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Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Sita Ramam Movie Review in Hindi By Pankaj Shukla Dulquer Salmaan Mrunal Thakur Hanu Raghavapudi Pen Marudhar

Sita Ramam Movie Review: मणिरत्नम की ‘रोजा’ सी महकती प्रेम कहानी, दुलकर सलमान और मृणाल ठाकुर का बेमिसाल अभिनय

Fri, 02 Sep 2022 11:38 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 02 Sep 2022 11:38 PM IST
सार

 ‘सीता रामम’ तेलुगू में बनी एक फिल्म है जिसे हिंदी में अब रिलीज किया गया है। फिल्म अगर हिंदी में ही बनी होती तो अब तक जमकर ट्रोल हो रही होती। फिल्म का हीरो दुलकर सलमान है। किरदार वह राम का कर रहा है। फिल्म की हीरोइन मृणाल ठाकुर है और जो किरदार वह फिल्म में कर रही है, वह पारंपरिक हीरोइन का नहीं है।

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Sita Ramam Movie Review in Hindi By Pankaj Shukla Dulquer Salmaan Mrunal Thakur Hanu Raghavapudi Pen Marudhar
सीता रामम - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
सीता रामम (हिंदी)
कलाकार
दुलकर सलमान , मृणाल ठाकुर , रश्मिका मंदाना , तरुण भास्कर , सुमंत यालगर्डा , गौतम मेनन , भूमिका चावला , प्रकाश राज और टीनू आनंद आदि।
लेखक
हनु राघवपुडी , रुथम समर और राज कुमार कदमुडी
निर्देशक
हनु राघवपुडी
निर्माता
सी अश्विनी दत्त
रिलीज
2 सितंबर 2022
रेटिंग
3.5/5

विस्तार

मलयालम सिनेमा के सुपरस्टार ममूटी के बेटे दुलकर सलमान के किरदार का नाम अगर किसी मूल हिंदी फिल्म में राम होता तो सोचिए ट्रोल ब्रिगेड उनका क्या हाल करती? और, ये भी एक मुस्लिम किरदार को अगर मंदिर में पुजारी को प्रणाम करते और उसके माथे पर रोली लगाते दिखाया गया होता तो क्या होता? शिक्षा पाना और उस पर अमल करना, यही उत्तर और दक्षिण का फर्क है। जहां शिक्षितों का प्रतिशत ज्यादा है वहां के लोग न सिर्फ प्रगतिशील हैं बल्कि सिनेमा और असल जिंदगी का फर्क भी समझते हैं। फिल्म ‘सीता रामम’ (Sita Ramam Hindi) सीता और राम की आदर्श महागाथा के तार नए सिरे से छेड़ती है। ‘सीता रामम’ तेलुगू में बनी एक फिल्म है जिसे हिंदी में अब रिलीज किया गया है। भारत और पाकिस्तान के बीच पनपती नफरत के दौर में फिल्म ‘सीता रामम’ एक ऐसी प्रेम कहानी है, जिसे कहा जाना बहुत जरूरी है। तारीफ की जानी चाहिए इस फिल्म की पूरी टीम की और खासतौर से इसके निर्देशक हनु राघवपुडी की कि उन्होंने ऐसी कहानी पर एक बेहतर फिल्म बनाने में कामयाब पाई।

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Sita Ramam Movie Review in Hindi By Pankaj Shukla Dulquer Salmaan Mrunal Thakur Hanu Raghavapudi Pen Marudhar
सीता रामम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सन 64 में शुरू हुई प्रेम कहानी
भारत पाकिस्तान के बीच 1971 में हुए युद्ध के सात साल पहले से फिल्म ‘सीता रामम’ (Sita Ramam Hindi) की कहानी शुरू होती है। फिल्म उस सूत्र को तलाशने की कोशिश करती है जिसके चलते कश्मीरियों ने भारतीय सेना को अपना दुश्मन मान लिया। कारगिल में ठंड से ठिठुरते फौजियों के लिए रसद लेकर आते स्थानीय भी तब आतंकवादी से दिखते हैं। नजरिये का सवाल जो है। नजरिया ही फिल्म ‘सीता रामम’ का असल डीएनए है। धर्म की कट्टरता के बीच लिखी गई एक प्रेम कहानी में धर्म का असली मर्म है, ‘परहित सरिस धरम नहिं भाई’। अपने सपनों की दुनिया बसाने को इकट्ठा की गई अपनी सारी बचत एक फौजी जब वेश्यालय में मिली अपनी मुंहबोली बहन और उसकी सभी संगिनियों को आजाद कराने में खर्च कर देता है तो समझ आता है कि धर्म का असली मतलब क्या है!

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Sita Ramam Movie Review in Hindi By Pankaj Shukla Dulquer Salmaan Mrunal Thakur Hanu Raghavapudi Pen Marudhar
सीता रामम - फोटो : insta

सीतालक्ष्मी और उसकी लक्ष्मण रेखा
फिल्म ‘सीता रामम’ (Sita Ramam Hindi) दो कालखंडों में एक साथ चलती है। 1964 में शुरु हुई कहानी एक प्रेम कहानी है जिसमें रेडियो पर एक एकाकी लेफ्टिनेंट राम की वीरता की कहानी सुनकर देश भर के लोग उसे चिट्ठियां लिखने लगते हैं। इसी में एक चिट्ठी सीतालक्ष्मी की आती है जो राम को अपना पति मानती है। बातें भी सारी वह ऐसी ही लिखती है। राम अपनी सीता को खोजने निकलता है। एक और कहानी जो 1984 में शुरू होती है लंदन से। अपने बाबा की विरासत हासिल करने से पहले लंदन में पढ़ी पाकिस्तानी युवती उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने भारत आती है। उसके पास एक चिट्ठी है जो उसे सीतालक्ष्मी को देनी है। लेकिन, सीतालक्ष्मी की असल पहचान क्या है? इसका खुलासा होने के साथ ही फिल्म का पूरा ग्राफ बदल जाता है। कहानी समाज, दस्तूरों और परिवार की तंग गलियों से होकर गुजरती है। हर नुक्कड़ पर एक नया मोड़ है। एक नया किरदार है। एक नया एहसास है और है एक नया सिनेमा।

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Sita Ramam Movie Review in Hindi By Pankaj Shukla Dulquer Salmaan Mrunal Thakur Hanu Raghavapudi Pen Marudhar
सीता रामम - फोटो : insta

हनु राघवपुडी का लाजवाब निर्देशन
निर्देशक हनु राघवपुडी ने फिल्म को वैसे ही कैनवस पर बनाया है जैसे कभी मणिरत्नम ने  ‘रोजा’ रची थी। हैदराबाद से लेकर कश्मीर तक का विस्तार पाने वाली फिल्म ‘सीता रामम’ (Sita Ramam Hindi) की अंतर्कथा आंखें खोल देने वाली है। हो सकता है उत्तर भारत के दर्शकों मे हाल के दिनों में फैली सोच से ये फिल्म मेल न खाए, लेकिन ऐसी फिल्में खुद भी देखना जरूरी है और नई पीढ़ी को दिखाना भी। इंसानियत को हर धर्म से आगे रखने की बात कदम कदम पर करती फिल्म ‘सीता रामम’ में हनु राघवपुडी ने कुनैन की गोली रसगुल्ले में छिपाकर खिलाई है। खाने वाला भले उसे गुठली समझकर थूक दे लेकिन सामाजिक सौहार्द्र की असल दवाई यही है। तुर्की टोपी वाले लोगों के बीच से निकलकर राम तक पहुंचने वाली इस प्रेम गाथा का हर फ्रेम मोहित करने वाला है। पी एस विनोद और श्रेयस की सिनेमैटोग्राफी देखने वाले को हौले हौले सहलाती चलती है। सिनेमा के कैनवस पर खूबसूरती की एक नई परिभाषा गढ़ती चलती है।

Sita Ramam Movie Review in Hindi By Pankaj Shukla Dulquer Salmaan Mrunal Thakur Hanu Raghavapudi Pen Marudhar
मृणाल ठाकुर, सलमान दलकीर, फिल्म सीता रामम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

दुलकर और मृणाल अव्वल नंबर
फिल्म ‘सीता रामम’ (Sita Ramam Hindi) में मलयालम सिनेमा के नामचीन अभिनेता दुलकर सलमान हैं। यह उनकी दूसरी तेलुगू फिल्म है। मराठी और हिंदी सिनेमा की काबिल  अभिनेत्री मृणाल ठाकुर ने इस फिल्म से तेलुगू सिनेमा में डेब्यू किया। दोनों को देखकर लगता है कि राम और सीता की इससे बेहतर अदाकारी भला और कौन कर सकता है? एक युवा फौजी की दृढ़ता, एक मासूम प्रेमी की निश्छलता और एक अनाथ की परिवार पाने की उत्कंठा, सबको दुलकर ने इस फिल्म में जिया है। और, मृणाल ठाकुर! इतनी खूबसूरत तो कोई अप्सरा ही दिख सकती है। पूरी फिल्म में वह भारतीय परिधानों में ही अधिकतर दिखती हैं। साड़ियों में कमाल की खूबसूरत दिखीं मृणाल ने अभिनय भी बेहतरीन किया है। अच्छा हुआ कि ये फिल्म हिंदी में डब होकर रिलीज हो गई। नहीं तो दुलकर और मृणाल की एक बढ़िया फिल्म देखने से हिंदी सिनेमा के दर्शक जरूर चूक जाते।

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सीता रामम - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

देखें कि न देखें
हनु राघवपुडी और अश्विनी दत्त ने फिल्म ‘सीता रामम’ (Sita Ramam Hindi) की कल्पना एक अखिल भारतीय फिल्म के रूप में ही की है। इसमें दक्षिण से लेकर मुंबई और कोलकाता तक के कलाकारों को चुन चुनकर लिया गया है। टीनू आनंद, सचिन खेडेकर और जीशु सेनगुप्ता के साथ साथ भूमिका चावला, प्रकाश राज सब छोटे छोटे लेकिन ठोस किरदारों में नजर आए। फिल्म की खूबियों के साथ इसकी खामियों पर भी नजर डालें तो फिल्म का संगीत तेलुगू में भले सुपरहिट रहा हो, हिंदी में इन्हें डब करने की वरुण ग्रोवर से लेकर कुमार तक की कोशिशें असरदार नहीं हैं। सुस्त संपादन फिल्म ‘सीता रामम’ (Sita Ramam Hindi) की एक और कमजोरी है। करीब दो घंटे चालीस मिनट की ये फिल्म कहीं कहीं लंबी खिंचने लगती है। इन दो कमियों को छोड़ दें तो फिल्म इस सप्ताहांत की मस्ट वॉच फिल्म है।

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