Raat Jawaan Hai Review: तीन दोस्तों का गजब का ‘थ्रीसम’, कतई जरूरी नहीं है मां-बाप बनने पर बचपना छूटना..!
सच्ची मेरा बड़ा मन कर रहा है इस सीरीज को फोर स्टार रेटिंग देने का। लेकिन, न जाने किसके ख्याल में ये पुलाव पका कि बिना लड़कियों को गाली देते दिखाए सीरीज की कहानी ‘कूल’ नहीं लगेगी। इस काकबुद्धि ने अच्छे भले रेशम पर टाट का पैबंद लगा दिया है। क्या ही मस्त सीरीज लिखी है, ख्याति आनंद और पुथरन ने। ऊपर से अनिर्बान दासगुप्ता ने अपने इफराती संवादों (एडीशनल डॉयलॉग) से इसे और बढ़िया छौंका है। टीवीएफ की सारी पढ़ाई सुमीत व्यास ने इस सीरीज में प्रैक्टिकल करके दिखाई है। सीरीज उन सबको जरूर देखनी चाहिए जो नए, नए मम्मी-डैडी बने हैं। दफ्तर में बॉस केआरए नहीं डिफाइन कर पा रहा है। घर में बीवी जिम्मेदारियां नहीं समझा पा रही है। ऊपर से पिछली पीढ़ी की देखभाल का प्रेशर अलग से..! इतनी सारी चिंताएं हो तो भला नींद कैसे आ सकती है, और इसीलिए इस सीरीज का नाम है, ‘रात जवान है’।
रात इसलिए जवान है..
‘रात जवान है’ की कहानी तीन दंपतियों की है। इनमें से तीन बचपन से जिगरी दोस्त हैं। इन छह के तीन बच्चे हैं, कुल मिलाकर नौ और कहानी ‘सत्ते पे सत्ता’ से भी ज्यादा मजेदार है। सब कुछ ये योजना बनाकर करते हैं। रात को बच्चा सो गया हो तो एक दूसरे से चैट के जरिये बात करते हैं। लेकिन, ऐन मौके पर बच्चा दुद्धू के लिए जाग ही जाता है। फिर घर से निकलकर बातें दोस्तों के बीच होने लगती है, उस ग्रुप पर जिसका नाम ही है, रात जवान है। राधिका, अविनाश और सुमन की इस कहानी में राधिका बड़े घर की बेटी है और एक तरह से देख जाए तो गैंग लीडर है। अविनाश की बीवी वकील है और वह बच्चा होने के बाद से हाउस हसबैंड बना हुआ है। सुमन ठेठ महाराष्ट्रियन परिवार से है और शादी उसने की है एक सरदार से। है न पूरा फिट मामला, एक कॉमेडी सीरीज के लिए। लेकिन वेब सीरीज ‘रात जवान है’ हास्य और व्यंग्य के बहाने ऐसी बातें समझा जाती है जिसे देखते-सुनते आंखों में आंसू आ सकते हैं।
दमदार किरदारों की मजेदार कहानी
कुल आठ एपीसोड की सीरीज ‘रात जवान है’ शुरू होती है तो पहले ही एपिसोड में जब कुमुद मिश्रा का किरदार अपनी बेटी के सामने ‘अपनी खुशियों को तेरी खुशियों जितनी तवज्जो दी’ वाला संवाद बोलता है तो कहानी का मैदान तय हो जाता है। अब यहां राधिका, सुमन और अविनाश को खुलकर खेलना है। पिकनिक मनाते समय कोई आकर खामखां का ‘ज्ञान’ दे तो उसके लिए राधिका की दबंगई काम आती है। बच्चों की देखभाल के लिए आया तलाशने गांव जाने पर भारत भी दिखता है और ये भी दिखता है कि कैसे घरों में काम करने वाली सहायिकाएं अपने बच्चे राम भरोसे छोड़ दूसरों के बच्चों का भरोसा बनने के लिए सब पीछे छोड़ आती हैं। अच्छा प्वाइंट दिमाग में हमेशा बाद में आता है, की तर्ज पर सीरीज के बेहतरीन एपीसोड भी आखिर में आते हैं। दूसरे और तीसरे एपिसोड में थोड़ी कहानी और पटकथा की तंगी है, लेकिन उसके बाद मामला बिल्कुल मक्खन है। एक बार देखना शुरू किया तो फिर आखिर तक बिना देखे उठने का मन शायद ही करे।
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सुमीत व्यास का फुलटाइम निर्देशन
शॉर्ट फिल्म ‘हेयरकट’ और मिनी सीरीज ‘टंकेश डायरीज’ में हाथ साफ करने के बाद अभिनेता सुमीत व्यास ने वेब सीरीज ‘रात जवान है’ में बतौर निर्देशक अपना पूरा जलवा दिखाया है। ‘परमानेंट रूममेंट्स’ और ‘ट्रिपलिंग’ जैसी टीवीएफ की वेब सीरीज से सुमीत ने कॉमेडी में टाइमिंग और जोक्स के सही से लैंड करने की जो भी प्रैक्टिस की है, वह सब यहां उनके काम आई है। राधिका, अविनाश और सुमन के रूप में यहां उनके पास तीन ऐसे किरदार हैं, जो आशंकाओं, अपेक्षाओं और उम्मीदों पर पलते रहे हैं। उनके जीवन साथी उन्हें टूटकर प्यार करते हैं, लेकिन बीच बीच में दंपतियों की आपसी नोकझोंक भी कहानी में तड़का मारती रहती है। राधिका के पापा जी सुपर कूल हैं। सुमन के मम्मी-पापा बहुत सीधे सादे हैं। इतने कि डिल्डो को मसाजर समझते हैं। और, सत्तू के मम्मी-पापा ऐसे हैं कि बहू देर रात टहलने चली जाए तो बेटे और पोते को लेकर उसे तलाशने निकल पड़ते हैं।
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तीन दोस्तों का मस्त ‘थ्रीसम’
तीन पीढ़ियों की वेब सीरीज ‘रात जवान है’ में अभिनय के मामले में बरुण सोबती अव्वल नंबर हैं। दोबारा नौकरी करने के फैसले के बाद अपने दुधमुंहे बेटे के साथ जो उनका मोनोलॉग है, वह सीरीज का सबसे सटीक सीन है। हर पिता यही चाहता है कि बेटा उसका जिस कॉलेज के नाम पर उंगली रख दे, वह उसे वहां पढ़ा सके। और, बाप की ख्वाहिश क्या है, यही कि बेटा जब पहली बार कुछ बोले या पहली बार अपने पैरों पर चलना शुरू करे तो वो लम्हा वह अपने साथ बनते हुए देख सके। राधिका के रोल में अंजलि ने सीरीज की कहानी के एंकर का काम किया है। बेटी के स्कूल टीचर की तारीफ करने पर खुद को वैसा ही बनाने के बाद स्कूल जाने की उसकी कोशिश वाला दृश्य सुंदर है। सुमन के किरदार में प्रिया बापट सौ फीसदी मराठी मुलगी हैं। चंद्रू और मंजू वाले उसके दृश्य उच्च मध्यमवर्गीय परिवारों की बिल्कुल सटीक तस्वीर पेश करते हैं। तीन दोस्तों का ये मस्त थ्रीसम है। सेक्स और अश्लीलता बिल्कुल नहीं हैं। हां, गालियां कम होतीं और नाम थोड़ा बेहतर होता तो क्या ही बात होती!
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ट्विशा पाल का रंग रोगन बेहद आकर्षक
वेब सीरीज ‘रात जवान है’ सुंदर बन पड़ी है तो इसमें इसकी प्रोडक्शन डिजाइनर ट्विशा पाल का भी योगदान कम नहीं है। सीरीज का हर फ्रेम उन्होंने बहुत करीने से सजाया है। लोकेशन चुन चुनकर रखी गई हैं। आखिरी एपिसोड का आखिरी सीन जिस तरह से दक्षिण मुंबई की सुबह की सुनसान सड़कों पर तीनों मुख्य किरदारों के नाइट ड्रेसेज के साथ शूट किया गया है, वह काबिले तारीफ है। और, इसमें बराबर की मेहनत की है सीरीज के सिनेमैटोग्राफर जय आई पटेल ने। जय का कैमरा दर्शकों को पहले एपिसोड से ही कहानी का हिस्सा बनाने में कामयाब रहा है। अनुराग सैकिया ने कहानी का टोन बिल्कुल सही पकड़ा है, उनका संगीत भी इस सीरीज में किसी किरदार से कम नहीं है। नम्रता राव ने हर एपिसोड की अवधि कहानी की प्रगति के हिसाब से दुरुस्त रखी है और इसे कहीं भी शिथिल नहीं पड़ने दिया है। शुरू के एपिसोड में अनावश्यक गाली-गलौज न हो और इसकी मार्केटिंग थोड़ी और झन्नाटेदार हो तो ये सीरीज सीजन की बेस्ट सीरीज होने का माद्दा रखती है।