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Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Shekhar Home Review by Pankaj Shukla Srijit Mukherji Kay Kay Menon Ranvir Shorey Rohan Sippy BBC India Jio

Shekhar Home Review: के के मेनन ने धरा शेरलॉक होम्स का देसी रूप, कुर्तों के रंग में खोई श्रीजित-रोहन की सीरीज

Fri, 16 Aug 2024 11:45 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 16 Aug 2024 11:45 PM IST
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Shekhar Home Review by Pankaj Shukla Srijit Mukherji Kay Kay Menon Ranvir Shorey Rohan Sippy BBC India Jio
शेखर होम (वेब सीरीज) - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
शेखर होम (वेब सीरीज)
कलाकार
के के मेनन , रणवीर शौरी , शरनाज पटेल , रुद्रनील घोष , दिब्येंदु भट्टाचार्य , रसिका दुग्गल और कीर्ति कुलहरि आदि
लेखक
अनिरुद्ध गुहा , निहारिका पुरी और वैभव विशाल (शेरलॉक होम्स पर आधारित)
निर्देशक
श्रीजित मुखर्जी, रोहन सिप्पी
निर्माता
समीर गोगाटे
ओटीटी:
जियो सिनेमा
रिलीज:
14 अगस्त 2024
रेटिंग
2/5

ऐसा अक्सर ही होता है सिनेमा में। और, ये नया भी नहीं है। निर्देशक बंगाल से है तो उसकी जासूसी कहानियां अब भी सत्यान्वेषी व्योमकेश बख्शी और फेलु दा से आगे नहीं निकल पाती हैं। भद्रलोक की दिक्कत ये है कि देश विदेश घूम आने के बाद भी उनको हिंदी से दिक्कत हैं। श्रीजित मुखर्जी तो ऑन रिकॉर्ड कह चुके हैं कि हिंदी को वह राष्ट्र की भाषा का दर्जा नहीं देते। लेकिन, शोहरत के लिए वह बार बार हिंदी सिनेमा की तरफ ही भागते हैं। उनकी नई कोशिश शेरलॉक होम्स की कहानियों का एक बेहद दोयम दर्जे का हिंदी अनुकूलन है। रचयिता में उनका नाम भी शामिल है लिहाजा इस सीरीज की सबसे कमजोर कड़ी वह ही हैं। निर्देशकों में उनका नाम पहले के चार एपिसोड में है और बाकी के दो एपिसोड के ‘गुनहगार’ हैं रोहन सिप्पी। रोहन सिप्पी पर भी श्रीजित का ऐसा खुमार चढ़ा दिखता है कि बस, पूछो मत!

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Shekhar Home Review by Pankaj Shukla Srijit Mukherji Kay Kay Menon Ranvir Shorey Rohan Sippy BBC India Jio
वेब सीरीज 'शेखर होम' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुुंबई

बीबीसी स्टूडियोज का एक और बाजार
बीबीसी स्टूडियोज के पास कहानियों का अच्छा खजाना है। उन कहानियों के हिंदी अनुकूलन के अधिकार पहले इसने अप्लॉज एंटरटेनमेंट को खूब बेचे। अप्लॉज को देर से ही सही पर समझ आ गया कि रीमेक का रास्ता उन्हें सुरक्षित रास्ते पर तो रख सकता है लेकिन उसकी अपनी पहचान बनाने में नाकाफी है। अब बीबीसी ने जियो स्टूडियोज को पकड़ा है। इस कंपनी के लिए डिजिटल सामग्री बनाने का काम अब भी वॉयकॉम18 के पास भी है। जियो सिनेमा एप पर आने वाली ‘ओरिजिनल’ सामग्री से खास उम्मीद इसके ग्राहकों को रहती नहीं है लेकिन करीब पांच घंटे के ‘शेखर होम’ के छह एपिसोड देखना इसलिए भी जरूरी है कि ये इस एप पर आने वाली सामग्री का एक और लिटमस टेस्ट है और इस टेस्ट में ये सीरीज पूरी तरह फेल है। कुर्ते पाजामे से शुरू होने वाला देसी जासूस, कुर्ते जींस और शर्ट जींस तक होते होते अपना किरदार यूं खोता है कि बस होंठ पर उंगली रखे रह जाने के अलावा दूसरा कुछ याद रखने लायक बचता नहीं है। हां, के के मेनन के कुर्तों के रंग कमाल चुने गए हैं।

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Shekhar Home Review by Pankaj Shukla Srijit Mukherji Kay Kay Menon Ranvir Shorey Rohan Sippy BBC India Jio
वेब सीरीज 'शेखर होम' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुुंबई

सरकटे के आतंक की पूरब की कहानी
सर आर्थर कॉनन डॉयल की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कहानियों का हिंदी अनुकूलन करके ये वेब सीरीज बनी है। स्नेहाशीष हलदर कैसे आखिर शेखर होम बन गया? ये बात भी आखिर तक आते आते सीरीज बता देती है लेकिन शुरू की कहानी में जिस तरह से ये किरदार अपना सरनेम होम एक आम नाम बताने की कोशिश करता है, उसे देखकर सीरीज लिखने वालों पर तरस आता है। एपिसोड दर एपिसोड आगे बढ़ती कहानी में शेखर होम की सूंघने की शक्ति निखरकर सामने आती रहती है। कभी वह घास के जहर का पता लगाता है, कभी घास से बनने वाले इत्र का। ‘स्त्री 2’ की रिलीज से पहले इस वेब सीरीज में सरकटे का आतंक ओटीटी पर आ चुका था, लेकिन सीरीज की कहानियां इतनी कमजोर हैं कि क्या ही कहें। ‘एम’ वाली कहानी इसके दो एपिसोड खा जाती है, और सबसे कमजोर कहानी इस सीरीज की यही है।

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वेब सीरीज 'शेखर होम' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुुंबई

लेखन, निर्देशन और संवाद सब में बेअसर
श्रीजित मुखर्जी ने वेब सीरीज ‘शेखर होम’ के हिंदी अनुकूलन या कहें कि लेखन के लिए अनिरुद्ध गुहा और निहारिका पुरी को लगाया। संवाद लिखने ही आए थे वैभव विशाल, लेकिन उनकी लिखी कविता के चारों तरफ जिस तरह रहस्य का रोना आखिर के एपिसोड में रोया गया है, उसने पूरी सीरीज की ‘वॉट’ लगा दी है। रिव्यू लिखने से ज्यादा ये सीरीज देखने का मेरे लिए आकर्षण ये भी रहा कि दुनिया भर के किशोरवय बच्चों तक के बच्चों मे लोकप्रिय शेरलॉक होम्स का हिंदी अनुकूलन बनाने निकले सिनेमा के दो महारथी श्रीजित और रोहन क्या क्या गलतियां कर सकते हैं। किराया न भर पाने की सूरत में एक डॉक्टर उन्हें यहां भी लाना ही था। मिसेज हडसन भी यहां मिसेज एच बनकर सामने हैं। बड़ा भाई सरकारी अफसर होना चाहिए तो यहां वह आईबी अफसर है, वगैरह, वगैरह..। दिलचस्प ये होता अगर इस पूरे सेटअप को कहीं आज के समय में सेट किया गया होता। फोरेंसिक साइंस का आधुनिक रूप दिखाया गया होता और भारतीय न्याय संहिता को इसकी अंतर्धारा बनाया गया होता।

Shekhar Home Review by Pankaj Shukla Srijit Mukherji Kay Kay Menon Ranvir Shorey Rohan Sippy BBC India Jio
वेब सीरीज 'शेखर होम' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुुंबई

हिम्मत सिंह की साख पर गिरा हावड़ा ब्रिज
खैर, कोई भी रचना किसी रचनाकार की अपनी संतति होती है। यहां ये नाम श्रीजित और उनकी टीम को मिला है। के के मेनन और रणवीर शौरी ने अपने किरदारों के हिसाब से जितना कुछ बन पड़ा या जितना कुछ बताया गया, वह कर दिया है। लेकिन, जिन्होंने के के मेनन को ‘स्पेशल ऑप्स’ में देखा है, वे इस सीरीज से सबसे ज्यादा निराश होंगे। बॉटोक्स के इंजेक्शन इसकी वजह हैं या कुछ और ये तो पता नहीं लेकिन, मेनन का अलग अलग एपिसोड में अलग अलग प्रकार के चेहरों के साथ सामने आना सीरीज की एकरूपता की सबसे बड़ी बाधा है। रणवीर यूं लगता है कि जैसे जियो के फुलटाइम एम्प्लॉयी बन चुके हैं। दिब्येंदु जैसे दमदार कलाकार को सीरीज में यूं ही खर्च कर दिया गया है। कीर्ति कुलहरि फिल्मों में क्यों ज्यादा नहीं दिखतीं, इस सीरीज में उनका अभिनय देखकर समझा जा सकता है। जियो की मार्केटिंग और पीआर टीम को इस सीरीज की सरकटे का आतंक वाली कहानी ढंग से सामने लानी चाहिए थी, सीरीज का इकलौता हुक प्वॉइंट यही है। लेकिन, अब हुकर से भी दर्शक कहां फंसता है भला? शरवरी के शीर्षक किरदार वाली फिल्म ‘वेदा’ का भी सबक यही है।

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