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सेक्स कॉमेडी फिल्मों के शौकीन लोगों के लिए है 'हंटर'
रवि बुले/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 20 Mar 2015 11:12 AM IST
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यह विडंबनाओं से भरा समय है। एक तरफ महिलाओं पर यौन हमले बढ़ रहे हैं और तख्तियां तथा मोमबत्तियां लेकर जुलूस निकल रहे हैं कि लड़कों को लड़कियों की तरफ सम्मान से देखना सिखाया जाए।
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दूसरी तरफ बॉलीवुड में ऐसी फिल्में लगातार बन और सफल हो रही हैं, जिनमें स्त्रियां बलात्कारियों/हत्यारों के निशाने पर हैं। हाल की एक सफल फिल्म में हीरो को विलेन की प्रेमिका का रेप करते और दूसरी में एक सयानी महिला को अपनी कमसिन बेटी की हत्या करवाते दिखाया गया। 'हंटर' के नायक की आंखों में भी आपको महिलाओं के लिए सिर्फ ‘भूख’ दिखेगी।
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खैर, अगर आपको पोस्टर देख कर सिनेमाघर में जाने की आदत है तो यहां धोखा खाएंगे क्योंकि हंटर के अश्लील संकेतों वाले पोस्टरों पर जैसा कुछ मौजूद है, वह आपको पर्दे पर नहीं दिखेगा। यहां आप पाएंगे एक ऐसे युवक की कहानी जो लगातार अलग-अलग लड़कियों के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए आतुर है। वह इसके मौके तलाशता है।
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स्कूल-कॉलेज से लेकर हॉस्टल और अड़ोस-पड़ोस तक में। जहां चाह वहां राह जैसी प्रेरक कहावत इस हीरो को भी कामयाब बनाती है और वह इच्छित शिकार को सदा हासिल करता है। फिल्म में आप पाएंगे कि किशोरवय में प्रवेश करते ही लड़कों में लड़कियों के लिए ‘हवस’ पैदा हो जाती है!
हीरो और रिश्ते में उसके दो भाई जब बढ़ती उम्र में छुट्टियों में मिलते हैं, तो सिर्फ सेक्स तथा लड़कियों की बातें करते हैं। इसके अलावा जैसे उनका कोई संसार ही नहीं!
हंटर के नायक मंदार (गुलशन देवैया) के जीवन में एक के बाद एक लड़कियां आती हैं। विवाहित स्त्रियां भी उस पर न्यौछावर हैं। मंदार ‘वासु’ है। उसकी मातृभाषा मराठी है।
मराठी में ‘वास’ का अर्थ होता है गंध। इस तरह फिल्म का नायक गंध से ही स्त्री के तन-मन की हालत पहचान लेता है। परंतु एक वक्त ऐसा आता है जब माता-पिता के दबाव में वह विवाह के लिए राजी होता है और जिस लड़की (राधिका आप्टे) से शादी की बातचीत के लिए मिलता है, उससे प्यार कर बैठता है।
मगर मुश्किल यह है कि लड़की की नजर में वह सीधा-साधा है। लड़की अति-आधुनिक है। उसका अतीत है। उसके बॉयफ्रेंड रहे हैं, वह लिव-इन रिलेशनशिप में रही है। एक बार वह गर्भपात भी करा चुकी है। उसे लगता है कि दूध का धुला मंदार कैसे इन बातों को नजरअंदाज करके, उसे जीवनसंगिनी बना सकता है!
फिल्म की कहानी शुरू से अंत तक यौन संकेतों और यौन संदर्भों से भरी है। हालांकि वे सभी हल्के-फुल्के कॉमिक ढंग से आते हैं। हंटर कभी वर्तमान में रहती है तो कभी समय के अलग-अलग जोन में पीछे जाती है। अतः उसके साथ तालमेल बैठाना आपकी जिम्मेदारी बन जाता है।
आप सेक्स कॉमेडी फिल्मों के शौकीन हैं और एक शिकारी आपके भीतर भी छुपा बैठा है तो जरूर इस फिल्म को देख सकते हैं। मगर बहुत ज्यादा उम्मीद लेकर न जाएं। फिल्म एक समय के बाद रबर की तरह खिंच कर ढीली हो जाती है। कई दृश्यों और बातों के इसमें दोहराव हैं।