Wild Wild Punjab Review: लव रंजन की कॉमेडी फैक्ट्री से निकला सस्ता ओटीटी प्रोडक्ट, फिर वही कहानी, फिर वही माल
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बहुत हिम्मत और समय चाहिए, इन दिनों ओटीटी पर रिलीज हो रही फिल्मों और वेब सीरीज को देखने के लिए। इतना कुछ तो हर हफ्ते आ जा रहा है इन ओटीटी पर कि अगर आप ठीक से याद करना चाहो तो इस साल के शुरू में रिलीज हुई फिल्में और सीरीज भी शायद ही याद आ सकें। ओटीटी की बस यही सबसे बड़ी बीमारी है। इस माध्यम पर रिलीज होने वाली फिल्मों की उम्र बस हफ्ते भर ही होती है। बहुत हुआ तो 22-23 देशों में नंबर वन पर ट्रेंड होने के बाद तीन चार हफ्ते गाड़ी और खिंच जाती है, बस। लेकिन, ‘वाइल्ड वाइल्ड पंजाब’ जैसी फिल्में शायद लोग हफ्ता भर भी न खींच पाएं। ‘तू झूठी मैं मक्कार’ में बाल बाल बचे निर्देशक लव रंजन फिर से निर्माता वाले रोल में हैं। कहानी भी उन्हीं की है और सेटअप पूरा ‘प्यार का पंचनामा’ और ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ वाला है, बस कार्तिक आर्यन यहां इस बार भी नहीं हैं।
कार्तिक आर्यन और लव रंजन की जोड़ी जब तक जमी, खूब जमी। दोनों ने मिलकर सामाजिक दस्तूरों के हिसाब से फालतू टाइप के युवाओं की दोस्ती का डीएनए आज की तेज रफ्तार जिंदगी में बोया। शराब से इसकी सिंचाई की। नशा, धुआं से इसकी परवरिश की और पेड़ तैयार हुआ कुछ ऐसी फिल्मों का जिनके फलों से दोनों ने खूब नाम, दाम और पैगाम कमाया। पैगाम यही कि लोगों के पास खूब फालतू टाइम है और खूब फालतू पैसा भी कि वह फालतू की कहानियों पर बनी फालतू टाइप की फिल्मों पर भी खूब फालतू वक्त जाया करने को तैयार हैं। तुक्का तीर बना, भाई वीर बना और दो-तीन फिल्में हिट भी हुईं लव रंजन के निर्देशन में। अब लव रंजन इस फॉर्मूला फोर्टी फोर के कॉपीराइट मालिक हैं और इसके उत्पादों पर अलग अलग लेबल चस्पा कर बाजार में उतार रहे हैं।
लव रंजन और अंकुर गर्ग की ताजा कोशिश है, ‘वाइल्ड वाइल्ड पंजाब’। ओशो की भक्त रहीं मां आनंद शीला पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘वाइल्ड वाइल्ड कंट्री’ की बार बार याद दिलाती इस फिल्म की कहानी का हालांकि रजनीश या आनंद शीला से कोई लेना देना तो नहीं है, लेकिन शराब, नशा और बाकी सब कुछ भी यहां भरपूर है। एक दिल टूटा आशिक है। दूसरा दिलफेंक आशिक है। तीसरा भीगी बिल्ली है तो चौथा अपने फादर साब का लाडला और पारो का पुजारी है। इन चार दोस्तों को लोग फालतू न समझें तो इनके कुछ कुछ काम भी बताए गए हैं इनके। लेकिन, फिलहाल ये सब जा रहे हैं एक शादी में जहां जाकर दिल टूटे आशिक यानी खन्ना को अपनी पूर्व प्रेमिका की बेइज्जती करनी है। कहानी पंजाब से होकर गुजर रही है तो इसमें ड्रग्स की तस्करी भी है। धुआं उड़ाती पब्लिक (और एक लड़की भी) है और कार्टून जैसे दिखने वाले पुलिस वाले भी।
निर्माता लव रंजन ने एक कहानी लिखी है जिस पर हरमन वडाला और संदीप जैन ने उनकी फिल्मों की शाखाओं से गिरे फल, फूल बटोरकर ये फिल्म लिख डाली है, ‘वाइल्ड वाइल्ड पंजाब’। सनी सिंह को पिछली बार लोगों ने फिल्म ‘आदिपुरुष’ में लक्ष्मण के रोल में देखा था। अपनी पत्नी उर्मिला को अयोध्या में छोड़ बड़े भाई राम के साथ वनवास पर निकल आए भाई के किरदार में। इस बार वह इसके ठीक उलट किरदार में हैं। बॉडी शॉडी मजबूत है। कच्छा कमजोर है। और, दोस्ती के नाम पर उसके पास अपने पिता से बेहद डरने वाला जैन है। दोनों मिलकर खन्ना को आत्महत्या करने से बचाते हैं और अपनी गाड़ी का नाम पारो रखने वाले दोस्त को लेकर रोड ट्रिप पर निकल जाते हैं। सिमरप्रीत के पास बतौर निर्देशक फिल्म में कुछ कर दिखाने जैसा है नहीं और वह बस पूरी फिल्म में यही भ्रम बनाए रखने की कोशिश में लगे रहते हैं कि ये एक कॉमेडी फिल्म है हालांकि फिल्म बीच बीच में इतना ज्यादा बोरिंग है कि इसे फास्ट फारवर्ड में देखने का मन करने लगता है।
कलाकारों में सब के सब वाइल्ड वाइल्ड से आगे के वाइल्ड दिखते हैं। वरुण शर्मा को ये फिल्म लीड रोल में पेश करने का बहाना करती दिखती है। कॉमेडी में वरुण ने नाम भी इधर काफी कमा लिया है, लेकिन उसे खर्च करने के लिए अगर वह ऐसी दोयम दर्जे की फिल्मों से बचे रहे तो ही लंबा चल सकते हैं। सनी सिंह की मजबूरी है कि वह ऐसी फिल्मों का सपोर्ट सिस्टम बनकर ही अपनी गाड़ी आगे ले जा सकते हैं। मनजोत का किरदार ही इन चारों में थोड़ा सेंसिबल लगता है लेकिन पुलिस हवालात में पिटाई दिखाकर इस किरदार का आभामंडल भी फिल्म बनाने वालों ने लूट लिया है। अपने पिता से गालियां खाते जैन के किरदार में जस्सी गिल हैं। पत्रलेखा भी हैं और पत्रलेखा हैं तो राजकुमार राव की आवाज भी लव रंजन को मिल गई है। फिल्म चूं चूं का मुरब्बा से थोड़ा आगे की चीज है, नाम याद है न आपको? ‘वाइल्ड वाइल्ड पंजाब’। अगर आपको बेसिरपैर की कहानियां फास्ट फारवर्ड मोड में देखने की आदत है तो देख लीजिए क्योंकि स्टंप से काफी वाइड जाती इस फिल्म में पंजाबियत के नाम पर कुछ भी नहीं है, न दिलवाली बात, न दोस्ती वाला दम और न ही सूबे वाला संगीत। बाकी नेटफ्लिक्स मेहरबान तो..!
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