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Exclusive : नागिन बनूंगी पर डसूंगी नहीं : दिव्यांका त्रिपाठी
अमित कर्ण/ अमर उजाला, मुंबई ब्यूरो
Updated Sun, 02 Oct 2016 04:11 PM IST
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दिव्यांका त्रिपाठी
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मशहूर टीवी अभिनेत्री दिव्यांका त्रिपाठी इन दिनों स्टार प्लस के शो ' ये हैं मोहब्बतें' में नजर आ रही हैं। शो में इशिता भल्ला के किरदार से वो खासी लोकप्रिय हुई हैं। उन्होंने हाल ही में शो के को-स्टार विवेक दाहिया से शादी भी की है।
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दस साल पहले शुरू हुआ था सफर
दिव्यांका कहती हैं, 'मेरी जर्नी बेहद एडवेंचेरस रही है। मैं यह नहीं कहूंगी कि मेरी जर्नी इंडस्ट्री में दस साल पहले शुरू हुई थी। इसकी शुरुआत तो दस साल पहले भोपाल में हो गई थी जब मैं आकाशवाणी और दूरदर्शन में काम कर रही थी। इतना ही नहीं अलग-अलग तरह के रोचक और रोमांच खेल से भी मैं जुड़ी रही हूं। वास्तविक जर्नी तब शुरू हुई थी। उन सब की वजह से मेरी जर्नी संपूर्ण हुई है।
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शादी के बाद से बदल गई हूं
शादी के बाद इंसान ज्यादा बैलेंस्ड हो जाता है अगर सही जीवनसाथी आप को मिल जाए। मैं शुक्रगुजार हूं ऊपरवाले की जो विवेक दाहिया मुझे जीवनाथी के रूप में मिले। वह इसलिए कि वो बड़े सुलझे हुए इंसान हैं। अच्छी बात यह है कि हम दोनों साथ में बढ़ रहे हैं। रिश्ते में यही तो अच्छी बात है कि दोनों मियां-बीवी साथ-साथ आगे बढ़ें। ना कि एक पड़ाव पर आ ठहर और थम जाएं। वो मुझे बहुत कुछ सिखाते हैं। मैं उन्हें बहुत कुछ सिखा देती हूं। तो सीखने-सिखाने में हम दोनों का बहुत फायदा हो रहा है। दोनों के लिए विन-विन सिचुएशन है।
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मन से मान लिया जीवनसाथी
करियर में बाधा नहीं है शादी
ऐसे ख्याल खुद को रोकने के तरीके हैं। जब इंसान बहुत डरपोक होता है, तब वह ऐसी बातें करता है। आप को अपने हुनर पर यकीन है। खुद पर भरोसा है तो आप ऐसी बातें नहीं सोचते हैं। मैं और विवेक एक-दूसरे से अनजान थे। इतनी सी बात थी कि हम दोनों इस शो में काम कर रहे हैं बस। उसके आगे कोई बातचीत नहीं। सेट पर हम दोनों एक्टिंग करने आते और चले जाते थे। यह सिलसिला 6 महीने तक चला। तब किसी ने कहा कि आप दोनों को एक-दूसरे को कंसीडर करना चाहिए। वह इसलिए कि आप दोनों सिंगल हैं। दोनों की सोच भी काफी मिलती-जुलती है। वह बात हम दोनों के जहन में घर कर गई।
मन से मान लिया जीवनसाथी
हम अजीब कशमकश की स्थिति से गुजरने लगे। उस कशमकश के चलते उसके बाद से हम दोनों एक-दूसरे में संभावित जीवनसाथी तलाशने लगे। वैसे प्रपोज तो मेरे सह कलाकार पंकज भाटिया ने किया था। वह यूं कि मेरे और विवेक के मन में प्यार का बीजारोपण तो उन्होंने ही किया। पंकज की बातों के चलते ही हम दोनों के मन में प्यार की चिंगारी जल गई थी। उन सब चीजों से गुजरने के एक महीने बाद विवेक ने मुझे आखिरकार प्रपोज कर दिया। मैंने तब एक लड़की की तरह ही बिहेव किया।
ऐसे ख्याल खुद को रोकने के तरीके हैं। जब इंसान बहुत डरपोक होता है, तब वह ऐसी बातें करता है। आप को अपने हुनर पर यकीन है। खुद पर भरोसा है तो आप ऐसी बातें नहीं सोचते हैं। मैं और विवेक एक-दूसरे से अनजान थे। इतनी सी बात थी कि हम दोनों इस शो में काम कर रहे हैं बस। उसके आगे कोई बातचीत नहीं। सेट पर हम दोनों एक्टिंग करने आते और चले जाते थे। यह सिलसिला 6 महीने तक चला। तब किसी ने कहा कि आप दोनों को एक-दूसरे को कंसीडर करना चाहिए। वह इसलिए कि आप दोनों सिंगल हैं। दोनों की सोच भी काफी मिलती-जुलती है। वह बात हम दोनों के जहन में घर कर गई।
मन से मान लिया जीवनसाथी
हम अजीब कशमकश की स्थिति से गुजरने लगे। उस कशमकश के चलते उसके बाद से हम दोनों एक-दूसरे में संभावित जीवनसाथी तलाशने लगे। वैसे प्रपोज तो मेरे सह कलाकार पंकज भाटिया ने किया था। वह यूं कि मेरे और विवेक के मन में प्यार का बीजारोपण तो उन्होंने ही किया। पंकज की बातों के चलते ही हम दोनों के मन में प्यार की चिंगारी जल गई थी। उन सब चीजों से गुजरने के एक महीने बाद विवेक ने मुझे आखिरकार प्रपोज कर दिया। मैंने तब एक लड़की की तरह ही बिहेव किया।
जुतों पर होती है नोंकझोंक
विवेक दाहिया और दिव्यांका त्रिपाठी
जुतों पर होती है मीठी नोंकझोंक
हम दोनों में काफी कुछ कॉमन है। म्यूजिक का टेस्ट, हॉबीज। हम एक ही टॉपिक पर लंबी बात कर सकते हैं। आमतौर पर ऐसे मामलों में टॉपिक बदलते रहते हैं। हमारे साथ ऐसा नहीं है। हम एक ही टॉपिक पर ढेर सारी बातें कर लेते हैं। वो घर के भीतर जूते पहन आ जाते हैं। यह मुझे पसंद नहीं है। मैं कह देती हूं जूते बाहर निकालो। इस पर हमारी मीठी नोंकझोक हो जाती है।
नागिन बन डसूंगी नहीं
अगर किसी को लगता है कि कमर्शियल सीरियल नहीं होना चाहिए? उनसे मेरा सवाल है कि आप फिर देख क्यों रहे हैं? टीआरपी किसको मिल रही है? जिसको टीआरपी मिल रही है, निर्माता वही तो देंगे। कोई अगर कहे कि हमें कैल्सियम की गोलियां नहीं चाहिए, हमें तो चूना ही पसंद है तो उनका क्या किया जा सकता है? तो हम चूना ही देंगे। हालां कि यह गलत है।
हम दोनों में काफी कुछ कॉमन है। म्यूजिक का टेस्ट, हॉबीज। हम एक ही टॉपिक पर लंबी बात कर सकते हैं। आमतौर पर ऐसे मामलों में टॉपिक बदलते रहते हैं। हमारे साथ ऐसा नहीं है। हम एक ही टॉपिक पर ढेर सारी बातें कर लेते हैं। वो घर के भीतर जूते पहन आ जाते हैं। यह मुझे पसंद नहीं है। मैं कह देती हूं जूते बाहर निकालो। इस पर हमारी मीठी नोंकझोक हो जाती है।
नागिन बन डसूंगी नहीं
अगर किसी को लगता है कि कमर्शियल सीरियल नहीं होना चाहिए? उनसे मेरा सवाल है कि आप फिर देख क्यों रहे हैं? टीआरपी किसको मिल रही है? जिसको टीआरपी मिल रही है, निर्माता वही तो देंगे। कोई अगर कहे कि हमें कैल्सियम की गोलियां नहीं चाहिए, हमें तो चूना ही पसंद है तो उनका क्या किया जा सकता है? तो हम चूना ही देंगे। हालां कि यह गलत है।