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Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Hamare Baarah Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Annu Kapoor Paritosh Tripathi Rahul Bagga Kamal Chandra

Hamare Baarah Review: सनसनी की सोच में डूबा सामयिक सोशल ड्रामा, जिनके लिए बनी उन्हीं के खिलाफ हो गई फिल्म

Fri, 21 Jun 2024 02:11 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 21 Jun 2024 02:11 PM IST
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Hamare Baarah Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Annu Kapoor Paritosh Tripathi Rahul Bagga Kamal Chandra
हमारे बारह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Movie Review
हमारे बारह
कलाकार
अन्नू कपूर , इशलिन प्रसाद , अदिति भटपहरी , अश्विनी कलसेकर , मनोज जोशी , राहुल बग्गा , परितोष त्रिपाठी और पार्थ समथान आदि
लेखक
राजन अग्रवाल , कमल चंद्रा , पीयूष सिंह और सूफी खान
निर्देशक
कलम चंद्रा
निर्माता
रवि एस गुप्ता , बीरेंद्र भगत , संजय नागपाल और शिव बालक सिंह
रिलीज:
21 जून 2024
रेटिंग
2/5

देश की आबादी 140 करोड़ के पार हो चुकी है। आबादी के मामले में हमने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में बड़े परिवारों को लेकर आबादी का एक खास हिस्सा नेताओं के निशाने पर भी रहा। फिल्म ‘हमारे बारह’ भी बनी इसी चुनावी एजेंडा को लेकर थी, लेकिन पहले सेंसर बोर्ड और फिर बॉम्बे हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक फिल्म को लेकर चली सुनवाइयों ने इसके निर्माताओं को शीर्षासन कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। फिल्म के चारों निर्माताओं की सोच बिल्कुल साफ है। उनको इस फिल्म से सनसनी बनानी थी और बीते महीने भर से इस फिल्म को लेकर बनी सुर्खियों से ये साफ भी है कि वे अपने मकसद में सफल रहे। लेकिन, फिल्म? फिल्म उनकी इसी सनसनी वाली सोच मे डूब गई है। एक अच्छी कहानी ने ओवरएक्टिंग और खराब निर्देशन के चलते इस दौर की एक बेहतरीन मुस्लिम सोशल ड्रामा फिल्म बनने का मौका खो दिया।

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Hamare Baarah Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Annu Kapoor Paritosh Tripathi Rahul Bagga Kamal Chandra
हमारे बारह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सोशल ड्रामा बनने की टूटी उम्मीद
हिंदी सिनेमा में मुस्लिम सोशल ड्रामा का एक इतना अच्छा दौर रहा है कि हर दौर के हर बड़े सितारे ने इन फिल्मों में काम जरूर किया। ‘मुगले आजम’ से लेकर ‘चौदहवीं का चांद’, ‘मेरे हुजूर’, ‘महबूब की मेहंदी’, ‘एक नजर’, ‘निकाह’, ‘तवायफ’, ‘सनम बेवफा’ और ‘वीर जारा’ तक देश के अलग अलग कालखंडों में मुस्लिम महिलाओं की जिंदगी में बदलती रवायतों की कहानियां पर फिल्में खूब बनीं और खूब चलीं भी। नेटफ्लिक्स पर रिलीज सीरीज ‘हीरामंडी’ की सफलता का राज भी यही है। देश की एक बड़ी आबादी अब भी इस तरह की फिल्मों पर जान छिड़कती है और जब ये कमी मुंबइया सिनेमा पूरा नहीं कर पाता है तो ये आबादी पाकिस्तानी धारावाहिकों पर अपने दिन रात निछावर करती है। इस लिहाज से फिल्म ‘हमारे बारह’ ने अपने कालखंड का एक दस्तावेज बन सकने का मौका खो दिया है।

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Hamare Baarah Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Annu Kapoor Paritosh Tripathi Rahul Bagga Kamal Chandra
हमारे बारह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कहानी बहुविवाह और ज्यादा बच्चों की
एक उम्रदराज कव्वाल अपनी बेटी की उम्र की लड़की से दूसरी शादी करता है। उसके साथ हमबिस्तर होने के दौरान गर्भ निरोधक का प्रयोग नहीं करता है। उसकी पहली बीवी की बेटी अपनी सौतेली मां की जान बचाने के लिए गर्भपात की गुहार लगाती है। लगातार औलादें पैदा करते रहने की उसकी जिद का मामला अदालत में पहुंचता है। इस बेटी को ये दूसरी मां अपनी सहेली मानती हैं। दोनों में खूब निभती भी है। बेटी बागी है। सही गलत में फर्क जानती है। घर का एक बेटा भी अपने अब्बू की मुखालिफत में है। दूसरा बेटा कव्वाली में अपना भविष्य देख रहा है और अपनी बेटी व बीवी से दूर हो चुका है। वह भी अपने अब्बा के कहने पर। फिल्म ‘हमारे बारह’ एक बहुत ही संजीदा विषय पर बनी फिल्म है। इस फिल्म से ज्यादा गंभीर मसले पाकिस्तानी धारावाहिकों में उठाए जाते रहे हैं, लेकिन कहीं कोई फसाद और बवाल उन पर भी इसलिए नहीं होता क्योंकि दुनिया भर में मुस्लिम आबादी का एक बड़ा तबका तरक्कीपसंद है और वह खुद को बदल भी रहा है।
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Hamare Baarah Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Annu Kapoor Paritosh Tripathi Rahul Bagga Kamal Chandra
हमारे बारह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कमल चंद्रा का बेहद कमजोर निर्देशन
फिल्म ‘हमारे बारह’ में एक किस्सा म्यूजिक रियलिटी शो का भी है जिसमें बेटी के हिस्सा लेने की कोशिशों पर वह बाप आसमान सिर पर उठा लेता है जिसकी रोजी रोटी खुद कव्वाली गाने से चल रही है। दूसरी बेटी शायरा है, उसके लिखे अशआर बाप अपनी कव्वालियों में शबनम के नाम से पढ़ रहा है। कहानी का ताना बाना बहुत शानदार है। पटकथा लिखी भी कुछ यूं गई है कि मूल कहानी पर फोकस रखते हुए इसकी सहयोगी कहानियां दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब रहती हैं। फिल्म पटरी से उतरती है अपने संवादों को लेकर। अन्नू कपूर को उर्दू का अच्छा ज्ञान है। लिहाजा अपने किरदार को परदे पर जीवंत कर देने की जिद में उन्होंने इसके संवादों में खासी तब्दीलियां कराई दिखती हैं। शूटिंग के दौरान निर्देशक पर हावी होने की कोशिश करते रहने का उनका शौक पुराना है और कमल चंद्रा उनके सामने यहां दंडवत होते भी नजर आते हैं। अन्नू कपूर अदाकारी के शेर भले हों लेकिन उनको साधना बहुत मुश्किल भी नहीं है बशर्ते निर्देशक अपनी कला का पक्का हो।

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हमारे बारह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कार्टून बनकर रह गए महिला किरदार
फिल्म ‘हमारे बारह’ की इसी कहानी और इसी पटकथा को अगर संजीदगी से एक बेहतर निर्देशक और कुछ उम्दा महिला कलाकारों के साथ बनाया गया होता तो ये इस साल की अवार्ड विनिंग फिल्म हो सकती थी। फिल्म के मुख्य महिला कलाकारों में अश्विनी कलसेकर को छोड़कर और किसी के अभिनय में वह दम नहीं है जो दर्शकों को बांध कर रख सके। अश्विनी के चेहरे का रंग रूप भी बार बार बदलता रहता है। उम्र छुपाने की उनकी सारी कोशिशें बेकार जाती हैं। कव्वाल की बेगम बनीं इशलिन प्रसाद भी अपने शौहर बने अन्नू कपूर की तरह ओवर एक्टिंग के जाल में फंसी दिखती हैं। सौतेली मां की जान बचाने की जिद पर अड़ी बेटी के किरदार में अदिति भटपहरी की कोशिशें अच्छी हैं लेकिन उनको सही निर्देशन ही नहीं मिला है। पहली कव्वाली में अपनी अदाकारी से आकर्षित करने वाले दोनों छोटे बच्चों का भी फिल्म में सही उपयोग नहीं हो सका है।

Hamare Baarah Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Annu Kapoor Paritosh Tripathi Rahul Bagga Kamal Chandra
हमारे बारह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
राहुल बग्गा, परितोष और समथान ने बचाई फिल्म
निर्देशक कमल चंद्रा की कमजोरियों से हल्की पड़ी फिल्म ‘हमारे बारह’ को तीन पुरुष कलाकारों ने सहारा देने की पूरी कोशिश की है। रिपोर्टर बने पार्थ समथान के किरदार का हालांकि बहुत विस्तार नहीं है और न ही उनकी बाकी जिंदगी को कहानी में शामिल करने की कोशिश ही हुई है लेकिन उनका परदे पर आना एक तनावभरी कहानी में सुकून लाता है। एक खास धर्म का चेहरा बनाकर अन्नू कपूर को शुरू से एक खास छवि के साथ पूरी फिल्म में पेश किया गया है लेकिन उनकी बात न मानने वाले बेटे के किरदार में राहुल बग्गा ने खासा प्रभावित किया है। परिवार की जरूरत के हर मौके पर मौजूद रहने वाला ये बेटा ही आखिर में अपने बाप को भी आंखें खोलने पर मजबूर कर देता है। दूसरे बेटे के किरदार में परितोष त्रिपाठी ने भी अपना असर छोड़ा है। अपने सख्तमिजाज पिता की परछाई बनने के चक्कर में अपनी बीवी और बेटी को खोने के बाद बदली इस किरदार की शख्सियत को परितोष ने बखूबी जिया है। परितोष ने ये  भी जताता है बंधे बंधाए फर्मे से जब कलाकार बाहर आता है तभी कुछ कमाल कर पाता है। काश! यही बात फिल्म का चारों निर्माताओं के लिए भी कही जा सकती। फिल्म का प्रीमियर कान फिल्म फेस्टिवल में नहीं हुआ है। ये बात अन्नू कपूर भी इन चारों को समझाते रहे हैं, लेकिन फिल्म के पोस्टर पर ये दावा अब तक कायम है। फिल्म की स्क्रीनिंग कान फिल्म फेस्टिवल के दौरान लगे फिल्म बाजार में हुई थी।
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