Moana 2 Review: हिट फिल्म की फ्रेंचाइजी बनाने निकले तीन नए तिलंगे, पढ़िए कहां कहां डुबकी लगा गई ‘मोआना 2’
फिल्म ‘मोआना 2’ वहां से शुरू होती है जहां मोआना को अपने द्वीप के लोगों की यायावर संस्कृति को पुनर्जीवित करने की कोशिश करनी है। पिछली फिल्म में उसने दैत्याकार लावा से धरती के दिल को आजाद कराया था।
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सबसे पहले वो बात करते हैं, जिसकी सबसे ज्यादा जरूरत है और वो ये कि क्या ‘मोआना 2’ डिज्नी की फ्रेंचाइजी फिल्मों की श्रृंखला में एक नई और मजबूत कड़ी जोड़ती है? डिज्नी की नई फिल्म ‘मोआना 2’ देश में अंग्रेजी के अलावा हिंदी, तमिल और तेलुगु में भी रिलीज हुई है। इन भाषाओं में फिल्म के डब संस्करणों का ज्यादा हल्ला नहीं है और मैंने भी ये फिल्म अंग्रेजी में ही ड्वेन जॉनसन और ऑलिल क्रेवाल्हो की आवाजों के लालच में ही देखी। फिल्म ‘मोआना 2’ देखते समय आपको कुछ कुछ ऐसा लग सकता है कि इसकी कहानी का ग्राफ फिल्म सरीखा न होकर, वेब सीरीज जैसा ज्यादा है। अगर आपको ऐसा लगा है तो इसमें आपकी पारखी नजर की दाद देनी चाहिए क्योंकि फिल्म ये बाद में बनी, शुरूआत इसकी वेब सीरीज की तरह ही हुई थी।
फिल्म ‘मोआना 2’ वहां से शुरू होती है जहां मोआना को अपने द्वीप के लोगों की यायावर संस्कृति को पुनर्जीवित करने की कोशिश करनी है। पिछली फिल्म में उसने दैत्याकार लावा से धरती के दिल को आजाद कराया था। यहां छुटकारा पूरे एक ऐसे द्वीप को दिलाना है जिसे शैतान ने समुद्र में डुबो दिया है। कहते हैं कि इस द्वीप के डूब जाने के चलते ही मोआना के द्वीप के लोगों का बाहरी दुनिया से और बाहरी दुनिया का उनके द्वीप से संपर्क टूट चुका है। मोआना को अपने बेबी वाराह और सयाने मुर्गे के साथ खेलते हुए मिट्टी का एक बर्तन मिलता है। हड़प्पा सभ्यता की याद दिलाते इस प्रसंग से मोआना ये साबित करती है कि अभी धरती पर दूसरे द्वीप भी हैं और अगर शापित द्वीप समुद्र से बाहर आ जाए तो सब कुछ फिर से वैसा ही हो जाएगा।
‘मोआना’ एक हिट फिल्म रही है। उस फिल्म में मोआना की कहानी का पूरा वृत्त तैयार होकर अपने आरंभ बिंदु से अंतिम बिंदु तक का सफर तय कर चुका था। तो, अब आगे क्या? क्या ये फिल्म एक नई फ्रेंचाइजी गढ़ सकती है? किरदार में दम है? कहानी भी अगर दमदार तरीके से लिखी गई होती तो ऐसा हो सकता था? ‘मोआना 2’ में इसके लेखकों जेरेड और डाना ने टोटकों का इस्तेमाल किया है। मोआना को एक द्वीप की मुक्ति का टास्क देकर वह फिल्म की लाइन पहले खींचते हैं, फिर क्लाइमेक्स तक उसे पहुंचाने के लिए वह किसिम किसिम के किस्से तलाश लाते हैं।
अपना डेमी गॉड भी यहां है। उसके बंधन से आजाद होने वाला प्रसंग रोचक है। चमगादड़ों वाली शैतानी आंटी भी यहां हैं। वह मोआना की मदद करती है। उसकी अपनी कहानी क्या है, ये शायद अगली किसी फिल्म में पता चले? द्वीप को समंदर की तलहटी में कैद करने वाले राक्षस की ताकत बिजली की कड़क में बसती है और अपने ही टैटू से बात करने वाले भगवान की ताकत छीन सकती है। कहानी का मर्म बहुत प्रेरक है। और, इसकी अंतर्धारा ये है कि इंसान को कुछ कर गुजरने के लिए किसी भगवान की नहीं, खुद पर भरोसे की जरूरत होती है। मदद करने वाली शक्तियां जब बीच रास्ते साथ छोड़ जाएं, ऐसे हालात में भी जो मंजिल तक पहुंचने की जिद ठाने रहता है। किस्मत को भी झक मारकर उसकी मदद करने आना ही होता है।
कहानी को इसी के आसपास करीने से बुना गया होता तो पहली बार कोई फिल्म निर्देशित कर रहे डेविड डेरिक जूनियर, जैसन हैंड और डाना लिडॉक्स कम से कम फर्स्ट डिवीजन इस फिल्म में जरूर पास होता। फिल्म बिखरी बिखरी सी है और इसकी सबसे कमजोर कड़ी है इसका संगीत। पता नहीं क्यों, पर कई मौकों पर ऐसा भी लगा जैसे ‘फ्रोजेन’ सीरीज के एनीमेशन फ्रेम्स नए रंग रोगन के साथ इस फिल्म में इस्तेमाल कर लिए गए हैं। ‘मोआना’ का संगीत कमाल था। ‘मोआना 2’ का संगीत उसका आधा भी नहीं है। छोटे बच्चों के लिए फिल्म इस सबके बावजूद अच्छी टाइम पास है। अभिभावकों को भी इसमें आनंद आता तो कुछ और बात होती!
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