EXCLUSIVE: रोहित शेट्टी से मिली दिव्यांका त्रिपाठी को तारीफ, KKK11 में हिस्सा लेने के लिए की कड़ी मेहनत
- खतरों के खिलाड़ी के लिए दिव्यांका ने शून्य से की शुरुआत
- विवेक ने दिव्यांका की डाइट का रखा पूरा ध्यान
- रोहित शेट्टी से शो में मिली तारीफ
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विस्तार
प्रश्न: मैं आपकी सेहत के बारे में जानना चाहूंगी सबसे पहले, क्योंकि खतरों के खिलाड़ी की शूटिंग के बाद आप सबको क्वारंटीन में रखा गया था?
उत्तर : मेरी सेहत बिलकुल ठीक है, क्योंकि हमारे इतने सारे टेस्ट हुए थे उसके बाद क्वारंटीन और घर पर भी क्वारंटीन सब कुछ किया गया इसलिए अच्छी सेहत के साथ हम सब घर वापस लौटे हैं। ये हमारे परिवारों के लिए अच्छा है। जब हम जा रहे थे तो मन में भय था कि अपने परिवार को हम कोरोना की स्तिथि में छोड़कर जा रहे हैं और जब हम वहां पहुंचे तो हमारा परिवार हमारे लिए परेशान हो रहा था कि कही हम वहां पर कोरोना से ग्रस्त न हो जाए। वो यही दुआ कर रहे थे कि हम सही सलामत रहें। सबसे अच्छी बात ये है कि हम इस महामारी से बचते बचाते अपने घर पहुंच गए हैं और वो भी बहुत सुखद यादों के साथ हम लौटे हैं। मेरा अनुभव इतना अनोखा था कि मैं किस्से कहानियां सुनाती नहीं थक रही हूं। मेरी हर बातचीत में कोई नया किस्सा होता है। बस मेरे घर वालों का पूरा मनोरंजन हो रहा है।
प्रश्न: क्या आपको लगता है खतरों के खिलाड़ी शो आपकी जो इशी मां की छवि है लोगो के मन में वो हटा पाएगा?
उत्तर: ये जो मेरी इशी मां की छवि है, ये लोगो के मन में बनी हुई है क्योंकि उन्होंने मुझे कभी किसी और रूप में देखा ही नहीं। इतने वर्षों में मेरी कोशिश यही रही है कि मैं जो भी किरदार निभाऊं वो अलग तरह का हो और मेरी कोशिश सफल भी हुई। मेरा बनूं मैं तेरी दुल्हन में जो पहला किरदार था, वो एक अनपढ़ लड़की थी, फिर मैंने कॉमेडी शो किया उसके बाद क्राइम पेट्रोल और फिर इन सबके बाद मैंने इशिता का किरदार निभाया जो एक दांतो की डॉक्टर थी, जो आज की नारी है। उस शो में मैं महिला सशक्तिकरण पर बात कर रही थी। ये करते हुए मैंने कोशिश की कि लोगों को मेरा अलग-अलग रूप दिखे, लेकिन मेरी ये कोशिश कम ही लोगों तक पहुंची शायद। लोगों जो अधिक नजर आया वो ये था कि वो एक घरेलु लड़की है, जो सीधी-साधी है और परिवार के बीच रहती है। तो मेरे साथ जो सबसे कमाल बात हुई वो ये थी कि मैंने सोचा ही नहीं था मैं अपनी छवि बदलने के लिए जा रही हूं। मैं बस अपनी वो जिंदगी दोबारा जीने जा रही थी जो मैं बचपन में थी। मुझे एडवेंचर करना हमेशा से पसंद हैं। कभी-कभी आपका दिल तेजी से धड़कता है, लेकिन फिर भी आप अपना पूरा प्रयास डाल देते हो कि किसी भी तरह से बस ये एक और पड़ाव पार करना है। बचपन में मैं हमेशा इसी जोन में रहती थी, लेकिन फिर जब बड़ी हुई तो वो छोड़कर मैं एक अभिनेत्री बन गई। मेरे लिए ये अनुभव बहुत ही कमाल था क्योंकि मैं वापिस से खतरों के खिलाड़ी में अपना बचपन जी रही हूं। वो कहावत है ना 'अनकहे ढंग से बिन मांगे मोती मिले।' मेरे लिए ये वही था, इससे मुझे अपनी छवि बदलने का भी मौका मिल गया और मेरे लिए ये सोने पर सुहागा हो गया।
प्रश्न: जब आपने खतरों के खिलाड़ी करने का निर्णय लिया था तो आपके पति विवेक दहिया की क्या प्रतिक्रिया थी?
उत्तर: विवेक बहुत ज्यादा उत्साहित और खुश थे। मुझे अपने ऊपर इतना यकीन नहीं था जितना शायद उन्हें मुझपर भरोसा था। जब भी मैं नया या फिर एडवेंचर से संबंधित कुछ भी करने जाती हूं तो उन्होंने मेरी प्रतिक्रियाएं उस समय पर देखी हैं। उन्होंने देखा है कि मुझे ये करते हुए खुशी होती है। उन्हें भी लग रहा था कि मुझे ये करना चाहिए, हां ये उन्हें भी नहीं पता था कि मैं कितना दूर तक जाऊंगी। हमारे पास सिर्फ एक ही महीना था जिसमें निर्णय लेकर ज्वाइन करना था। इस बीच विवेक ने मुझे मेरे वर्कआउट और डायट पर बहुत गाइड किया। लॉकडाउन के बाद जहां जिम भी सारे बंद हैं तो आप समझ लीजिए मैं जीरो से भी नीचे थी। विवेक मेरे उस स्तर को ऊपर लेकर आए। मेरे लिए एक इंस्ट्रक्टर उन्होंने रखा जिसे वो गाइड करते थे। उस समय तक शायद विवेक को भी नहीं पता था कि मैं कैसे कर पाऊंगी, लेकिन जब मैंने उन्हें बताना शुरू किया कि स्टंट कैसे जा रहे हैं तो उन्हें इतनी अधिक खुशी हुई जितनी आज तक मुझे या किसी और को भी मेरे लिए नहीं हुई होगी। आने के बाद उन्होंने अलग बयान दिया और कहा कि मेरे घर आने के बाद उन्हें सुकून मिला है। उन्हें ये डर रहता था कि मैं कही टूट-फूट न जाऊं। वो यही प्रार्थना करते थे कि मैं सही सलामत लौट आऊं। उनकी बहुत दुआएं मेरे साथ रही हैं।
प्रश्न: आपने अपनी फिटनेस पर कितना काम किया और कैसे आप खतरों के खिलाड़ी के लिए तैयार हुईं?
उत्तर: जैसा कि मैंने आपको कहा कि मैं शून्य के नीचे चली गई थी तो वो बिलकुल सच है। क्योंकि इस शो को हां करने से पहले मैंने ये सोचा कि मैं ये कर भी पाऊंगी या नहीं मैं पहले अपनी शारीरिक मजबूती को चेक तो करूं। नॉर्मल चलते हुए मेरे पैर में दर्द होता था, तो हमने डॉक्टर को दिखाया और एमआरआई (MRI)करवाया तो हमें पता लगा कि वो लिगमेंट है जो आज से पांच छह साल पहले हुआ था और आज तक वो वैसा का वैसा ही है। डॉक्टर ने कहा कि ये सिर्फ सर्जरी से ठीक होगा या फिर व्यायाम कीजिए उससे थोड़ी शायद मजबूती आए, लेकिन किस हद तक सही होगा उसकी कोई गारंटी नहीं दे सकता। जब मैंने पूछा कि मैं खतरों के खिलाड़ी कर सकती हूं तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा की मैं कहूंगा नहीं, लेकिन अगर आपका मन मानता है तो आप कुछ भी कर सकती हैं। उसके बाद मैंने एकदम बेसिक लेवल से शुरुआत की, क्योंकि मेरे पैरो में बिलकुल भी ताकत नहीं थी। रिहेबिटेशन के 15 दिन के बाद मैंने नॉर्मल व्यायाम शुरू किया। मैंने वजन कम करने पर बिलकुल भी ध्यान नहीं दिया। आमतौर पर जब भी जिम जाते हैं तो हमारा पहला उद्देश्य अपना वजन कम करना होता है, लेकिन मेरा उद्देश्य वजन कम करना नहीं था बल्कि ये था कि मेरा शरीर मजबूत होना चाहिए। मैं छोटी एक्सरसाइज करूं, लेकिन ऐसी करूं कि मेरा शरीर सही और मजबूत हो। मैं खुद को मजबूत करने पर ध्यान दे रही थी वजन कम करने पर नहीं। अपने कोर पर काम करना और संतुलन बनाए रखना यही मेरा फोकस था, ये मेरे बहुत काम आया। अगर मजबूती की बात करूं तो मैं मजबूत हूं।
प्रश्न: क्योंकि केप टाउन में शूटिंग हुई है तो आप वहां पर कौन-कौन सी जगह घूमीं?
उत्तर: आम तौर पर जो सोशल मीडिया पर दिखता है वो खूबसूरत तो होता है लेकिन सच्चाई कभी-कभी बिलकुल उसके विपरीत होती है। हमारी जितनी भी तस्वीरें हैं वो सब लोकेशंस की हैं और वो भी बहुत ही मुश्किल से हम ले पाते थे ताकि स्टंट के बारे में किसी को न पता चले। यहां तक कि हमें भी नहीं पता चलता था स्टंट के बारे में क्योंकि अगर हमें पता चल जाता तो हम मानसिक रूप से उसके लिए तैयार हो जाते और वो गलत होता। आप कह सकते हैं कि वो बहुत ही अनबायस्ड सा माहौल था जहां पर हर बात को सीक्रेट रखना बहुत जरुरी था इसलिए हम बहुत अधिक तस्वीरें ले नहीं सके। लेकिन हम भी कलाकार हैं तो उस माहौल में भी हम तस्वीरें ले ही लेते थे। लेकिन असल में केप टाउन घूमने का हमें जरा भी मौका नहीं मिला। हम कोरोना की वजह से एक बायो-बबल में थे। हम यहां से कोरोना संक्रमित होकर नहीं गए थे तो हम वहां पर भी किसी को कोरोना संक्रमित नहीं करना चाहते थे। हम वहां घूमते और गलती से अगर किसी एक हो जाता तो पूरी यूनिट में फैल जाता इसलिए हमने बहुत एहतियात बरती है। पहले दिन पर जब हम केप टाउन पहुंचे थे तो हमें कुछ घंटे फ्री मिले तो हम वहां एक मॉल में गए और वहां थोड़ी शॉपिंग की। मैंने सोचा चलो थोड़ी शॉपिंग अभी कर लेती हूं और थोड़ी बाद में कर लूंगी, क्योंकि अब तो रोज है हमारे पास। लेकिन मुझे ये नहीं पता था कि हमें मैसेज आ जाएगा कि आज आपका आखिरी दिन है शॉपिंग करने का। हमें पहले दिन ही मैसेज मिल गया था उसके बाद हमारी शॉपिंग बंद, होटल से बाहर जाना बंद। इतनी खूबसूरत वादियों में ले जाकर बस हमें बिठा दिया था कि हम तड़प रहे थे। वो कहावत है न कि आपके आसपास एक बहुत ही खूबसूरत समुद्र है लेकिन आप उसका पानी पी नहीं सकते।
प्रश्न:खतरों के खिलाड़ी में होने वाले स्टंट के बारे में सुनकर ही कई लोग घबरा जाते हैं, क्या आपको कभी डर लगा?
उत्तर: मैंने इस शो के पहले सीजन देखें ताकि मैं ये जान सकूं कि अगर मैं हां कहती हूं शो के लिए तो क्या-क्या होगा। कई सारे ऐसे स्टंट थे जिसे देखने के बाद मुझे ये बिलकुल भी डर नहीं लगा कि मुझे ऊंचाई पर जाने में डर लगेगा या फिर पानी में जाकर डर लगेगा। उन अलग-अलग तत्वों का मुझे डर नहीं था। मुझे डर इस बात का था कि मेरी ये जो फिजीकेलिटी है मेरा जो लिगमेंट का और स्लिप डिस्क का दिक्कत है वो कहीं बीच में तकलीफ न दे जाए और ये मेरे लिए कहीं जीवन भर की तकलीफ न बन जाए। इस शो में आपको बहुत ही अजीबों-गरीब जगह से आपको कूदा फांदी करनी पड़ती है, बहुत कुछ होता है बस एक वही था मन में डर। लेकिन फिर मैंने सोचा बचपन में भी तो बहुत कुछ कर जाती थी तब भी कुछ नहीं आता था। बचपन में तो अधिक चांस थे चोट लगने के, लेकिन यहां पर तो पूरा सेफ्टी नेट है। खतरों के खिलाड़ी की टीम की तरफ से इस बात का पूरा-पूरा ध्यान रखा जाता था कि आपके लिए कुछ भी जानलेवा न हो। जब इस बात का मैंने खुद को आश्वासन दिया तो सब ठीक होता चला गया। मुझे लगता है बस एक निर्णय लेने की देरी होती है रास्ते अपने आप बनते जाते हैं।
प्रश्न: क्या दिव्यांका त्रिपाठी का कोई फोबिया था जो खतरों के खिलाड़ी ने पूरी तरह खत्म कर दिया?
उत्तर: फोबिया मुझे किसी चीज से नहीं था, लेकिन मुझे तैरना नहीं आता था जोकि मुझे अभी भी नहीं आता। लेकिन जाने से पहले मैंने बहुत सारे वीडियो देखें। कोरोना की वजह से सब जगह स्वीमिंग पूल भी बंद थे। इसलिए मैं एक परिचित के घर गई और स्वीमिंग पूल में उतरी ताकि कैसे पानी में बॉडी आगे की तरफ बढ़ती है उन मूव्स को समझ सकूं। इसके लिए मैंने एक दो दिन अभ्यास जरूर किया। लेकिन ऐसा नहीं था कि मुझे पानी से बहुत अधिक भय है इसकी शायद एक वजह ये है कि मैंने उसे अपने मन में कभी डर को बहुत बड़ा बनाया ही नहीं। इसलिए मैंने थोड़ा सा हाथ पैर चलाने का जो अभ्यास किया वो मेरे बहुत काम आया और मैं हो गई पार खतरों के खिलाड़ी में।
प्रश्न: रोहित शेट्टी के साथ काम करने का अनुभव कैसा था आपका?
उत्तर: मैं खुद को खुशनसीब मानती हूं कि मुझे रोहित जी के साथ काम करने का मौका मिला। रोहित जी बहुत अच्छे निर्देशक हैं लेकिन उससे भी अच्छे वो शिक्षक हैं। वो जो दो बोल बोलते हैं अगर आप उसे ध्यान से सुन लो तो उससे आपका काम बहुत आसान हो जाएगा। अपने गुरु पर विश्वास हमेशा रखना चाहिए। जिन-जिन प्रतियोगियों ने उनकी बात सुनी और समझी उनका काम अमूमन तौर पर हो जाता था। उनका होना आपको आपके स्टंट और संघर्ष में एक भरोसा देता है। उनकी तारीफ के दो बोल भी मिल जाए तो ऐसा लगता है कि मेडल मिल गया। तो मैं बहुत लकी हूं कि मुझे उनकी तारीफों के बोल मिलें हैं। फिल्मों में न सही यहां उनके साथ काम किया और उनके अंडर में स्टंट किए इस बात की मुझे खुशी है।
प्रश्न: क्या कोई ऐसा प्रतियोगी था इस सीजन में जिसकी टांग खिचाई रोहित शेट्टी ने की हो?
उत्तर: टांग खिचाई मेरे साथ तो नहीं की उन्होंने, हां डांट बड़े अच्छे से लगाते हैं वो बिलकुल गुरूजी की तरह। तो उन्होंने कुछ लोगों की खिचाई भी की है, डांट भी लगाई है। लेकिन अगर मैं नाम ले लेती हूं तो शो देखने में क्या मजा आएगा। कुछ कंटेस्टेंट ऐसे थे जो बहुत ही उम्दा थे और मुझे उनसे ये डर था कि ये तो बस क्या ही कर जाएंगे। लेकिन उनको डांट पड़ी, क्योंकि आम तौर पर दूर से खड़े होकर हमें यही लगता है कि हम बहुत कुछ कर रहे हैं। लेकिन जब हम उस माहौल में होते हैं तो सब कुछ बदल जाता है। उस वक्त सिर्फ आप और आपका जज्बा होता है, क्योंकि जो भी करना है वो आपको करना है। अब उन्होंने खिचाई किसकी की वो आपको शो देखने के बाद पता चलेगा।
प्रश्न: जब आपने कीड़े-मकोड़ो वाले स्टंट्स किए खतरों के खिलाड़ी में तो आपको कुछ एहसास होता था?
उत्तर: मुझे कॉक्रोच से जो एलर्जी हुई वो कम से कम 15 दिनों तक चली थी दवाईयां लेने के बाद भी। जब उन्होंने मुझे इंजेक्शन लगाया उसके पांच दिन बाद जाकर ठीक हुआ है। कॉक्रोच काफी हानिकारक हो सकते हैं। काफी दिनों तक वो आपको ये याद दिलाते हैं कि वो आपके ऊपर से होकर गुजरे हैं।
प्रश्न: क्या आपने असल जिंदगी में कोई खतरनाक काम किया है जो आपके प्रशंसकों को भी आज तक नहीं पता?
उत्तर: मैंने काफी सारे खतरनाक काम किए हैं। लेकिन जब मैं पहली बार वॉटर स्कीइंग सीख रही थी तो उन्होंने मेरे दोनों पैरों में एक-एक पट्टी बांधी थी, जिसपर मुझे संतुलन बनाकर खड़े होना था और आगे से मोटर बोट मुझे खींच रही थी। उस दौरान मुझे पानी में डूबने से इतना अधिक डर लगता था कि जैसे ही मुझे वॉटर बोट ने खींचा मैं पानी में औंधें मुंह गिर गई। दोनों स्केटबोर्ड पीछे छूट गए और मैं पानी में उनके पीछे खिची चली जा रही थी वो मुझे बोल रहे थे रस्सी छोड़ दो, लेकिन मैं उनसे ये कह रही थी नहीं मैं डूब जाऊंगी। वो मुझे समझा रहे थे कि मैंने लाइव जैकेट पहनी है मैं नहीं डूबूंगी। लेकिन मैंने बोट के पीछे-पीछे भोपाल के पूरे तालाब का चक्कर लगाया है मतलब मैं खुद वॉटर स्कीइंग बन गई थी और मेरा शरीर नीला-पीला पड़ गया था उस दौरान मुझे डूबने का डर लग रहा था। मैं बचपन में घोड़े से भी गिर चुकी हूं। मैं पैरा सीलिंक जब सीख रही थी तो हम लैंडिंग के वक्त झाड़ियों में गिर जाते थे। मैंने बहुत चोटें खाई हैं ऐसी कितने बताऊं आपको।
प्रश्न: आपके अलावा कौन सा ऐसा प्रतियोगी है खतरों के खिलाड़ी का जो आपको लगता है सबसे अधिक स्ट्रांग है?
उत्तर: मुझे लगता है वरुण बहुत ही स्ट्रांग है। उन्होंने शारीरिक रूप से हमेशा खुद को चुनौतियां दी हैं। उन्होंने पहले भी कई स्टंट बेस्ड रियलिटी शो किए हैं तो उन्हें काफी अधिक ज्ञान है इन सब चीजों का। उनके अंदर एक जज्बा है कि मुझे चोट नहीं लगती है मुझे करके दिखाना है। तो वो उसका जज्बा मुझे बहुत अच्छा लगता है।
प्रश्न: क्या आगे आने वाले समय में भी हम आपको और भी रियलिटी शोज में देखेंगे?
उत्तर: देखिए मैं चुनौती के लिए हमेशा तैयार हूं। अगर कुछ अच्छा चुनौतीपूर्ण होगा जिसे करके मुझे मजा आएगा और ये महसूस होगा कि आज जिंदगी में कुछ अच्छा करके निकले हैं, तो वो मैं जरूर करूंगी। मैं भी इस तरह के काम का इंतजार कर रही हूं।
प्रश्न: इस इंटरव्यू के खत्म होते-होते आप अमर उजाला के दर्शकों को क्या कहना चाहेंगी?
उत्तर: मैं अमर उजाला के रीडर्स से बस यही कहना चाहूंगी कि बचपन से लेकर आज तक जो भी हम सीखते हैं वो कभी बेकार नहीं होता। आप हमेशा सीखते रहें और कभी भी नकारात्मक सोच न रखें। कभी भी ये न सोचे कि अगर ये नहीं हुआ तो फिर क्या मतलब। हमेशा ये ध्यान रखें कि अगर एक रास्ता बंद होता है तो दूसरा जरूर खुलता है और अगर कोई चीज नहीं हुई है तो उसके पीछे कुछ अच्छी वजह होती है। अगर आप सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते हैं तो फिर आपकी जिंदगी गुलजार है।