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IC 814 The Kandahar Hijack Review: अनुभव सिन्हा का शानदार ओटीटी डेब्यू, कमजोर सरकार पर आतंक का इस्लामी साया

Thu, 29 Aug 2024 09:51 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Thu, 29 Aug 2024 09:51 PM IST
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IC 814 The Kandhar Hijack Review by Pankaj Shukla Netflix India MatchBox Benaras Mediaworks Anubhav Sinha
'आईसी 814 द कंधार हाईजैक' वेब सीरीज रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
आईसी 814 द कंधार हाईजैक (वेब सीरीज)
कलाकार
विजय वर्मा , नसीरुद्दीन शाह , पंकज कपूर , अरविंद स्वामी , कंवलजीत सिंह , मनोज पाहवा , कुमुद मिश्रा , आदित्य श्रीवास्तव , दिब्येंदु भट्टाचार्य , यशपाल शर्मा , सुशांत सिंह , अनुपम त्रिपाठी , राजीव ठाकुर , अमृता पुरी और पत्रलेखा पॉल और दीया मिर्जा
लेखक
अनुभव सिन्हा , त्रिशांत श्रीवास्तव , निखिल रवि शंकर , बिकास मिश्रा , रूपल केवल्य , सौम्या तिवारी और सोनाली जैन और नबीला रिजवी
निर्देशक
अनुभव सिन्हा
निर्माता
संजय राउतरे , सरिता पाटिल और अनुभव सिन्हा
ओटीटी:
नेटफ्लिक्स
रेटिंग
3/5

‘इंदु सरकार’ से लेकर ‘इमरजेंसी’ तक आते-आते हिंदी सिनेमा ने राजनीतिक अंतर्धारा वाले एक अलहदा किस्म के सिनेमा का चक्र पूरा किया है। ये सिनेमा एक खास मकसद से बन रहा है। देश की सियासी अंतर्धारा में वैचारिक मंथन के नए आयामों से बन रहा है। ये बन इसलिए भी रहा है कि एक बड़े तबके की सिनेमा को लेकर सोच बदली है। इस तबके को लगता रहा कि सिनेमा के सामाजिक तराजू में एक पसंघा उन फिल्मकारों का शुरू से लगा रहा है जो वामपंथी या कहें कि प्रोग्रेसिव राइटर्स एसोसिएशन जैसे बरगदों से निकलकर आए। लेखक स्वभाव से सत्ताविरोध में खड़ा दिखता है और सिनेमा भी सबसे पहले लेखन की कला है। सिनेमा को भी शांत को उद्वेलित और उद्वेलित को शांत करने का वरदान कहें या अभिशाप अपने जन्म से ही मिला रहा है। इसीलिए, वेब सीरीज ‘आईसी 814 द कंधार हाईजैक’ देखते समय तन को सजग और मन को चैतन्य रखने की जरूरत है।

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IC 814 The Kandhar Hijack Review by Pankaj Shukla Netflix India MatchBox Benaras Mediaworks Anubhav Sinha
'आईसी 814 द कंधार हाईजैक' वेब सीरीज रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

बहुत ही सामयिक सियासी अंतर्धारा

नेटफ्लिक्स इंडिया की प्रमुख मोनिका शेरगिल और वेब सीरीज ‘आईसी 814 द कंधार हाईजैक’ के निर्देशक अनुभव सिन्हा ने इसी हफ्ते हुई एक बातचीत में भले कहा हो कि इस सीरीज की कोई राजनीतिक अंतर्धारा नहीं है। लेकिन, सीरीज देखने से पता चलता है कि सत्य ये है नहीं। सहयोगी दलों के समर्थन से प्रधानमंत्री बने अटल बिहारी वाजपेयी की दिल्ली में सरकार है। कारगिल युद्ध जीतने का शोर अभी थमा नहीं है। परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान की सत्ता हथिया चुके हैं। मसूद अजहर को छुड़ाने की योजना बनती है। रॉ का नेपाल में सक्रिय एजेंट जो कुछ वहां से भेज रहा है, उसे दिल्ली वाले पढ़ ही नहीं रहे हैं और हफ्ते भर चला एक विमान के अपहरण का तमाशा शुरू हो जाता है। सीरीज को बनाने का नजरिया बिल्कुल किसी ऐसे पत्रकार सरीखा है जो सामने दिख रहे घटनाक्रम के आगे-पीछे, दाएं-बाएं के कारणों की तफ्तीश में ज्यादा दिलचस्पी लेता है। वेब सीरीज ‘आईसी 814 द कंधार हाईजैक’ को भी अनुभव ने बनाया वैसे ही है। काठमांडू से दिल्ली के लिए उड़े विमान के भीतर जो कुछ हो रहा है, वह तो सीरीज का विषय है ही लेकिन ज्यादा दिलचस्प घटनाक्रम इस सीरीज में वे हैं जो दिल्ली, पाकिस्तान, दुबई और काबुल में विमान के बाहर घट रहे हैं।

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IC 814 The Kandhar Hijack Review by Pankaj Shukla Netflix India MatchBox Benaras Mediaworks Anubhav Sinha
'आईसी 814 द कंधार हाईजैक' वेब सीरीज रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

बेगुनाहों की जान लेना जिहाद नहीं

दुबई एटीसी में अपने पीछे खड़े शेख से हिम्मत पाकर पाकिस्तानी ऑपरेटर जब अपहरणकर्ताओं को एक आयत सुनाकर बताता है कि एक बेगुनाह की जान लेना कैसे पूरी इंसानियत की जान लेने के बराबर है, तो वह दृश्य आपको भीतर तक कचोट जाता है। या फिर, वह दृश्य जब क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की मीटिंग के हाशिये पर एक अधिकारी कहता है कि सारे काम रूल से थोड़े ही होते हैं और बगल में खड़ा अफसर सिगरेट निकाल लेता है। रूल तोड़ने की तरफदारी कर रहा अफसर घूरता है। दूसरा अफसर सिगरेट सहेज लेता है। एक अखबार है कोई इंडिया हेडलाइंस के नाम का। वहां जमीनी खबर रखने वाली एक रिपोर्टर का अपने संपादक से मोर्चा खुला हुआ है। संपादक की निष्ठाएं कहीं और हैं। रिपोर्टर की निष्ठा उसका अखबार और अखबार के पाठक हैं। वेब सीरीज ‘आईसी 814 द कंधार हाईजैक’ को देखते समय आप सिर्फ एक और अपराध सीरीज नहीं देख रहे होते हैं। आप साल 1999 के दिसंबर में ठीक क्रिसमस से पहले के देश के पूरे हालात को समझ रहे होते हैं।

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'आईसी 814 द कंधार हाईजैक' वेब सीरीज रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

मजबूत प्रधानमंत्री की जरूरत समझाती सीरीज

वेब सीरीज ‘आईसी 814 द कंधार हाईजैक’ की कहानी 24 दिसंबर 1999 को काठमांडू विमानअड्डे से उड़े एयर इंडिया के जहाज से शुरू होती है। यहां सीरीज देखते समय ध्यान रखें कि उस समय देश में वाजपेयी सरकार है। पंजाब में प्रकाश सिंह बादल मुख्यमंत्री हैं। लाल कृष्ण आडवाणी गृहमंत्री हैं। जसवंत सिंह विदेश मंत्री हैं। अब सीरीज आपको समझ आनी शुरू हो जाएगी। समझ में आना ये भी शुरू हो जाएगा कि सीरीज की सियासी अंतर्धारा क्या है। क्यों पीएमओ का फोन नहीं उठ पाने से इस विमान में मौजूद अपहरणकर्ताओं के खिलाफ अमृतसर हवाई अड्डे पर कार्रवाई नहीं हो पाई? क्यों टेलीविजन पर ये कहने के बावजूद कि भारत अपहरणकर्ताओं से कोई बातचीत नहीं करेगा, देश के प्रधानमंत्री को अपना रुख बदलना पड़ा और बात उन दुर्दांत आतंकवादियों की रिहाई तक पहुंच गई जिन्होंने आने वाले बरसों में देश की छाती पर लगातार मूंग दली।

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'आईसी 814 द कंधार हाईजैक' वेब सीरीज रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अनुभव सिन्हा का धमाकेदार ओटीटी डेब्यू

निर्देशक अनुभव सिन्हा को इस सीरीज के निर्देशन में नेटफ्लिक्स के न्यौते पर शामिल किया गया और अनुभव ने यहां दिखाया है कि उनका सिनेमा उसी धार में है जिसमें वह ‘मुल्क’, ‘आर्टिकल 15’ और ‘अनेक’ से होता हुआ ‘भीड़’ तक आया। वेब सीरीज ‘आईसी 814 द कंधार हाईजैक’ में अनुभव ने अपनी शॉट टेकिंग, शॉट कटिंग और फिल्ममेकिंग की तकनीकी निपुणताओं को पहली बार अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाया है। जिन लोगों ने भी अनुभव की शाहरुख खान के साथ बनी फिल्म ‘रा: वन’ देखी है, उन्हें उनकी विजुअल इफेक्ट्स की मास्टरी का भी अंदाजा है और वेब सीरीज ‘आईसी 814 द कंधार हाईजैक’ एक तरह से ‘मुल्क’ से पहले के अनुभव सिन्हा का ‘मुल्क’ के बाद वाले अनुभव सिन्हा से हुआ अनोखा संगम है। सीरीज की कहानी चूंकि अधिकतर दर्शकों को पहले से पता है, उस चुनौती के बीच भी अनुभव ने ये सीरीज चूल्हे पर चढ़े अदहन में धीमी आंच पर पकती दाल जैसी बनाए रखी है। और, इसमें उनका बखूबी साथ दिया है उनकी टीम ने।

IC 814 The Kandhar Hijack Review by Pankaj Shukla Netflix India MatchBox Benaras Mediaworks Anubhav Sinha
'आईसी 814 द कंधार हाईजैक' वेब सीरीज रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

ड्यूटी पर फौजी से मुस्तैद सितारे

वेब सीरीज ‘आईसी 814 द कंधार हाईजैक’ में इतने सारे काबिल कलाकार एक साथ हैं कि किसी एक की तारीफ करने से दूसरे की तारीफ अगर छूटी तो मामला बिगड़ सकता है। सबने अपना काम बहुत ही सलीके से किया है। कहानी विमान अपहरण की है और इस पूरे हाइजैक में सबसे ज्यादा मानसिक तनाव और आलोचनाएं विमान के पायलट देवी शंकर शरण ने झेली थीं लिहाजा, उनका किरदार निभा रहे विजय वर्मा पर दर्शकों की निगाहें लगातार टिकी रहती हैं। विजय वर्मा ने अरसे बाद फरमे से बाहर आकर अपने अभिनय को किरदार के हिसाब से सजाने की कोशिश की है। किरदार में खो जाने की उनके भीतर कमाल की खूबी है जिसे वह तब भूल जाते हैं, जब निर्देशक अच्छा रिंग मास्टर न हो। यहां निर्देशक का अनुभव उनके काम आया है। तकनीकी रूप से भी सीरीज अच्छी बन पड़ी है। एक खास तरह के रंग में कहानी कहने का विदेशी अंदाज यहां भी अनुभव ले आए हैं। उनके साथ अच्छी खासी विदेशी तकनीकी फौज यहां हैं। और, इसका फर्क कहानी कहने के अंदाज से लेकर सीरीज की सिनेमैटोग्राफी और इसके बैकग्राउंड म्यूजिक पर नजर आता है। सीरीज बिंज वॉच करने लायक है। इतिहास के भूगोल और विज्ञान में अगर रूचि है तो इसे देखिएगा जरूर।  

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