्रतिक्रिया दी?
हिमाचल में समोसे पर विवाद क्यों छिड़ा?
दरअसल, 21 अक्तूबर को सीएम सुक्खू सीआईडी के साइबर विंग रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली स्टेशन का उद्घाटन करने के लिए सीआईडी मुख्यालय पहुंचे थे। सीआईडी के इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे थे। उनके अलावा कई वीआईपी मेहमान और अधिकारी भी मौजूद थे। शिमला स्थित होटल रेडिसन ब्लू से समोसे और केक के तीन डिब्बे प्रमुख अतिथियों के लिए लाए गए। डिप्टी एसपी रैंक के अधिकारी के बयान के अनुसार, खाने-पीने की चीजें अतिथियों के सुरक्षा स्टाफ को परोसी गईं। सीएम समोसे का इंतजार करते रह गए लेकिन उन्हें समोसे नहीं मिले और उनके स्टाफ को सौंप दिया गया।
दरअसल, 21 अक्तूबर को सीएम सुक्खू सीआईडी के साइबर विंग रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली स्टेशन का उद्घाटन करने के लिए सीआईडी मुख्यालय पहुंचे थे। सीआईडी के इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे थे। उनके अलावा कई वीआईपी मेहमान और अधिकारी भी मौजूद थे। शिमला स्थित होटल रेडिसन ब्लू से समोसे और केक के तीन डिब्बे प्रमुख अतिथियों के लिए लाए गए। डिप्टी एसपी रैंक के अधिकारी के बयान के अनुसार, खाने-पीने की चीजें अतिथियों के सुरक्षा स्टाफ को परोसी गईं। सीएम समोसे का इंतजार करते रह गए लेकिन उन्हें समोसे नहीं मिले और उनके स्टाफ को सौंप दिया गया।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू
- फोटो :
संवाद न्यूज एजेंसी
सीएम सुक्खू को समोसे नहीं मिलने के बाद क्या हुआ?
सीएम को समोसे नहीं मिलने के बाद सीआईडी के द्वारा मंगाए गए समोसे कहां गए, इसकी आंतरिक जांच करने के आदेश दिए गए। इस घटना के बाद डीएसपी रैंक के अधिकारी ने जांच के दौरान कई लोगों के बयान लिए जिसके बाद ये रिपोर्ट तैयार की गई। रिपोर्ट के अनुसार आईजी रैंक के एक अधिकारी ने पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर को होटल से कुछ खाने-पीने की चीजें लाने के लिए कहा था। एसआई ने आगे एक सहायक एसआई और एक हेड कांस्टेबल को जलपान लाने का निर्देश दे दिया। एएसआई और हेड कांस्टेबल होटल से तीन बक्से लाए और एसआई को सूचित कर दिया।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जब उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद पर्यटन विभाग के कर्मचारियों से पूछा कि क्या तीनों बक्सों में रखा नाश्ता प्रमुख अतिथियों को परोसा जाना था, तो उन्होंने कहा कि यह मेन्यू में शामिल नहीं था। जिस महिला इंस्पेक्टर को जलपान की चीज सौंपी गई, उसने किसी वरिष्ठ अधिकारी से नहीं पूछा और जलपान को यांत्रिक परिवहन अनुभाग में भेज दिया। यांत्रिक परिवहन अनुभाग ही जलपान का काम देखता है।
सीएम को समोसे नहीं मिलने के बाद सीआईडी के द्वारा मंगाए गए समोसे कहां गए, इसकी आंतरिक जांच करने के आदेश दिए गए। इस घटना के बाद डीएसपी रैंक के अधिकारी ने जांच के दौरान कई लोगों के बयान लिए जिसके बाद ये रिपोर्ट तैयार की गई। रिपोर्ट के अनुसार आईजी रैंक के एक अधिकारी ने पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर को होटल से कुछ खाने-पीने की चीजें लाने के लिए कहा था। एसआई ने आगे एक सहायक एसआई और एक हेड कांस्टेबल को जलपान लाने का निर्देश दे दिया। एएसआई और हेड कांस्टेबल होटल से तीन बक्से लाए और एसआई को सूचित कर दिया।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जब उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद पर्यटन विभाग के कर्मचारियों से पूछा कि क्या तीनों बक्सों में रखा नाश्ता प्रमुख अतिथियों को परोसा जाना था, तो उन्होंने कहा कि यह मेन्यू में शामिल नहीं था। जिस महिला इंस्पेक्टर को जलपान की चीज सौंपी गई, उसने किसी वरिष्ठ अधिकारी से नहीं पूछा और जलपान को यांत्रिक परिवहन अनुभाग में भेज दिया। यांत्रिक परिवहन अनुभाग ही जलपान का काम देखता है।
समोसे (प्रतीकात्मक)
- फोटो :
Adobe Stock
मामले का खुलासा कैसे हुआ?
इस मुद्दे पर बवाल सीआईडी की रिपोर्ट आने के बाद शुरू हुई। रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस कृत्य को 'सरकार विरोधी' कृत्य बताया और इसे VVIP सम्मान के विरुद्ध अपराध बताया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इसमें शामिल लोग अपने स्वयं के एजेंडे के अनुसार काम कर रहे थे।
इस मुद्दे पर बवाल सीआईडी की रिपोर्ट आने के बाद शुरू हुई। रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस कृत्य को 'सरकार विरोधी' कृत्य बताया और इसे VVIP सम्मान के विरुद्ध अपराध बताया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इसमें शामिल लोग अपने स्वयं के एजेंडे के अनुसार काम कर रहे थे।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर।
- फोटो :
संवाद न्यूज एजेंसी
समोसा विवाद पर विपक्ष क्या बोला?
घटना को सरकार विरोधी बोलने के बाद विपक्षी नेता हिमाचल सरकार पर निशाना साधने लगे और बयानबाजी का दौर शुरू हो गया। भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का भी बयान इस मामले में सामने आया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, 'हिमाचल की सरकार आजकल बिना सोचे समझे फैसले लेती है। आज इस पर चर्चा हो रही है कि समोसे जहां पहुंचने चाहिए थे वहां नहीं पहुंचे, बीच में ही खो गए और मुख्यमंत्री और हिमाचल प्रदेश सरकार को लगा कि ये बहुत गंभीर मामला है और इस पर जांच होनी चाहिए। जिन लोगों ने इसे खाया वो सरकार का हिस्सा रहे होंगे ये सरकार विरोधी गतिविधि कैसे है?'
घटना को सरकार विरोधी बोलने के बाद विपक्षी नेता हिमाचल सरकार पर निशाना साधने लगे और बयानबाजी का दौर शुरू हो गया। भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का भी बयान इस मामले में सामने आया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, 'हिमाचल की सरकार आजकल बिना सोचे समझे फैसले लेती है। आज इस पर चर्चा हो रही है कि समोसे जहां पहुंचने चाहिए थे वहां नहीं पहुंचे, बीच में ही खो गए और मुख्यमंत्री और हिमाचल प्रदेश सरकार को लगा कि ये बहुत गंभीर मामला है और इस पर जांच होनी चाहिए। जिन लोगों ने इसे खाया वो सरकार का हिस्सा रहे होंगे ये सरकार विरोधी गतिविधि कैसे है?'
विवाद पर सरकार सीआईडी ने क्या कहा?
मामले में सीआईडी के डीजी संजीव रंजन ओझा ने प्रतिक्रिया दी है। डीजी ने कहा, 'यह पूरी तरह से सीआईडी का आंतरिक मामला है। इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। सीएम समोसा नहीं खाते हमने किसी को नोटिस नहीं दिया है। हमने सिर्फ यह कहा है कि पता लगाएं कि क्या हुआ। सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है हम पता लगाएंगे कि यह जानकारी कैसे लीक हुई।'
मामले में सीआईडी के डीजी संजीव रंजन ओझा ने प्रतिक्रिया दी है। डीजी ने कहा, 'यह पूरी तरह से सीआईडी का आंतरिक मामला है। इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। सीएम समोसा नहीं खाते हमने किसी को नोटिस नहीं दिया है। हमने सिर्फ यह कहा है कि पता लगाएं कि क्या हुआ। सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है हम पता लगाएंगे कि यह जानकारी कैसे लीक हुई।'
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू।
- फोटो :
संवाद न्यूज एजेंसी
सीएम ने समोसा विवाद पर क्या कहा?
समोसा विवाद के तूल पकड़ने के बाद शुक्रवार को सीएम सुक्खू ने अपना पक्ष रखा। सीएम ने कहा, 'भाजपा बचकाना हरकत कर रही है। मुझे तो पता भी नहीं था कहां से समोसे आए हैं, मैं समोसे खाता नहीं।'
सीएम सुक्खू ने कहा कि समोसे की नहीं बल्कि अधिकारियों के 'दुर्व्यवहार' का पता लगाने के लिए जांच होगी।
वहीं, मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने भी समोसा विवाद पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल गलत बयानबाजी है। इस तरह की किसी जांच के आदेश नहीं दिए गए हैं। इस सरकार को बदनाम करने के लिए कुछ लोग मिलकर साजिश करते हैं। ऐसी कोई जांच सरकार की तरफ से नहीं करवाई गई है।
एक बयान में कहा गया, 'मुख्यमंत्री पुलिस मुख्यालय में आयोजित सीआईडी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गए थे। स्वास्थ्य कारणों से वे बाहर का खाना नहीं खाते। सीआईडी ने उनके द्वारा मंगाए गए खाद्य पदार्थों के बारे में एक आंतरिक विभागीय जांच की। सरकार ने कोई सीआईडी जांच शुरू नहीं की। किसी को भी राज्य की छवि खराब नहीं करनी चाहिए। विपक्ष अन्य राज्यों में चुनावों और हिमाचल में सत्ता के लिए अपनी आंतरिक लड़ाई के बारे में ऐसा कर रहा है। सीआईडी तस्वीर में इसलिए आई क्योंकि यह कार्यक्रम सीआईडी का था।'
समोसा विवाद के तूल पकड़ने के बाद शुक्रवार को सीएम सुक्खू ने अपना पक्ष रखा। सीएम ने कहा, 'भाजपा बचकाना हरकत कर रही है। मुझे तो पता भी नहीं था कहां से समोसे आए हैं, मैं समोसे खाता नहीं।'
सीएम सुक्खू ने कहा कि समोसे की नहीं बल्कि अधिकारियों के 'दुर्व्यवहार' का पता लगाने के लिए जांच होगी।
वहीं, मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने भी समोसा विवाद पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल गलत बयानबाजी है। इस तरह की किसी जांच के आदेश नहीं दिए गए हैं। इस सरकार को बदनाम करने के लिए कुछ लोग मिलकर साजिश करते हैं। ऐसी कोई जांच सरकार की तरफ से नहीं करवाई गई है।
एक बयान में कहा गया, 'मुख्यमंत्री पुलिस मुख्यालय में आयोजित सीआईडी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गए थे। स्वास्थ्य कारणों से वे बाहर का खाना नहीं खाते। सीआईडी ने उनके द्वारा मंगाए गए खाद्य पदार्थों के बारे में एक आंतरिक विभागीय जांच की। सरकार ने कोई सीआईडी जांच शुरू नहीं की। किसी को भी राज्य की छवि खराब नहीं करनी चाहिए। विपक्ष अन्य राज्यों में चुनावों और हिमाचल में सत्ता के लिए अपनी आंतरिक लड़ाई के बारे में ऐसा कर रहा है। सीआईडी तस्वीर में इसलिए आई क्योंकि यह कार्यक्रम सीआईडी का था।'