Navratri Special: 'हिम्मत का मतलब निडरता नहीं…’, सोना मोहापात्रा ने बताया क्या होती है असली ताकत
Sona Mohapatra Interview: इस नवरात्रि अमर उजाला आपके लिए नौ दिन, नौ कलाकारों की नौ कहानियां लेकर आ रहा है। हर दिन एक देवी को समर्पित है। आज नवरात्रि का तीसरा दिन माता चंद्रघण्टा का है। जो साहस, बहादुरी और निर्भीकता की प्रतीक मानी जाती हैं। इस अवसर पर पढ़िए सोना मोहापात्रा की कहानी, उन्हीं की जुबानी…
विस्तार
'जब भारत में मी टू आंदोलन शुरू हुआ था तब मैं उन चुनिंदा कलाकारों में थी जिन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में इस मुद्दे पर खुलकर बात की। उस समय मैं एक टीवी शो की जज थी और 18 एपिसोड शूट कर चुकी थी। जैसे ही मैंने आवाज उठाई मुझे बहिष्कृत कर दिया गया। उस शो से मेरी जगह चली गई। मुझे कई साल कोई बड़ा काम नहीं मिला, लेकिन यह सब करना जरूरी था। मेरी आवाज ने उस चर्चा को जन्म दिया, जो लंबे समय से जरूरी थी। इसके बाद महिलाओं के लिए काम करने की जगहें अधिक सुरक्षित और बेहतर बनीं। मेरी मेहनत और संघर्ष का महत्व साफ हो गया।
मेरी आवाज ने बदलाव की शुरुआत की
अपने कॉलेज के दिनों का एक अनुभव साझा करूंगी। मैं एक बस में सफर कर रही थी। उसी बस में एक आदिवासी जोड़ा भी सफर कर रहा था। कंडक्टर ने उन्हें धोखा देकर ज्यादा किराया वसूलने की कोशिश की। मैंने बीच में दखल दिया तो उसने मुझे धमकाया कि बीच हाईवे पर ही उतार देगा। उस समय मैंने हिम्मत जुटाकर उसे बेवकूफ बनाया कि मैं एक पत्रकार हूं और बड़े लोगों से मेरा संपर्क है। आखिरकार मामला सुलझ गया। उस दिन मुझे यह समझ आया कि हिम्मत का मतलब निडर होना नहीं, बल्कि सही समय पर सही बात के लिए खड़ा होना है। खासतौर पर तब, जब किसी और की इज्जत दांव पर लगी हो।
साहस रोजाना की मेहनत में है
साहस का मतलब है हर दिन अपनी सच्चाई के साथ खड़ा रहना, चाहे वह मुश्किल या असुविधाजनक ही क्यों न हो। हर दिन खुद को दिखाना, मेहनत करना और डटे रहना..यही मेरी प्रेरणा है। मुझे खुशी है कि मेरा काम, मेरे कई गाने और प्रदर्शन समाज में विचारों को जागृत करने का जरिया बने। 'मुझे क्या बेचेगा रुपैया' ने महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए सशक्तिकरण का संदेश दिया। 'रंगाबती' ने ओडिशा की लोककला को वैश्विक मंच पर पहुंचाया। 'बेखौफ' ने महिलाओं को अपनी आजादी और जगह फिर से हासिल करने के लिए प्रेरित किया। मेरे लाइव शो ने यह दिखाया कि संगीत, नृत्य और कहानी के माध्यम से समाज में संवाद और बदलाव संभव है। मेरे लिए सच्ची खुशी केवल गायिका बनने में नहीं, बल्कि एक कलाकार बनने में है, जिसकी कला समाज के विचारों को चुनौती देती है और समय की झलक दिखाती है। मैंने तीन ओरिजिनल लाइव फॉर्मैट्स बनाए हैं – लाल परी मस्तानी, TSONAMI और सोना तराशा। मैंने ये तय किया कि बॉलीवुड पर निर्भर न रहकर अपनी अलग इंडिपेंडेंट राह बनाऊं। मैंने देखा है कि संगीत, डांस और कहानी कहने का तरीका सोच बदल सकता है और नए संवाद खोल सकता है। भारत में औरतों को हमेशा सिर्फ खूबसूरत परफॉर्मर के रूप में देखा गया है, कभी प्रोड्यूसर की कुर्सी पर नहीं। मैं अपने इन शोज के जरिए ये कर रही हूं और दूसरों के लिए भी नए मौके बना रही हूं।
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अपनी आवाज पर भरोसा रखें
अंत में महिलाओं को बस यही संदेश देना चाहूंगी कि सही समय का इंतजार मत करें। आपकी आवाज आज भी महत्वपूर्ण है। हां, प्रतिरोध आएगा और हां, आपको कुछ खोना पड़ सकता है, लेकिन चुप रहना लंबे समय में कहीं ज्यादा महंगा है। अपने भीतर की आवाज पर भरोसा रखें और लगातार प्रयास करते रहें। हर बार जब आप खड़े होते हैं, आप दूसरों के लिए रास्ता आसान बनाते हैं। यही असली बदलाव है।'