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जुगनी फिल्म समीक्षा: नाम जैसी चमक नहीं

Fri, 22 Jan 2016 02:51 PM IST
Updated Fri, 22 Jan 2016 02:51 PM IST
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movie review jugni

निर्माताः करन ग्रोवर-मानस मल्होत्रा

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निर्देशकः शेफाली भूषण
सितारेः सुगंधा गर्ग, सिद्धांत बहल, साधना सिंह
रेटिंग **

आत्मसंघर्ष के दौर से गुजरता कलाकार जब नई ऊंचाइयां छूना चाहता है तो उसे अपने रास्ते खुद तलाशने पड़ते हैं। यही विभावरी/विब्स (सुगंधा गर्ग) की कहानी है। जो सिने-संगीत दुनिया में जगह बनाना चाहती है। इसके लिए उसके पास कुछ ऐसा चाहिए जो खास हो। यही तलाश उसे पंजाब के एक गांव ले जाती है जहां लोकगायिका बीबी सरूप (साधना सिंह) से उसे उम्मीद है।

विब्स को लगता है कि बीबी के गानों को अगर वह अपने संगीत में पिरो लेगी तो सपना सच हो जाएगा। यहां उसकी मुलाकात होती है बीबी के बेटे मस्ताना (सिद्धांत बहल) से। जो अपनी मां के साथ ही कार्यक्रमों में गाता है। जब दो जवां दिल मिलते हैं तो संगीत के छिड़े तार नई तरंगें पैदा करते हैं। इस मोड़ पर कहानी पारंपरिक रास्ते से हट जाती है और कहती है कि न मिलने में भी मजा है! लैला-मजनूं, शीरीं-फरहाद, सस्सी-पन्नू अगर मिल जाते क्या दुनिया उनकी कहानी जानती!!

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निर्देशक शेफाली भूषण देश के पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण की बेटी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की बहन हैं। यह उनकी पहली फिल्म है। शेफाली करीब दो दशक से लोक संगीत को सहेजने और उसे लोगों तक पहुंचाने का काम कर रही हैं। जुगनी उसी काम को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

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भावनाओं की जगह यहां नहीं दिखती

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फिल्म की समस्या है कि यह लोक-संसार में बसी होने और इसे विकसित होती दुनिया से कनेक्ट करने की कोशिश में इतनी मॉडर्न है कि भावनाओं की जगह यहां नहीं दिखती। शेफाली के गांव में नायिका रच-बस नहीं पाती। वह बाहरी बनी रहती है। इसीलिए दर्शक भी लोक की परिधि पर ही ठहर जाता है। ऐसे में साधना सिंह जैसी कलाकार और उनका किरदार मामूली बन कर रह जाते हैं। बीबी सरूप जो शुरुआत में कहानी के केंद्र में नजर आती हैं, धीरे-से विस्थापित हो जाती है।

जुगनी की एकमात्र चमक सुगंधा गर्ग हैं। वह विभावरी के रूप-रंग से न्याय करती हैं। वह उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती है जो सपने सच करने के लिए कुछ भी कर सकती है। हालांकि उसका चरित्र-स्वभाव अति-चंचल है। अतः उसकी सफलता कितनी स्थिर हो सकती है, यह अलग विषय है।

शेफाली ने कथा कहने की शैली और निर्देशन में सीधी राह पकड़ी है। कोई प्रयोग नहीं किया है। उन्होंने किरदारों को सुंदर और रंगीन कपड़े पहनाए हैं, जो आकर्षण बढ़ाते हैं। अगर आप संगीत प्रेमी हैं तो जुगनी के गाने सुन सकते हैं।

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