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Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Kill Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Nikhil Nagesh Bhat Guneet Monga Karan Johar Lakshya Raghav Juyal

Kill Review: निखिल भट ने रचा प्रेम वियोग का सिनेमाई तांडव, विरह की आग ने खत्म कर दिए खानदान के खानदान

Wed, 03 Jul 2024 08:58 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Wed, 03 Jul 2024 08:58 PM IST
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Kill Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Nikhil Nagesh Bhat Guneet Monga Karan Johar Lakshya Raghav Juyal
किल मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
किल
कलाकार
लक्ष्य , राघव जुयाल , तान्या मानिकताला , अभिषेक चौहान , आशीष विद्यार्थी , हर्ष छाया और अद्रिजा सिन्हा
लेखक
निखिल नागेश भट्ट और आयशा सैयद
निर्देशक
निखिल नागेश भट्ट
निर्माता
गुनीत मोंगा कपूर , अचिन जैन , करण जौहर और अपूर्व मेहता
रिलीज:
5 जुलाई 2024
रेटिंग
4/5

ये उन दिनों की बात है जब गांवों तक अखबार पहुंच नहीं पाते थे और फिल्मों के बारे में वहां तक जानकारी पहुंचाने का इकलौता माध्यम होता रेडियो। राजकुमार कोहली की फिल्म ‘जानी दुश्मन’ (1979) रिलीज होने से पहले आने वाले रेडियो विज्ञापन मुझे अब भी याद हैं। इनमें खासतौर से एक चेतावनी होती कि कमजोर दिल के लोग और गर्भवती स्त्रियां इस फिल्म को न देखें। ऐसी ही कुछ वैधानिक चेतावनी फिल्म ‘किल’ के ट्रेलर के साथ भी जारी की गई थी। आगे बढ़ने से पहले छोटी सी बात नाट्य शास्त्र की। इसे यदि आपने जाना, समझा है तो पता होगा कि श्रृंगार, हास्य, करुण और शांत रसों के बराबर ही इनमें महत्ता मिली है रौद्र, वीर, भयानक और वीभत्स रसों को। ये आठों रस गिनने के बाद बारी आती है नौवें रस यानी अद्भुत की। किस नाटक में कौन से रस कितनी मात्रा में हैं, इसी पर नाटक और दर्शक के बीच का रिश्ता निर्भर करता है। फिल्म ‘किल’ में बाद वाले चारों रस यानी रौद्र, वीर, भयानक और वीभत्स कूट कूट कर भरे गए हैं और पहले वाले चार रसों के बस यहां वहां छींटें ही हैं। आठों रसों के संतुलित प्रयोग से बनी फिल्म का नौवां रस अद्भुत है। केवल वयस्कों के लिए है और फिल्म ‘एनिमल’ को सुपरहिट बनाने वाले दर्शकों के लिए इस साल का बेहतरीन सिनेमाई तोहफा है।

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Kill Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Nikhil Nagesh Bhat Guneet Monga Karan Johar Lakshya Raghav Juyal
किल मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अभी तो ये अंगड़ाई है...

नई सदी के चौबीसवें साल में हिंदी सिनेमा की ये नई अंगड़ाई है। और, इससे ये भी संकेत मिलता है कि असल पुरवाई हिंदी सिनेमा की अब आने वाली है। भारतीय सिनेमा विदेश में भी अब तक शाहरुख खान के सहारे ही अटका रहा है। लेकिन, सितारों का सम्मोहन दर्शकों के मन मंदिर से हट रहा है, वे कहानियों और उन्हें कहने के तरीकों पर फिदा हो रहे हैं। निर्देशक निखिल नागेश भट्ट की फिल्म ‘अपूर्वा’ जब मैंने देखी थी, उससे पहले ही ‘किल’ के बारे में खबरें आने लगी थीं। इस फिल्म को देखने की बेताबी खूब रही है। और, इस बेताबी के बारे में फिल्म के निर्माताओं और निर्देशक को भी जानकारियां मिलती रही हैं। ये ‘किल’ बनाने वालों का आत्मविश्वास ही है कि ‘केवल वयस्कों के लिए’ बनी एक फिल्म को वह रिलीज के पांच दिन पहले से लोगों को दिखा रहे हैं और कहीं किसी तरह की रोक टोक भी नहीं लगा रहे कि रिव्यू शुक्रवार की सुबह ही प्रकाशित होना चाहिए। सनद रहे कि संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘एनिमल’ शुक्रवार की सुबह ही फिल्म समीक्षकों को दिखाई गई थी। ‘किल’ हिंसात्मक दृश्यों के मामले में ‘एनिमल’ पर भारी है और छोटे परदे पर खूब नाम कमाने के बाद इस फिल्म से बड़े परदे पर अपनी बोहनी कर रहे अभिनेता लक्ष्य की मासूमियत भी रणबीर कपूर से कम नहीं है। सनद ये भी रहे कि धर्मा प्रोडक्शन्स से घोषित उनकी दो फिल्में ‘दोस्ताना 2’ और ‘बेधड़क’ तमाम शोरगुल के बाद भी पूरी नहीं हो सकी हैं।

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Kill Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Nikhil Nagesh Bhat Guneet Monga Karan Johar Lakshya Raghav Juyal
किल मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

रूप तेरा मस्ताना, प्यार मेरा दीवाना...

एक मासूम इंसान के पास जब खोने को कुछ नहीं होता तो वह या तो बहुत हिंसक हो जाता है या फिर बिल्कुल शांत। फिल्म ‘किल’ की कहानी एनएसजी कमांडोज के अपनी यूनिट लौटने से शुरू होती है जहां अपना मोबाइल स्विच ऑन करते ही कैप्टन अमृत राठौड़ को अपनी प्रेमिका की रांची में सगाई करने की खबर मिलती है। वह रांची भागता है। वह वहां से प्रेमिका को भगाना चाहता है। ‘मिशन’ में साथ देने उसका कमांडो दोस्त विरेश भी आया है, लेकिन ऐन मौके पर लड़की को पिता का डर सताता है। वह तैयार नहीं होती है तो अमृत भी मिशन ‘अबॉर्ट’ कर देता है। सब अब दिल्ली लौट रहे हैं। एक ही ट्रेन में हैं। रांची से चली राजधानी एक्सप्रेस पर अगले स्टेशन से ही तीन चार दर्जन बदमाश चढ़ जाते हैं। जैमर से मोबाइल नेटवर्क फेल करके डकैती डालना इनका मकसद है, बस इस सबके बीच एक हादसा ऐसा हो जाता है कि ‘रक्षक’ ही ‘राक्षस’ बन जाता है। कुछ घंटे पहले तक अपनी प्रेमिका से कूची कूची रकमा कर रहा हीरो जैसे ही अपना रूप बदलता है, फिल्म में लाशों के ढेर लगते जाते हैं। मरने वालों के शरीर ऐसी ऐसी जगहों से टूटते, फूटते और रूप बदलते हैं कि एक बार तो देखकर ही सिहरन हो जाती है। और, विलेन को भी कहना पड़ ही जाता है, ‘ऐसे कौन मारता है बे!’

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Kill Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Nikhil Nagesh Bhat Guneet Monga Karan Johar Lakshya Raghav Juyal
किल मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
...जब हिंसा भी सम्मोहक लगे

जी हां, बहुत मजबूत कलेजा चाहिए फिल्म ‘किल’ को देखने के लिए। लेकिन, इस फिल्म का मनोविज्ञान कुछ और भी है। निखिल नागेश भट्ट ने अपनी कहानी की पटकथा को कुछ इस तरह आगे बढ़ाया है कि बदमाशों के हाथों हुआ अत्याचार वह पहले दिखाते हैं और फिर इसकी प्रतिक्रिया को इस हद दरजे का हिंसक बनाते हैं कि इस तांडव में भी दर्शकों का मनोरंजन होने लगता है। तांडव समझते हैं ना आप? सती के आत्मदाह करने के बाद क्रोधित शिव की फुंकार! वैसा ही कुछ यहां अमृत है। फायर एक्सट्गिंविशर से जब वह एक बदमाश के सिर को पीट पीटकर पराठा बना देता है तो वीभत्स रस के सारे अवयव होने के बाद भी दर्शक इसमें नायक का वीरत्व देख रहे होते हैं। कहानी में अमृत और तूलिका के रोमांस की अंतर्धारा है और एक बार तो लगता भी है कि अपने मिलन की चौथी एनीवर्सरी मनाने के नाम पर दोनों गाना तो नहीं गा देंगे, लेकिन निखिल ऐसा कुछ नहीं करते। पूरी फिल्म में शायद एक गाना है जो बैकग्राउंड में बजता है, जाको राखे साइयां जैसा कुछ कुछ...!

Kill Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Nikhil Nagesh Bhat Guneet Monga Karan Johar Lakshya Raghav Juyal
किल मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मयूर और रफे की जबर जुगलबंदी

फिल्म ‘किल’ इसके लेखक, निर्देशक निखिल नागेश भट्ट की कल्पना का कमाल है और इस कल्पना को फिल्म के परदे तक पहुंचाने के लिए उन्हें दो कमाल के साथी मिले हैं। ये साथी हैं, फिल्म के सिनेमैटोग्राफर रफे महमूद और प्रोडक्शन डिजाइनर मयूर शर्मा। फिल्म में परदे पर दिखने वाली रेलगाड़ी दरअसल सिनेमाई तकनीकी कौशल का एक ऐसा नमूना है जिसमें ये सब कुछ दरअसल स्टूडियो के अंदर हो रहा होता है। ट्रेन के डिब्बे स्टूडियो के भीतर तैयार किए गए हैं और वे भी ठीक असल रेलगाड़ी जैसे। ये सारे डिब्बे कहीं से भी खिसक सकते हैं। ट्रेन के सारे हिस्सों को शूटिंग के हिसाब से आगे पीछे खिसकाकर फिल्म बनाई गई है लेकिन फिल्म देखते समय ये आपको बिल्कुल पता नहीं चलता है। हां, फिल्म देखने के बाद अगर आप इस फिल्म की मेकिंग का वीडियो देखेंगे तो जरूर दांतों तले अंगुली दबा लेंगे। निखिल नागेश भट ने फिल्म ‘अपूर्वा’ में ऐसा ही करिश्मा अपने सिनेमैटोग्राफर आयुष्मान महाले के साथ किया था। दोनों फिल्मों का संपादन शिव कुमार पैनिकर ने ही किया है और उनका हुनर भी फिल्म के हर दृश्य में साफ दिखाई देता है। फिल्म की एक्शन कोरियोग्राफी में से येओंग ओह व परवेज शेख की जुगलबंदी भी प्रशंसनीय है। ‘वॉर’ और ‘टाइगर 3’ जैसी फिल्मों के बाद से येओंग ओह ने फिर एक बार द्वंद्व दृश्यों की संरचना में अपना खास कौशल दिखाया है।



Kill Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Nikhil Nagesh Bhat Guneet Monga Karan Johar Lakshya Raghav Juyal
किल पोस्टर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फाइनली आ ही गया एक और नया स्टार

सिनेमा में इन दिनों एक प्रयोग इमर्सिव सिनेमा को लेकर चल रहा है, फिल्म ‘किल’ का जो हॉलीवुड रीमेक बनने जा रहा है, अगर उसे किसी तरह 12डी सेटअप में शूट किया जाए और ये सब होते हुए दर्शक खुद को ट्रेन के डिब्बे में ही महसूस करे तो उसका रोमांच बिल्कुल ही अलग होगा। फिल्म के पूरे रोमांच को जीने में इस फिल्म से अपनी अभिनय यात्रा शुरू कर रहे लक्ष्य ने बहुत मेहनत की है। फिल्म को शुरू से आखिर तक अपने कंधे पर संभालकर भागते लक्ष्य ने ये भी साबित किया है कि एक एक्शन स्टार बनने के लिए सिर्फ और सिर्फ एक अच्छी कहानी और एक ऐसा भौगोलिक क्षेत्र चाहिए जिसमें दर्शक खुद को हीरो के साथ फंसा हुआ महसूस कर सके। निखिल ने हिंदी सिनेमा को लक्ष्य के रूप में एक नया स्टार दिया है। और इसी फिल्म से हिंदी सिनेमा को एक नया खलनायक भी राघव जुयाल के रूप में मिला है। गुनीत मोंगा ने टीवी के दो बॉय नेक्स्ट डोर लड़कों को उठाकर एक्शन स्टार बना दिया है। राघव जुयाल के चेहरे के भावों की क्रूरता बहुत ज्यादा डराती है। फणी का अपने पिता के साथ मसखरी का अंदाज भी राघव जुयाल ने अच्छे से जिया है।

Kill Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Nikhil Nagesh Bhat Guneet Monga Karan Johar Lakshya Raghav Juyal
किल मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

निखिल को ही मिलनी चाहिए रीमेक की कमान

फिल्म ‘किल’ की कहानी के हिसाब से ये फिल्म लक्ष्य और राघव जुयाल की ही है। लेकिन, दोस्त की भूमिका में अभिषेक चौहान ने इस कहानी में कुर्बानी के रंग भरे हैं तो कुछ कुछ मौसमी चटर्जी जैसी दिखती तान्या मानिकताला की बड़े बड़े दीदों वाली आंखें और उनका बिहारी लहजे के साथ हिंदी बोलने का अंदाज दर्शकों को याद रह जाता है। अपने उजड्ड बेटे की हरकतों के चलते अपने पूरे खानदान को चलती ट्रेन में एक एक कर मरते देखने वाले डकैतों के सरगना बेनी के किरदार में आशीष विद्यार्थी ने भी प्रभावित किया है। फिल्म ‘किल’ हिंदी सिनेमा की केवल वयस्कों के लिए वाली कैटेगरी में न सिर्फ एक नया प्रतिमान स्थापित करती है, बल्कि ये फिल्म तकनीकी कौशल का एक नया मुकाम भी हासिल करने में सफल रही है। निखिल नागेश भट्ट को ही इसके हॉलीवुड रीमेक का मौका भी मिलना चाहिए क्योंकि इस फिल्म को बनाने का उनका अभ्यास सौ फीसदी नतीजे लेकर आया है।

 
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