फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Television ›   bigg boss content against women?

क्या सलमान खान का बिग बॉस स्त्री विरोधी है?

Sat, 13 Dec 2014 03:11 PM IST
Updated Sat, 13 Dec 2014 03:11 PM IST
विज्ञापन
bigg boss content against women?

फ़िल्में, टीवी धारावाहिक, विज्ञापन।। ये सब माध्यम महिलाओं को लेकर समाज की सोच में बदलाव लाने का काम करते हैं।बहुत सी बातें जिन पर समाज में खुलकर चर्चा नहीं होती थी, मास मीडिया के माध्यम से हमारे ड्राइंग रूम तक पहुँच चुकी हैं।

विज्ञापन


लेकिन कई बार इन माध्यमों का नकारात्मक रूप भी देखने में आता है। ये समाज की रुढ़िवादी सोच को बढ़ावा देते प्रतीत होते हैं। जैसे हाल ही में बिग बॉस में फ़िल्म स्टार सलमान ख़ान ने कुछ ऐसी टिप्पणियाँ की जो स्त्री विरोधी लगती हैं।
विज्ञापन


लेखिका और पत्रकार मृणाल पांडे की एक मशहूर लाइन है, "प्रेशर कुकर के आविष्कार ने जितना औरतों की आज़ादी सुनिश्चित की है, उतना किसी और कारण ने नहीं। सोप ओपेरा, फ़िल्में, रियलिटी शो, विज्ञापन- ये सब औरतों की तरफ़ समाज की जड़ सोच पर प्रहार करने की एक भूमिका में होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


कल तक कंडोम की बात तो दूर औरतों के स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी सैनिटरी नैपकीन की बात करना भी ‘वर्जित’ समझा जाता था। आज विज्ञापनों के माध्यम से ये हमारे ड्राइंग रूम का हिस्सा हैं, जिन्हें हम अपने बग़ल में बैठे बुज़ुर्गों के साथ भी देखते हैं। यानी ये हमारी सोच, हमारी भाषा, हमारी संस्कृति में बदलाव ला रहे हैं।

बिग बॉस पेश करता है गलत छवि

bigg boss content against women?

दूसरी ओर, हम एक साथ बिग बॉस जैसे रियलिटी शो के खुलेपन और मध्य युग की औरतों की छवि गढ़ रहे सास-बहू धारावाहिकों की तरफ़ सहज होते हैं। लेकिन सवाल है कि क्या हम खुलेपन के किसी तर्क से औरतों के ख़िलाफ़ माहौल तो नहीं बना रहे हैं, कहीं बड़ी मशक्कत से हासिल उनका स्पेस छीनने का जाना–अनजाना काम तो नहीं कर रहे?

‘बिग बॉस’ के इस साल और इससे पहले के सीज़न में शो के मेज़बान सलमान खान की भूमिका कुछ–कुछ ऐसी ही दिखी। भारतीय टेलीविज़न में सबसे अधिक टीआरपी बटोरने वाले रियलिटी शो में से एक ‘बिग बॉस’ 2007 में शुरू हुआ।

‘बिग बॉस’ दर्शकों को दूसरों की ज़िंदगी में ताक झांक का मौक़ा देता है और इससे ही आती है इसकी टीआरपी। ‘बिग बॉस’ के दर्शक इस शो में शामिल लोगों के बेहद निजी रूटीन देख कर आनंद उठाते हैं। सुबह अलसाई आँखें, स्विमिंग पूल में डांस, उनके रोमांस,उनके झगड़े, पीठ पीछे निंदा- दर्शक इन सबका आनन्द लेता है।

टीआरपी का गणित भी

bigg boss content against women?

इस शो के होस्ट सलमान खान टीआरपी के इस गणित को ख़ूब हवा देते हुए देखे जाते हैं। पिछले 29 नवंबर के एपिसोड में एक महिला प्रतिभागी (सोनाली राउत) के ख़िलाफ़ पुरूष प्रतिभागी (अली कुली मिर्ज़ा) की अश्लील टिप्पणियों के पक्ष में खुलकर आए।

उन्होंने अपने साप्ताहिक शो में पहले तो अली की खूब तारीफ़ की, उसे फिल्म मिलने की बधाई दी और फिर उन्हें दर्शकों की पहली पसंद बताया।

इसके साथ ही उन्होंने अली की टिप्पणी को लड़कों के बीच स्वाभाविक बातचीत का दर्जा दे दिया। उन्होंने सोनाली का मज़ाक बनाते हुए अपनी ओर से भी अश्लील टिप्पणी जड़ दी यह कहते हुए कि कम्बल के नीचे ‘उसने कपड़े नहीं पहने होते तो।

क्या यह मामले स्‍त्री उत्पीड़न के हैं?

bigg boss content against women?

सुप्रीम कोर्ट के वकील अरविंद जैन कहते हैं कि इस मामले में सलमान ख़ुद भी स्त्री उत्पीड़न के समान भागीदार नज़र आते हैं। उस घटना पर सलमान ने बहुत चिर-परिचत दलील दोहराई कि ऐसी अश्लील बातों के सामने आने से बदनामी तो लड़की की हो रही है न। तो ये बात बाहर निकलनी ही नहीं चाहिए थी।

आश्चर्य है कि भारत का एक बड़ा हीरो इस तरह की बातें बिना किसी रोक-टोक के करता है और उस पर किसी भी कोने से विरोध की आवाज़ दर्ज नहीं होती।
टेलीविज़न के मनोरंजन चैनलों पर दिल्ली विश्वविद्यालय में शोध कर रहे विनीत कुमार कहते हैं, "आप यदि बिग बॉस के नियमित दर्शक हैं तो आपने देखा होगा कि होस्ट के रूप में सलमान उसी की ज़्यादा चर्चा करते हैं, जो दर्शकों के बीच अपनी उटपटांग और बदतमीज़ हरकतों के बल पर टीआरपी बटोर रहे होते हैं।"

विनीत के अनुसार बिग बॉस सहित दूसरे अन्य रियलिटी शो ने एक ऐसी भाषा को प्रोत्साहित किया है, जिसमें अश्लीलता के मायने बदल गए हैं।

‘तुम्हारी ले ली’, 'उसकी फट गई' जैसे सलमान के बोलों को अब स्वीकार किया जाता है। टपोरियों की भाषा अब ‘कुलीन’ रूप ले चुकी है, जो हमारी रोज़मर्रा की भाषा से लेकर राजनीति तक की भाषा में शामिल हो रही है।

जेंडर की भूमिका पर भी सवाल

bigg boss content against women?

इस शो में दर्शकों की रुचि तो है ही, पर राय बंटी हुई है। और ये राय साफ़ तौर पर इस मुद्दे पर भी बटी हुई है कि आप जेंडर के विषय पर किस तरफ़ खड़े है।

जेंडर पोज़ीशन के बावजूद बिग बॉस ऐसे कार्यक्रमों में है, जो बंद दरवाज़ों पर बदलाव की थाप भी दे रहे हैं। ‘बिग बॉस’ में साथ-साथ रह रहे भाग लेने वाले महिला और पुरूष, बिना स्त्री–पुरुष के भेद के एक ही कमरे में सार्वजनिक रूप से रहते-खाते, उठते–बैठते, जागते–सोते हैं।

क्या ‘जेंडर समाज’ के दरवाज़े पर ये बदलाव का चोट करते दृश्य नहीं है?

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे Bollywood News, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट हॉलीवुड न्यूज़ और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed