फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Mahadev Ka Gorakhpur Review in Hindi Ravi Kishan Pramod Pathak Lal Kiaan Sushil Singh movie

Mahadev Ka Gorakhpur Review: चुनाव से ठीक पहले रवि किशन का हर हर महादेव, जानिए कहां चूक गया गोरखपुर कनेक्शन

Fri, 29 Mar 2024 09:21 PM IST
ज्योति राघव अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: ज्योति राघव Updated Fri, 29 Mar 2024 09:21 PM IST
विज्ञापन
Mahadev Ka Gorakhpur Review in Hindi  Ravi Kishan Pramod Pathak Lal Kiaan Sushil Singh movie
महादेव का गोरखपुर - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
महादेव का गोरखपुर
कलाकार
रवि किशन , प्रमोद पाठक , लाल , कियान , सुशील सिंह और इंडी थंपी आदि
लेखक
साईं नारायण
निर्देशक
राजेश मोहनन
निर्माता
प्रितेश शाह , सलिल शंकरन और रवि किशन
रिलीज :
29 मार्च 2024
रेटिंग
2/5

भारत ऋषि मुनियों का देश है। माना जाता है कि संत परंपरा की वजह से ही भारतीय संस्कृति अपना अस्तित्व बनाए हुए है। हमारी संस्कृति को सदियों से विदेशी ताकतें मिटाने का षड्यंत्र रचती रची हैं। मंदिरों को तोड़ा गया लेकिन भारत फिर भी अखंड रहा। अवतारों की इस धरती के दो कालखंडों को जोड़ती एक कहानी है अभिनेता रवि किशन की फिल्म 'महादेव का गोरखपुर'। शिव के प्राणलिंग और उनके सर्वश्रेष्ठ सेनापति वीरभद्र की बहादुरी पर आधारित इस फिल्म के माध्यम से यह बताने की कोशिश की गई है कि भारत वर्ष सदियों से विश्व गुरु रहा है और आगे भी रहेगा। 

विज्ञापन

Mahadev Ka Gorakhpur Review in Hindi  Ravi Kishan Pramod Pathak Lal Kiaan Sushil Singh movie
महादेव का गोरखपुर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म 'महादेव का गोरखपुर' की कहानी की शुरुआत साल 1525 से होती है। आयुध पूजा के दिन विदेशी आक्रमणकारी शिव मंदिर पर हमला करके कई शिव भक्तों को मार देते हैं। इससे पहले कि विदेशी आक्रमणकारी शिवलिंग को क्षति पहुंचाएं, आचार्य शिवलिंग समेत जल समाधि लेते हैं। फिल्म की आगे की कहानी पुनर्जन्म से जुड़ी हैं। आचार्य और वीरभद्र का पुनर्जन्म होता है और ये अपने पिछले जन्म के अधूरे काम को पूरा करते हैं। इस फिल्म के माध्यम से यह बताने की कोशिश की गई है जब-जब शिवलिंग को क्षति पहुंचाने की कोशिश की गई, भगवान शिव के रूद्र अंश भारत की भूमि पर अवतरित हुए और विदेशी आक्रमणकारी से हमेशा शिवलिंग की रक्षा की।

विज्ञापन
विज्ञापन

Mahadev Ka Gorakhpur Review in Hindi  Ravi Kishan Pramod Pathak Lal Kiaan Sushil Singh movie
महादेव का गोरखपुर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

इस फिल्म की कहानी का आधार भले ही काल्पनिक है, लेकिन इस फिल्म के माध्यम से यह बताने की कोशिश की गई है कि आखिर भगवान शिव ने पृथ्वी पर आने के लिए भारत के ही तिकोने स्थल को ही क्यों चुना? इसके पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण क्या रहे? लेकिन फिल्म की पटकथा बीच बीच में ऐसी बिखरी हुई है कि अगर आप का फिल्म देखने में थोड़ा सा ध्यान भटका तो समझ नहीं पाएंगे कि पिछली घटना का आगे वाली घटना के साथ क्या संबंध रहा है। फिल्म में कहानी कहने का अंदाज जितना सहज होता है उतनी ही सहजता से दर्शक उससे जुड़ पाते हैं। फिल्म की पटकथा कुछ कुछ ‘एनिमल’ के अंदाज में आगे बढ़ाने की कोशिश होती है लेकिन अध्यात्म को आधुनिकता से जोड़कर जितने कौशल से फिल्म 'कार्तिकेय 2' बनी थी, वैसी काबिलियत दिखाने में फिल्म 'महादेव का गोरखपुर' के लेखक साईं नारायण चूक गए हैं।

विज्ञापन

Mahadev Ka Gorakhpur Review in Hindi  Ravi Kishan Pramod Pathak Lal Kiaan Sushil Singh movie
महादेव का गोरखपुर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म 'महादेव का गोरखपुर' में रवि किशन की दोहरी भूमिकाएं हैं। वीरभद्र और डीआईजी पंकज पांडे के किरदार में उनका अभिनय अच्छा है। मुर्तजा अब्बासी की भूमिका में प्रमोद पाठक भी अपनी अलग छाप छोड़ते हैं। लाल, कियान, सुशील सिंह, इंडी थंपी और फिल्म के बाकी कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाओं से न्याय करने की पूरी कोशिश की है। भोजपुरी सिनेमा में यह एक नया प्रयोग है। रवि किशन ने इस फिल्म के माध्यम से बहुत ही साहसिक कदम उठाया है और इस फिल्म को हिंदी और भोजपुरी के साथ तमिल, तेलुगु और कन्नड़ भाषा में भी रिलीज किया गया है लेकिन फिल्म का जैसा प्रचार और प्रसार होना चाहिए था, वैसा हुआ नहीं है।

Mahadev Ka Gorakhpur Review in Hindi  Ravi Kishan Pramod Pathak Lal Kiaan Sushil Singh movie
महादेव का गोरखपुर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

कमाल की सिनेमाटोग्राफी वाली फिल्म 'महादेव का गोरखपुर' में अरविंद सिंह ने फिल्म के एक एक फ्रेम को बहुत ही खूबसुरती से सजाया है। अजीश अशोकन का संपादन, अगम अग्रवाल और रंजिम राज का संगीत बेहतर है। हालांकि, फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक वैसा ही जैसा आजकल की साउथ की तमाम फिल्मों में सुनने को मिलता है। इस फिल्म के निर्देशक राजेश मोहनन इससे पहले साउथ की कई फिल्में निर्देशित कर चुके हैं। फिल्म का फ्लेवर भी उन्होंने साउथ स्टाइल वाला ही रखा हैं।   

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें Entertainment News से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे Bollywood News, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट Hollywood News और Movie Reviews आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed