Navratri Special: ‘शक्ति सिर्फ शरीर से नहीं, छोटे-छोटे फैसलों से भी बनती है’, टिस्का ने साझा किए अपने संघर्ष
Tisca Chopra On Navratri Special: इस नवरात्रि अमर उजाला आपके लिए 9 दिन, 9 अभिनेत्रियों की 9 कहानियां लेकर आएगा। हर दिन एक देवी को समर्पित होगा। आज नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्माचारिणी: अनुशासन और समर्पण का प्रतीक मानी जाती हैं। इस अवसर पर पढ़िए अभिनेत्री टिस्का चोपड़ा की कहानी, उन्हीं की जुबानी…
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'अभिनय जीवन लगातार धैर्य और प्रयास सिखाता है। जब सभी संकेत आपको आश्वस्त नहीं करते, तो खुद पर विश्वास बनाए रखना सीखना पड़ता है। यदि आप अपनी क्षमता पर भरोसा खो देंगे, तो धैर्य और लगातार प्रयास संभव नहीं। मैंने एक सुरक्षित नौकरी छोड़कर अपने अभिनय सपनों का पीछा किया। यह कदम आसान नहीं था। परिवार और समाज के दबाव, अनिश्चित भविष्य और ऐसी कई चीजों ने मुझे डराया। लेकिन मेरा जुनून और आत्मविश्वास मुझे आगे बढ़ाते रहे। धीरे-धीरे मेरे काम को पहचान मिलने लगी। यह अनुभव हर चुनौती में धैर्य और लगातार प्रयास का महत्व सिखाता है।
बस एक आदत पर काबू पाना बड़ा संघर्ष है
मुझे सामान्य तौर पर अनुशासन में कोई समस्या नहीं है, क्योंकि जो काम मैं करती हूं, वो मेरे लिए मजबूरी नहीं, बल्कि मेरा जुनून है। योग, वेट ट्रेनिंग, वॉकिंग, मंत्रों का जाप, पढ़ना-लिखना और अभिनय - ये सभी चीजें मैं पूरे मन से करती हूं। सच कहूं तो कभी-कभी मुझे इन्हें रोकने के लिए अनुशासन की जरूरत पड़ती है। हां, अपनी मिठाई की आदत पर काबू पाना मेरा बड़ा संघर्ष है।
हर काम पूरी निष्ठा से पूरा करती हूं
मैं खुद को सिख और बौद्ध ध्यान का मिश्रण मानती हूं। उदाहरण के तौर पर, शूटिंग के दौरान जब सेट पर हंगामा होता है और चारों तरफ तनाव और परेशानी होती है, तब मैं खुद को शांत रखती हूं और सिर्फ एक शॉट पर पूरा ध्यान देती हूं। उस ध्यान में मैं बाकी सब चीजों को भूल जाती हूं और अपने काम को पूरी निष्ठा और सही तरीके से पूरा करती हूं। यह फोकस और संयम मुझे न सिर्फ शूटिंग में बल्कि जीवन की अन्य चुनौतियों में भी स्थिर और मजबूत बनाए रखता है।
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हर दिन मंत्रों का जाप करती हूं
मैं हर दिन योग और प्राणायाम करती हूं, मंत्रों का जाप करती हूं और नियमित लेखन के जरिए मानसिक शांति पाती हूं। पढ़ाई और आत्मचिंतन से यह समझ आता है कि हम इस ब्रह्मांड में कितने अद्भुत और साथ ही छोटे हैं। यही समझ मुझे जमीन पर बनाए रखती है और हर चुनौती का सामना करने की ताकत देती है।
युवा महिलाओं के लिए संदेश
दुनिया, समाज या खुद से अनुमति का इंतजार मत करें। छोटे कदम से शुरुआत करें, रोजाना एक आदत बनाएं और अपने आप से किया गया एक वादा पूरा करें। शक्ति केवल जिम में नहीं बनती, बल्कि रोजमर्रा के छोटे-छोटे फैसलों में बनती है। जैसे जब आप नहीं कहना चाहते तब 'ना' कहना या जब कोई देख नहीं रहा तब अपने लक्ष्य पर टिके रहना। हम सब प्रगति की प्रक्रिया में हैं - अच्छे और बुरे दिन आते हैं, लेकिन लगातार प्रयास करने वाला हमेशा जीतता है।’