Mark Antony Review: ‘लोकी’ सा आइडिया, कॉमिक बुक सा कौतुहल, समझिए ‘मार्क एंथनी’ की आखिर क्यों है इतनी हलचल
तमिल सिनेमा के स्टार विशाल की फिल्म 'मार्क एंथनी' अब हिंदी सिनेमा के दर्शकों के बीच रिलीज हो चुकी है। फिल्म के रिलीज होते ही फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट दिए जाने के एवज में कथित रूप से लाखों रुपये मांगे जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया। तमिल में यह फिल्म 15 सितंबर को रिलीज हुई और वहां पर फिल्म को मिली जबर्दस्त सफलता को देखते हुए अब इसे हिंदी में डब करके रिलीज कर कर दिया गया। फिल्म टाइम ट्रेवल, साइंस फिक्शन और फंतासी फिल्म के रूप में शुरू होती है और फिर धीरे-धीरे एक गैंगस्टर ड्रामा बनने के लिए रंग बदलती है और अंत में एक रिवेंज थ्रिलर बनकर रह जाती है।
गैंगस्टर विषय पर बहुत सारी फिल्में आ चुकी है लेकिन जब इस कहानी में टाइम ट्रैवल सीक्वेंस आता है, तो कहानी थोड़ी सी दिलचस्प लगने लगती है। हालांकि टाइम ट्रैवल के विषय पर बहुत सारी फिल्में बन चुकी हैं, उन फिल्मों के लिहाज से देखा जाए तो फिल्म थोड़ी सी अविश्वसनीय सी लगने लगती है। और, फिल्म एक मोड़ पर आकर थोड़ी सी बोर लगने लगती है। फॉर्मूला कुछ कुछ लोकी जैसा लगता तो है लेकिन वैसी फिनिश इसमें नहीं है। वजह? जितने भी मसाला फार्मूले हैं उन सबका इस फिल्म में इस्तेमाल। इस सबके बावजूद, यह पूरी तरह से कॉमेडी और एक्शन से भरपूर फैमिली एंटरटेनर फिल्म है।
डबिंग इस फिल्म की भी वैसी ही है जैसी अधिकतर साउथ फिल्मों की होती रही है। ये फिल्में दरअसल टेलीविजन के उन दर्शकों के लिए इस तरह डब होती हैं जिन्हें तकनीक में कम और तमाशे में ज्यादा मजा आता है। लो एंगल कैमरा के शॉट, मर्दाना गबरू हीरो, आंखें चौंधिया देने वाली सिनेमैटोग्राफी, दिमाग चकरा देने वाला एक्शन और संगीत ऐसा कि जो समझ में आए न आए लेकिन मन जरूर चकरा दे। बस फिल्म ‘मार्क एंथनी’ इसी कसौटी पर कसी गई फिल्म है। मसाला फिल्म है। अगर टीवी और यूट्यूब पर आप हिंदी में डब साउथ फिल्मों का मजा लेते रहे हैं, तो ये आपके लिए परफेक्ट एंटरटेनर है।
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