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राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: 36 अवाॅर्ड सत्यजीत रे के नाम, शबाना ने भी बनाया रिकॉर्ड; क्यों शुरू हुआ यह सम्मान?
Tue, 22 Sep 2026 05:35 AM IST
राजश्री वर्मा
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: राजश्री वर्मा
Updated Tue, 22 Sep 2026 05:35 AM IST
सार
National Film Awards History: आज 22 सितंबर को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने वाले हैं, जिसकी घोषणा 18 जुलाई को की गई थी। इसमें बेहतरीन फिल्मों से लेकर एक्टर्स और कई कैटेगरीज में पुरस्कार दिए जाएंगे। ऐसे में आइए इसका इतिहास जानते हैं।
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राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
हर साल जब राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा होती है, तो सिनेमा की दुनिया में एक बार फिर चर्चा शुरू हो जाती है कि किस फिल्म ने बाजी मारी, किस कलाकार को सम्मान मिला और किसके नाम नया रिकॉर्ड जुड़ा। लेकिन जिस पुरस्कार को आज भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में गिना जाता है, उसकी शुरुआत आज से 72 साल पहले एक बिल्कुल अलग रूप में हुई थी।
कहां होगा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार का समारोह?
सबसे पहले आपको बता दें कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 72 साल के इतिहास में पहली बार दिल्ली से बाहर गुजरात के केवड़िया में हो रहे हैं। वहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज 22 सितंबर को पुरस्कार देंगी। केवड़िया का नाम बदलकर एकता नगर कर दिया गया है, जहां दुनिया की सबसे ऊंची सरदार वल्लभभाई पटेल की मूर्ति स्थापित है।
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कहां होगा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार का समारोह?
सबसे पहले आपको बता दें कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 72 साल के इतिहास में पहली बार दिल्ली से बाहर गुजरात के केवड़िया में हो रहे हैं। वहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज 22 सितंबर को पुरस्कार देंगी। केवड़िया का नाम बदलकर एकता नगर कर दिया गया है, जहां दुनिया की सबसे ऊंची सरदार वल्लभभाई पटेल की मूर्ति स्थापित है।
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इस साल इन्हें मिलेगा सम्मान
- फोटो : अमर उजाला
कब शुरू हुए थे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार?
- राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की शुरुआत 1954 में हुई थी।
- साल 1953 में रिलीज हुई कुछ बेहतरीन फिल्मों को चुना गया था।
- उस समय देश के राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे और सूचना प्रसारण मंत्री बीवी केसकर थे।
- शुरुआत में इसका नाम राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार नहीं, बल्कि राज्य पुरस्कार था।
- भारत सरकार ने 1949 में 'फिल्म जांच समिति' बनाई थी।
- समिति ने भारतीय फिल्म उद्योग की स्थिति, गुणवत्ता और सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव का अध्ययन किया।
- इसी समिति ने फिल्मों के लिए सरकारी स्तर पर पुरस्कार शुरू करने की सिफारिश की थी।
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राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
- फोटो : सोशल मीडिया
कैसे हुई राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की शुरुआत?
1949 की 'फिल्म जांच समिति' की सिफारिश के बाद भारत सरकार ने 1954 में 'स्टेट अवॉर्ड फॉर फिल्म' की शुरुआत की। पहले मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों पर फोकस किया जाता था, जिसमें फीचर फिल्म, डॉक्यूमेंट्री और बच्चों की फिल्म शामिल थी। उस दौर में आज की तरह कलाकारों को अलग-अलग सम्मान नहीं दिया जाता था।
ऐसे में सरकार ने शुरुआत में ही तय किया कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सिर्फ हिंदी सिनेमा ही नहीं, बल्कि अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों को भी जगह दी जाएगी। बाद के वर्षों में विभिन्न भाषाओं की बेहतरीन फिल्मों के लिए अलग-अलग क्षेत्रीय पुरस्कार शुरू किए गए। यही बात राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की सबसे बड़ी खासियत बनी। यह किसी एक भाषा या फिल्म इंडस्ट्री का पुरस्कार न रहकर, देशभर की अलग-अलग भाषाओं में बनने वाली फिल्मों को सम्मान देने वाला मंच बन गया।
1949 की 'फिल्म जांच समिति' की सिफारिश के बाद भारत सरकार ने 1954 में 'स्टेट अवॉर्ड फॉर फिल्म' की शुरुआत की। पहले मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों पर फोकस किया जाता था, जिसमें फीचर फिल्म, डॉक्यूमेंट्री और बच्चों की फिल्म शामिल थी। उस दौर में आज की तरह कलाकारों को अलग-अलग सम्मान नहीं दिया जाता था।
ऐसे में सरकार ने शुरुआत में ही तय किया कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सिर्फ हिंदी सिनेमा ही नहीं, बल्कि अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों को भी जगह दी जाएगी। बाद के वर्षों में विभिन्न भाषाओं की बेहतरीन फिल्मों के लिए अलग-अलग क्षेत्रीय पुरस्कार शुरू किए गए। यही बात राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की सबसे बड़ी खासियत बनी। यह किसी एक भाषा या फिल्म इंडस्ट्री का पुरस्कार न रहकर, देशभर की अलग-अलग भाषाओं में बनने वाली फिल्मों को सम्मान देने वाला मंच बन गया।
क्यों शुरू किए गए थे ये पुरस्कार?
शुरुआत में सरकार का मकसद ऐसी फिल्मों को बढ़ावा देना था, जो कहानी, कला और तकनीक के मामले में अच्छी हों और जिनका समाज और संस्कृति से भी जुड़ाव हो। बाद में इस उद्देश्य को और बड़ा किया गया। ऐसी फिल्मों को भी प्रोत्साहित किया जाने लगा, जो देश के अलग-अलग हिस्सों की संस्कृति और जीवन को समझने में मदद करें और लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम करें।
यह पहल इसलिए भी खास थी, क्योंकि भारत में कई अलग-अलग भाषाओं में फिल्में बनती हैं। धीरे-धीरे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में हिंदी के साथ बंगाली, मराठी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, असमिया और दूसरी भाषाओं की फिल्मों को भी जगह मिलने लगी। इस तरह यह पुरस्कार पूरे भारतीय सिनेमा को एक राष्ट्रीय मंच देने वाला सम्मान बन गया।
शुरुआत में सरकार का मकसद ऐसी फिल्मों को बढ़ावा देना था, जो कहानी, कला और तकनीक के मामले में अच्छी हों और जिनका समाज और संस्कृति से भी जुड़ाव हो। बाद में इस उद्देश्य को और बड़ा किया गया। ऐसी फिल्मों को भी प्रोत्साहित किया जाने लगा, जो देश के अलग-अलग हिस्सों की संस्कृति और जीवन को समझने में मदद करें और लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम करें।
यह पहल इसलिए भी खास थी, क्योंकि भारत में कई अलग-अलग भाषाओं में फिल्में बनती हैं। धीरे-धीरे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में हिंदी के साथ बंगाली, मराठी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, असमिया और दूसरी भाषाओं की फिल्मों को भी जगह मिलने लगी। इस तरह यह पुरस्कार पूरे भारतीय सिनेमा को एक राष्ट्रीय मंच देने वाला सम्मान बन गया।
श्यामची आई
- फोटो : सोशल मीडिया
कब और कहां हुआ पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह?
पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 10 अक्टूबर 1954 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित किया गया था।
किस फिल्म ने जीता पहला राष्ट्रीय पुरस्कार?
पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 10 अक्टूबर 1954 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित किया गया था।
किस फिल्म ने जीता पहला राष्ट्रीय पुरस्कार?
- पहले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए मराठी फिल्म 'श्यामची आई' को स्वर्ण पदक मिला।
- सर्वश्रेष्ठ डॉक्युमेंट्री फिल्म के लिए का खिताब 'महाबलीपुरम' को मिला था।
- हिंदी फिल्म 'दो बीघा जमीन' के साथ बांग्ला फीचर फिल्म 'भगवान श्रीकृष्ण चैतन्य' को ऑल इंडिया सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट का पुरस्कार मिला था।
- सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म के लिए अखिल भारतीय योग्यता प्रमाणपत्र बच्चों की फिल्म 'खेला घर' को मिला।
- डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'होली हिमालयाज' और 'ट्री ऑफ वेल्थ' को भी योग्यता प्रमाण पत्र पुरस्कार दिया गया।
उत्तम कुमार
- फोटो : सोशल मीडिया
पहले अभिनेता-अभिनेत्री को नहीं मिलते थे राष्ट्रीय पुरस्कार
आज राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की खबर आते ही सबसे ज्यादा चर्चा बेस्ट एक्टर और बेस्ट एक्ट्रेस की होती है, लेकिन ये श्रेणियां शुरुआत के लगभग डेढ़ दशक बाद आईं। कलाकारों और तकनीशियनों के लिए अलग पुरस्कार 1967 की फिल्मों से शुरू किए गए। इनके विजेताओं को अगले वर्ष यानी 1968 में सम्मानित किया गया।
किसने जीता पहले बेस्ट एक्टर और बेस्ट अभिनेत्री का पुरस्कार?
उत्तम कुमार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने वाले पहले बेस्ट एक्टर बने। उन्हें बंगाली फिल्मों 'एंटोनी फिरंगी' और 'चिड़ियाखाना' में अभिनय के लिए सम्मान मिला।
वहीं नरगिस दत्त पहली बेस्ट एक्ट्रेस बनीं। उन्हें फिल्म 'रात और दिन' के लिए सम्मानित किया गया। खास बात ये है कि उस समय बेस्ट एक्टर के पुरस्कार को 'भारत अवॉर्ड' और और बेस्ट एक्ट्रेस के पुरस्कार को 'उर्वशी अवॉर्ड' कहा जाता था। बाद में इन नामों को बदलकर सीधे बेस्ट एक्टर और बेस्ट एक्ट्रेस कर दिया गया।
आज राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की खबर आते ही सबसे ज्यादा चर्चा बेस्ट एक्टर और बेस्ट एक्ट्रेस की होती है, लेकिन ये श्रेणियां शुरुआत के लगभग डेढ़ दशक बाद आईं। कलाकारों और तकनीशियनों के लिए अलग पुरस्कार 1967 की फिल्मों से शुरू किए गए। इनके विजेताओं को अगले वर्ष यानी 1968 में सम्मानित किया गया।
किसने जीता पहले बेस्ट एक्टर और बेस्ट अभिनेत्री का पुरस्कार?
उत्तम कुमार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने वाले पहले बेस्ट एक्टर बने। उन्हें बंगाली फिल्मों 'एंटोनी फिरंगी' और 'चिड़ियाखाना' में अभिनय के लिए सम्मान मिला।
वहीं नरगिस दत्त पहली बेस्ट एक्ट्रेस बनीं। उन्हें फिल्म 'रात और दिन' के लिए सम्मानित किया गया। खास बात ये है कि उस समय बेस्ट एक्टर के पुरस्कार को 'भारत अवॉर्ड' और और बेस्ट एक्ट्रेस के पुरस्कार को 'उर्वशी अवॉर्ड' कहा जाता था। बाद में इन नामों को बदलकर सीधे बेस्ट एक्टर और बेस्ट एक्ट्रेस कर दिया गया।
कब-कब आया बड़ा बदलाव?
- 1954 में 'स्टेट अवॉर्ड फॉर फिल्म' के रूप में शुरुआत हुई।
- 1967-68 में पहली बार कलाकारों और तकनीशियनों के लिए अलग-अलग पुरस्कार शुरू हुए। इसी दौर में उत्तम कुमार और नरगिस पहले अभिनय विजेता बने।
- 1969 में भारतीय सिनेमा में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार की शुरुआत हुई।
- इस पुरस्कार की पहली विजेता अभिनेत्री देविका रानी थीं।
- 1973 से डायरेक्ट्रेट ऑफ फिल्म फेस्टिवल ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का प्रशासन संभाला। दशकों तक डीएफएफ ही इसकी प्रमुख आयोजन संस्था रही।
- 2022 में सरकार के पुनर्गठन के तहत डायरेक्ट्रेट ऑफ फिल्म फेस्टिवल का राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम में विलय कर दिया गया।
- समय के साथ सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग, संगीत, प्लेबैक सिंगिंग, स्क्रीनप्ले, कॉस्ट्यूम, मेकअप, साउंड, कोरियोग्राफी, स्टंट और VFX जैसी तकनीकी को भी शामिल किया गया।
कब और कहां होंगा 72वें वे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह
- फोटो : सोशल मीडिया
70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से हुआ एक और बड़ा बदलाव
70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में कई पुरस्कार श्रेणियों को पुनर्गठित किया गया और पुरस्कार राशि में भी बढ़ोतरी की गई। उदाहरण के लिए, पहले 'इंदिरा गांधी अवॉर्ड फॉर बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर' के नाम से दिया जाने वाला पुरस्कार अब 'बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर' कहलाता है।
इसी तरह राष्ट्रीय एकता, सामाजिक मुद्दों और पर्यावरण से जुड़ी अलग-अलग श्रेणियों को मिलाकर 'बेस्ट फीचर फिल्म प्रमोटिंग नेशनल, सोशल एंड एनवायरनमेंटल वैल्यूज' नाम की एक श्रेणी बनाई गई है। इसके अलावा एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक जैसे क्षेत्रों को भी पुरस्कारों के नए ढांचे में जगह दी गई है।
70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में कई पुरस्कार श्रेणियों को पुनर्गठित किया गया और पुरस्कार राशि में भी बढ़ोतरी की गई। उदाहरण के लिए, पहले 'इंदिरा गांधी अवॉर्ड फॉर बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर' के नाम से दिया जाने वाला पुरस्कार अब 'बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर' कहलाता है।
इसी तरह राष्ट्रीय एकता, सामाजिक मुद्दों और पर्यावरण से जुड़ी अलग-अलग श्रेणियों को मिलाकर 'बेस्ट फीचर फिल्म प्रमोटिंग नेशनल, सोशल एंड एनवायरनमेंटल वैल्यूज' नाम की एक श्रेणी बनाई गई है। इसके अलावा एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक जैसे क्षेत्रों को भी पुरस्कारों के नए ढांचे में जगह दी गई है।
कौन तय करता है किसे मिलेगा राष्ट्रीय पुरस्कार?
- हर साल फिल्मों से प्रविष्टियां मांगी जाती हैं। इसके बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय अलग-अलग श्रेणियों के लिए जूरी बनाता है।
- मुख्य तौर पर फीचर फिल्म, नॉन-फीचर फिल्म और सिनेमा पर लेखन के लिए अलग-अलग जूरी होती हैं।
- इन जूरी में सिनेमा, कला और मानविकी के क्षेत्र से जुड़े अनुभवी और प्रतिष्ठित लोग शामिल होते हैं।
- फीचर फिल्मों के लिए चयन की प्रक्रिया आमतौर पर दो स्तरों में होती है।
- पहले क्षेत्रीय जूरी फिल्मों की स्क्रीनिंग करके उन्हें शॉर्टलिस्ट करती है। इसके बाद राष्ट्रीय जूरी इन फिल्मों में से पुरस्कार विजेताओं का चयन करती है।
राष्ट्रीय पुरस्कार की खास बातें
- तकनीकी रूप से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा प्रदान किए जाते हैं।
- परंपरागत रूप से पुरस्कार वितरण समारोह में विजेताओं को सम्मान भारत के राष्ट्रपति प्रदान करते हैं।
- राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में हर कैटेगरी के आधार पर अलग अवॉर्ड दिया जाता है, जिन्हें स्वर्ण कमल, रजत कमल नाम से जाना जाता है।
- कुछ अवॉर्ड में नकद पुरस्कार भी दिया जाता है, जबकि कुछ कैटेगरी में सिर्फ मेडल ही दिया जाता है।
किसके नाम है सबसे ज्यादा अवॉर्ड जीतने का रिकॉर्ड?
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में बेस्ट एक्ट्रेस का सबसे ज्यादा पुरस्कार जीतने का रिकॉर्ड शबाना आजमी के नाम है। उन्होंने अब तक पांच बार यह पुरस्कार जीता है। अभिनेत्री ने 'अंकुर', 'अर्थ', 'खंडहर', 'पार' और 'गॉडमदर' के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
वहीं, कई साल तक बेस्ट एक्टर में अमिताभ बच्चन चार राष्ट्रीय पुरस्कारों के साथ सबसे आगे थे। उन्हें 'अग्निपथ', 'ब्लैक', 'पा' और 'पीकू' के लिए यह सम्मान मिला, लेकिन 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ममूटी ने ‘ब्रमायुगम’ के लिए बेस्ट एक्टर का पुरस्कार जीता। यह उनका चौथा राष्ट्रीय पुरस्कार था।
बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर की श्रेणी में के. जे. येसुदास के नाम सबसे ज्यादा आठ राष्ट्रीय पुरस्कार हैं। उन्होंने अलग-अलग भारतीय भाषाओं में गाने के लिए यह उपलब्धि हासिल की है। संगीतकार ए. आर. रहमान के नाम कुल सात राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हैं। वहीं, महान फिल्मकार सत्यजीत रे को उनके करियर में 36 अवॉर्ड्स मिले।
ये पुरस्कार सत्यजीत रे को 'पाथेर पांचाली', 'उतरन', 'आगंतुक', 'गणशत्रु', 'घरे बायरे', 'शतरंज के खिलाड़ी', 'हीरक राजर देशे', 'सदगति', 'जय बाबा फेलूनाथ', 'रबींद्रनाथ टैगोर', 'तीन कन्या', 'देवी', 'जलसागर' जैसी फिल्मों के लिए दिए गए थे। इनमें से 6 बेस्ट डायरेक्टर के अवॉर्ड्स थे तो 30 नेशनल अवॉर्ड्स बेस्ट फीचर फिल्म के लिए मिले।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में बेस्ट एक्ट्रेस का सबसे ज्यादा पुरस्कार जीतने का रिकॉर्ड शबाना आजमी के नाम है। उन्होंने अब तक पांच बार यह पुरस्कार जीता है। अभिनेत्री ने 'अंकुर', 'अर्थ', 'खंडहर', 'पार' और 'गॉडमदर' के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
वहीं, कई साल तक बेस्ट एक्टर में अमिताभ बच्चन चार राष्ट्रीय पुरस्कारों के साथ सबसे आगे थे। उन्हें 'अग्निपथ', 'ब्लैक', 'पा' और 'पीकू' के लिए यह सम्मान मिला, लेकिन 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ममूटी ने ‘ब्रमायुगम’ के लिए बेस्ट एक्टर का पुरस्कार जीता। यह उनका चौथा राष्ट्रीय पुरस्कार था।
बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर की श्रेणी में के. जे. येसुदास के नाम सबसे ज्यादा आठ राष्ट्रीय पुरस्कार हैं। उन्होंने अलग-अलग भारतीय भाषाओं में गाने के लिए यह उपलब्धि हासिल की है। संगीतकार ए. आर. रहमान के नाम कुल सात राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हैं। वहीं, महान फिल्मकार सत्यजीत रे को उनके करियर में 36 अवॉर्ड्स मिले।
ये पुरस्कार सत्यजीत रे को 'पाथेर पांचाली', 'उतरन', 'आगंतुक', 'गणशत्रु', 'घरे बायरे', 'शतरंज के खिलाड़ी', 'हीरक राजर देशे', 'सदगति', 'जय बाबा फेलूनाथ', 'रबींद्रनाथ टैगोर', 'तीन कन्या', 'देवी', 'जलसागर' जैसी फिल्मों के लिए दिए गए थे। इनमें से 6 बेस्ट डायरेक्टर के अवॉर्ड्स थे तो 30 नेशनल अवॉर्ड्स बेस्ट फीचर फिल्म के लिए मिले।