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Zakir Hussain: तबले पर रियाज करने के लिए सुबह तीन बजे उठते थे जाकिर हुसैन, सात साल की उम्र से शुरू हुआ संघर्ष

Mon, 16 Dec 2024 07:12 AM IST
साक्षी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: साक्षी Updated Mon, 16 Dec 2024 07:12 AM IST
सार

Zakir Hussain: संगीतकार उस्ताद तबला वादक जाकिर हुसैन ने बताया था कि उनके पैदा होते ही उनके पिता अल्ला रखा ने उनके कानों में तबले के सुर और ताल फूंके थे।

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Zakir Hussain passed away at age of 73 know about Indian musician Tabla player career struggle tabla practice
जाकिर हुसैन - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

संगीतकार उस्ताद तबला वादक जाकिर हुसैन आज हमारे बीच नहीं रहे। 73 वर्ष की आयु में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। जाकिर हुसैन को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण रविवार रात को सैन फ्रांसिस्को के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वे आईसीयू में भर्ती थे, जहां उन्होंने सोमवार सुबह दम तोड़ दिया। जाकिर हुसैन को आज दुनियाभर के लोग उस्ताद तबला वादक के रूप में जानते हैं, लेकिन उनके लिए यह पहचान बनाना आसान नहीं था, इसके लिए उन्होंने बचपन से ही दिन-रात कठोर तपस्या की और काफी मेहनत और संघर्ष के बाद यह मुकाम हासिल किया। चलिए आज आपको हम उनके संघर्षों से रूबरू करवाते हैं...

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जब कानों में फूंके गए तबले के सुर और ताल
एक बार तबला वादक जाकिर हुसैन ने बताया था कि उनके पैदा होते ही उनके पिता अल्ला रक्खा ने उनके कानों में तबले के सुर और ताल फूंके थे। उन्होंने जाकिर की मां से कहा था कि संगीत ही मेरी साधना है और यही सुर और ताल मेरे बेटे के लिए मेरी दुआ है। बड़े होने के साथ-साथ जाकिर हुसैन के अंदर भी तबला वादक बनने का जज्बा साफ झलकने लगा था और तबले के प्रति उनकी दीवानगी को देख उनके पिता ने महज सात साल की उम्र में ही उनका रियाज शुरू करवा दिया था।

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जाकिर ने सरस्वती और गणेश वंदना भी सीखीं
जाकिर हुसैन अपने पिता के साथ सुबह 3:00 बजे से लेकर 6:00 बजे तक रियाज करते थे, जिसमें सुर, लय और ताल के साथ ही जाकिर को कई श्लोक और मंत्र भी सिखाए गए। उन्हें सरस्वती और गणेश वंदना भी सिखाई गईं। एक ओर जाकिर तबला वादक बनने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत कर रहे थे तो वहीं दूसरी ओर उनकी मां बावी बेगम नहीं चाहती थीं कि जाकिर तबला बजाएं। वह जाकिर को डॉक्टर या इंजीनियरिंग बनता देखना चाहती थीं। ऐसे में जाकिर को तबले से दूर करने के लिए उन्हें स्कूल के आखिरी दो वर्षों के दौरान पढ़ने के लिए दूर भेज दिया गया, लेकिन तबला और जाकिर तो एक दूसरे के लिए ही बने थे।

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मधुबाला के साथ काम नहीं कर पाए जाकिर
जब फिल्म 'मुगल-ए-आजम' में जाकिर के पिता अल्लाह रक्खा म्यूजिक कंपोज कर रहे थे, तब फिल्म के निर्देश के. आसिफ ने जाकिर को सलीम का रोल ऑफर किया था। इस पर दिलीप कुमार भी मान गए थे, लेकिन जाकिर के पिता ने इससे इनकार कर दिया और कहा कि अभिनय उनके बेटे का दिमाग बिगाड़ देगी। ऐसे में जाकिर मधुबाला के साथ काम करने से चूक गए। भले ही उन्होंने मधुबाला के साथ फिल्म में काम नहीं किया, लेकिन आगे चलकर उन्होंने अभिनय में भी अपना हाथ आजमाया। जाकिर को सिर्फ तबले पर ही महारत हासिल नहीं थी, बल्कि वह म्यूजिक भी कंपोज करते थे। इसके साथ ही अभिनय भी करते थे। वह 'जाकिर एंड हिज फ्रेंड्स', 'हिट एंड डस्ट', 'द सेकंड बेस्ट एग्जॉटिक मेरीगोल्ड होटल' जैसी डॉक्यूमेंट्री में भी अभिनय कर चुके हैं। फिल्म 'साज' में जाकिर ने संगीत बनाने के साथ अभिनय भी किया है।

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