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Vanvaas Movie Review: ‘बदतमीज’ बेटों और बहुओं से दुखी पिता का नया ‘अवतार’, अनिल शर्मा के सिनेमा का नया उत्कर्ष

Fri, 20 Dec 2024 04:48 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 20 Dec 2024 04:48 PM IST
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Vanvaas Movie Review by Pankaj Shukla Anil Sharma Nana Patekar Khushbu Raरpal Utkarsh Simratt Paritosh Ashwini
वनवास मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
Vanvaas
कलाकार
नाना पाटेकर , खुशबू सुंदर , उत्कर्ष शर्मा , सिमरत कौर , राजपाल यादव , अश्विनी कलसेकर , परितोष त्रिपाठी , मनीष वाधवा और राजेश शर्मा
लेखक
अनिल शर्मा , सुनील सिरवैया और अमजद अली
निर्देशक
अनिल शर्मा
निर्माता
सुमन शर्मा
रिलीज
20 दिसंबर 2024
रेटिंग
3/5

बहुत जतन से मां-बाप अपने बेटों का ब्याह करते हैं। पिता खोजते रहते हैं ऐसी कन्याएं जिनके पिता समधी बन पाने लायक हों। धी यानी मेधा, धर्म के 10 लक्षणों में से एक। समधी यहीं से बनता है। शादी के मंडप तक न जाने के सौ बहाने करने वाले बेटों को मांएं कभी अपने हाई ब्लड प्रेशर का तो कभी ढलती उम्र का वास्ता देकर उन्हें दूल्हा बनाती हैं। बेटे भी माता-पिता की खुशी के लिए इन रिश्तों के लिए न सिर्फ हां कर देते हैं, बल्कि परंपराओं का सम्मान करते हुए इन रिश्तों को निभाने में अपना जीवन होम कर देते हैं। लेकिन, सब बेटे और सारी बहुएं ‘आदर्श’ नहीं होते। कभी बेटे लालची निकलते हैं, तो कभी बहुएं प्रपंची। और, इन्हीं बेटे-बहुओं की कहानी हिंदी सिनेमा में अलग अलग दौर में अलग-अलग सितारों के साथ बड़े परदे पर पहुंचती रही हैं। राजेश खन्ना फिल्म ‘अवतार’ में जो संदेश देते दिखते हैं, वहीं अमिताभ बच्चन बाद में ‘बागबान’ में दोहराते नजर आते हैं। ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ की बात करने वाली इन फिल्मों के साथ संयोग एक सा ये जुड़ा है कि आम जनता को ये फिल्में खूब पसंद करती है। 

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Vanvaas Movie Review by Pankaj Shukla Anil Sharma Nana Patekar Khushbu Raरpal Utkarsh Simratt Paritosh Ashwini
वनवास मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अनिल शर्मा का इमोशनल सिनेमा

फिल्म ‘गदर 2’ से पांच सौ करोड़ी निर्देशक बन चुके अनिल शर्मा का सिनेमा शुरू ही राखी और सुरेश ओबेरॉय की एक बेहद भावुक फिल्म ‘श्रद्धांजलि’ से हुआ। फिर वो ‘हुकूमत’, ‘एलान ए जंग’ और ‘तहलका’ होते हुए ‘गदर’ तक आए। इसके बाद ‘गदर 2’ तक आते आते उन्होंने सिनेमा के खूब रंग अपने प्रशंसकों को दिखाए। इस बीच एक फिल्म उनकी ‘अपने’ भी लोगों ने याद रखी और अब ‘वनवास’ की टैगलाइन ही उन्होंने रखी है, ‘अपने ही देते हैं अपनों को वनवास’। कहानी नई नहीं है। पटकथा भी बहुत शानदार नहीं है। लेकिन, फिल्म नाना पाटेकर की वजह से दर्शनीय बन गई है। उत्कर्ष शर्मा बतौर अभिनेता तरक्की कर रहे हैं। एक अनाथ पिता को गोद लेने वाले दृश्य में उनका अभिनय आंसू लाता है। और, मौसी से अपनी ‘बसंती’ का हाथ मांगने वाले दृश्य में युवा धर्मेंद्र की याद दिलाता है। नाम भी उनके किरदार का फिल्म में वीरू ही है।
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वनवास मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

कहानी एक चिड़चिड़े रिटायर्ड रईस की

अपनी पत्नी के निधन के बाद धीरे धीरे याददाश्त खोते जा रहे और बात बात पर चिड़चिड़ाने वाले शिमला के एक रईस पिता को उसके तीन बेटे और तीन बहुएं काशी छोड़ आते हैं। ऐसा करते समय बैग से उनके परिचय पत्र, आधार कार्ड वगैरह भी निकाल लेते हैं। बाप बच्चों को उनके बचपन में भी काशी ला चुका है। उसे लगता है कि वह नहीं खोया, उसके बच्चे खो गए हैं। वह बच्चों को तलाश रहा है। और, घाट पर उचक्कई करने वाले वीरू को मिलता है। वीरू उसका पहले बैग खाली करता है और फिर जीवन। लेकिन, ये सब करते करते उसे अपनी गलती का एहसास होता है और प्रायश्चित करने के लिए वह चल देता है अपने इस ‘बाबा’ को उनके बेटों से मिलाने। बेटे निरे अहमक हैं। बीवियों के गुलाम हैं। हालांकि, एक बेटा जो मंदबुद्धि का है, वही बस दिल का मजबूत नजर आता है।

 

 

 

 

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वनवास मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

लीक छांडि तीनहिं चलैं, सायर सिंह सपूत

फिल्म ‘गदर 2’ की धमाकेदार कामयाबी के बाद अनिल शर्मा ने बिल्कुल 180 अंश पर मुड़कर ये फिल्म ‘वनवास’ बनाई है। इसी एक बात के लिए उनको तालियां मिलनी चाहिए। नहीं तो एक लीक पर सफलता मिलने के बाद हिंदी सिनेमा के निर्देशक (अतीत में खुद अनिल शर्मा भी) उसी लीक को पीटते नजर आते हैं। अनिल शर्मा ने नाना पाटेकर के साथ फिल्म बनाने का जोखिम लिया। अपने बेटे को फिल्म का दूसरा हीरो बनाया। फिल्म ‘गदर 2’ की हीरोइन सिमरत कौर को रिपीट किया और साथ लिया खुशबू सुंदर, राजपाल यादव, अश्विनी कलसेकर, राजेश शर्मा, मुश्ताक खान और वीरेंद्र सक्सेना जैसे हुनरमंद कलाकारों को। उत्कर्ष को उन्होंने फ्रेम में सोलो कम ही छोड़ा है, हालांकि अब उन्हें देखकर ये लगने लगा है कि अगर कोई स्वतंत्र निर्देशक उन्हें लेकर एक दम देसी रोल वाली फिल्म बनाए तो वह कमाल कर सकते हैं। 

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वनवास मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

रुलाने में कामयाब रहे अनिल शर्मा

फिल्म ‘वनवास’ को अगर इन दिनों के सिनेमा में दिखने वाले थ्री एक्ट वाले खांचों को देखें तो फिल्म का पहला हिस्सा काफी कमजोर है। लेकिन, दूसरे हिस्से में फिल्म दर्शको की नब्ज टटोलना शुरू करती है और तीसरे हिस्से में आकर पूरी तरह उसे अपनी पकड़ में ले लेती है। क्लाइमेक्स तक आते आते तो फिल्म कई बार रुलाती है। परितोष त्रिपाठी जैसे सहयोगी कलाकार को भी अनिल शर्मा ने अपनी अभिनय क्षमता दिखाने का मौका दिया है और ऐसे तमाम दृश्य उन्होंने राजेश शर्मा, अश्वनी कलसेकर, खुशबू सुंदर, मुश्ताक खान, राजपाल और वीरेंद्र सक्सेना के लिए गढ़े हैं। सहयोगी कलाकारों के ये रंग फिल्म का इंद्रधनुष सजाने के काम आते हैं और इस इंद्रधनुष की असल बारिश हैं नाना पाटेकर। नाना पाटेकर के साथ काम करना आसान कभी नहीं रहा, लेकिन उनको जिस अंदाज में अनिल ने इस फिल्म में पेश किया है, उसके चर्चे बरसों बरस होते रहेंगे।

 

 

 

 

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वनवास मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

संपूर्ण मनोरंजक पारिवारिक चित्र

मतिभ्रम का शिकार एक सेवानिवृत अधिकारी अपनी पत्नी की यादों में खोया है। पोस्ट मास्टर का बेटा हेड मास्टर की बेटी से प्यार करता था। दोनों की प्रेम कहानी का प्रसंग फिल्म को बीच बीच में रूमानी करता जाता है, लेकिन फिल्म की असल अंतर्धारा उस पितृ ऋण की गंगा है जिसमें डुबकी लगाने का वादा फिल्म का हीरो इसके क्लामेक्स में फिल्म के सीक्वल के इशारे के साथ करता है। फिल्म तकनीकी तौर पर कहीं कही काफी कमजोर है। कबीर लाल जैसा सिनेमैटोग्राफर बनारस के रंग को परदे पर नहीं उभार पाया है, देखकर अचरज होता है। फिल्म का संपादन भी कहीं कहीं गड़बड़ है। ‘गदर 2’ में उत्तम सिंह का संगीत फिर से सजाने वाले संगीतकार मिथुन भी अपनी ओरिजिनल गानों की अग्नि परीक्षा में बस फेल होते होते ही बचे हैं। फिल्म इसके बावजूद नाना पाटेकर और उत्कर्ष के अभिनय व अनिल शर्मा के निर्देशन के लिए पूरे परिवार के साथ देखी जा सकती है।
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