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'अय्या' की कहानी भी कमजोर, ट्रीटमेंट भी
- अनुराधा गोयल
Updated Fri, 12 Oct 2012 03:29 PM IST
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हैलो फ्रेंड्स! इस सप्ताह आपके लिए फिल्म देखने के कई ऑप्शन मौजूद थे, ऐसे में हम कंन्फ्यूज थे कि आपके लिए कौन सी फिल्म देखने जाएं। इस उधेड़बुन में हम खुद-ब-खुद सपनों की दुनिया में पहुंच गए, जहां पता चला कि इस सप्ताह एक ऐसी फिल्म भी रिलीज हो रही है जिसमें सपनों की दुनिया को अहमियत दी गई है। जी हां, अब तो आप समझ ही गए होंगे, हम रानी मुखर्जी की फिल्म 'अय्या' पर चर्चा करेंगे। देखते हैं कि रानी मुखर्जी के सपनों की दुनिया आपको रास आती है या नहीं।
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कहानी
मीनाक्षी देशपांडे (रानी मुखर्जी) एक महाराष्ट्रीयन लड़की है, जो हमेशा सपनों की दुनिया में रहती है, उसके सपने भी कोई बहुत बड़े नहीं है, उसको एक ऐसे राजकुमार की तलाश है जो उसे प्यार कर सकें। मीनाक्षी के घरवाले उसके लिए लड़के की तलाश कर रही है और मीनाक्षी को लाइब्रेरियन का जॉब मिल जाता है।
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लाइब्रेरी में अपने सपनो में खोई हुई मीनाक्षी को एक भीनी सी खुशबू अपनी ओर आकर्षित करती है। मीनाक्षी उस खुशबू का पीछा करती है तो पाती है वो सुगंध कॉलेज के एक लड़के सूर्या (पृथ्वीराज) से आ रही है। इस खुशबू में मुग्ध मीनाक्षी मन ही मन सूर्या को चाहने लगती है और हर पल उस खुशबू का अहसास लिए उसका पीछा करती रहती है, इस बात से अंजान की सूर्या उसके बारे में जानता भी नहीं है।
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इधर, मीनाक्षी की शादी माधव (सुबोध) से पक्की हो जाती है। क्या मीनाक्षी सूर्या को अपनी दिल की बात बता पाई, क्या मीनाक्षी की शादी उसके घरवालों की मर्जी से हो गई, ये जानने के लिए आप फिल्म देखेंगे तो ही बेहतर होगा।
अभिनय
रानी मुखर्जी बेहतर अभिनेत्री हैं, जिन्हें अभिनय की समझ हैं लेकिन पता नहीं उन्हें इस फिल्म में क्या हो गया, वो जहां ज्यादा नेचुरल एक्टिंग करने की कोशिश कर रही थीं वहीं मात खा गई। अपने सपनों की दुनिया को दिखाने के चक्कर में रानी का अभिनय फिल्म में कोई खास नहीं रहा। रानी ने हालांकि फिल्म में बहुत मेहनत की लेकिन वो दर्शकों को आकर्षित करने में खास कमाल नहीं दिखा पाई।
पृथ्वीराज पूरी फिल्म में शांत ही रहे शुरूआत में बोले भी तो तमिल में अब जब उनकी बोलने की बारी आई तब तक फिल्म ही खत्म हो गई। यानी उन्होंने अपने मूक अभिनय से एक्टिंग करने की कोशिश की लेकिन दर्शक उनके कैरेक्टर को हजम करने में कामयाब नहीं हो पाएंगे।
निर्देशन
सचिन कुंडलकर ने क्या सोचकर ये फिल्म बनाई ये समझ से परे है। फिल्म की कहानी ही नहीं, बल्कि ट्रीटमेंट में भी बहुत कमी रही। फिल्म में रानी का बार-बार सपनों में जाना और घर में सगाई के इतने बड़े मंडप के बाहर कूड़ेदान के होने का कोई अर्थ नहीं था, नैना और नाना की शादी, रात से सुबह तक घरवालों का नाच-गाना, माधव का दुल्हन के लिए लंबे समय तक इंतजार ये सब बाते कुछ हजम नहीं होती। फिल्म की स्टार कास्ट का ड्रेसिंग सेंस सभी कुछ दर्शकों को बेशक कुछ पल के लिए हंसा सकता है लेकिन उनका मनोरंजन करने में कामयाब नहीं होगा।
संगीत
फिल्म में 'अग्गा बाई हल्ला मचाए रे','ड्रीमम वेकपम' का काफी समय से वायरल है, लेकिन ये गीत रानी के हॉट अंदाज और डांस के चलते पॉपुलर हुआ है क्योंकि इसके बोल हिंदी भाषियों की समझ में आने से रहे। वहीं 'व्हाट टू डू' को बहुत ही फूहड़ता से प्रजेंट किया है जो कि देखने में भी बुरा लगता है, वहीं 'महक' गाना सुनने में अच्छा है।
क्यों देखें
रानी मुखर्जी का हॉट अंदाज और चंचलता देखने के लिए फिल्म देख सकते हैं। रानी मुखर्जी के फैंस रानी को देखने के लिए फिल्म देख सकते हैं। तमिल, हिंदी, मराठी फिल्मों के मिश्रण और उनके कल्चर को देखने के लिए फिल्म देख सकते हैं। बेसिर-पैर की फिल्म जो आपको थोड़ा बहुत तो हंसाएगी, ऐसी फिल्म देखने के लिए आप ये फिल्म देख सकते हैं।
क्यों न देखें
कमजोर कहानी, कमजोर निर्देशन के कारण फिल्म में मजा नहीं आएगा। रानी मुखर्जी की दो साल बाद वापसी भी कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई। फिल्म में जहां हिंदी टाइटल्स की दरकार थी, वहीं ये गायब थे, हिंदी समझने वाले कन्फ्यूज हो जाएंगे कि वो देख क्या रहे हैं। फिल्म बीच-बीच में काफी बोर करती है।
एक्स्ट्रा शॉट्स
रानी मुखर्जी दो साल बाद परदे पर वापसी कर रही हैं।
फिल्म में साउथ के हीरो पृथ्वीराज सुकुमारन है।
‘अय्या’ में रानी एक नहीं बल्कि पूरे तीन आइटम नंबर किए हैं।
रानी ने फिल्म के लिए मराठी, तेलगू सीखी है।
रानी ने इस फिल्म के लिए लावणी, बैले डांस तेलगू स्टाइल में डांस करने के लिए खासी प्रैक्टिस की।