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Ghar Ki Murgi Review: गृह लक्ष्मी को घर की मुर्गी बना देने वालों पर अश्विनी का सीधा और सटीक निशाना

पंकज शुक्ल, मुंबई Published by: प्रतीक्षा राणावत Updated Sat, 07 Mar 2020 04:53 PM IST
सार

  • साक्षी तंवर अभिनीत शॉर्ट फिल्म 'घर की मुर्गी' 8 मार्च को ओटीटी सोनी लिव पर रिलीज होगी।
  • नितेश तिवारी और अश्विनी अय्यर की मिली जुली पेशकश है ये शॉर्ट फिल्म।
  • 19 मिनट की ये फिल्म बहुत बड़ा सवाल उठाती है और वो ये कि घर में काम करने वाली गृहणी क्या है? क्या घर की मुर्गी?

घर की मुर्गी
घर की मुर्गी - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
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विस्तार

डिजिटल रिव्यू: घर की मुर्गी (शॉर्ट फिल्म)


कलाकार : साक्षी तंवर, अनुराग अरोड़ा, माही बर्मन, कबीर खन्ना, अनुराधा कालिया और संजीव चोपड़ा आदि।
निर्देशक: अश्विनी अय्यर तिवारी
कथा-पटकथा: नितेश तिवारी
ओटीटी: सोनी लिव
रेटिंग: ***1/2


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की खास पेशकश है, घर की मुर्गी। दंगल व छिछोरे जैसी फिल्में बनाने वाले नितेश तिवारी और निल बटे सन्नाटा, बरेली की बर्फी व पंगा जैसी फिल्में बनाने वाली अश्विनी अय्यर की मिली जुली पेशकश है ये शॉर्ट फिल्म। करीब 19 मिनट की ये फिल्म बहुत बड़ा सवाल उठाती है और वो ये कि घर में काम करने वाली गृहणी क्या है? क्या घर की मुर्गी? जिसकी कोई कभी कद्र नहीं करता।

'घर की मुर्गी' कहानी है एक परिवार की। ये परिवार देश का कोई भी परिवार हो सकता है। बच्चों को कभी उनकी पसंद का तो कभी उनकी नापसंद का नाश्ता खिलाने वाली गृहणी स्कूल की वैन के लिए भागती है। दूध लेने के लिए भागती है। सास की मालिश करने भागती है। ससुर को टहलाने के लिए भागती है। फिर रात को बच्चों का होमवर्क। पति के ताने और गुडनाइट। यही नहीं इस सबके बीच वह अपना छोटा सा ब्यूटी पार्लर चलाकर अतिरिक्त आमदनी भी घर लाती है। लेकिन, किसी को उसकी कद्र नहीं। सब उसे घर की मुर्गी समझते हैं। लेकिन, तब तक जब तक कि ये 'मुर्गी' गोवा जाकर महीने भर की छुट्टी का प्लान नहीं बना लेती।




फिल्म घर की मुर्गी में इस गृहणी का किरदार साक्षी तंवर ने निभाया है। कहानी घर घर की से लेकर दंगल तक साक्षी ने मनोरंजन की दुनिया का हर अखाड़ा जीता है। वह स्वाभाविक अभिनय करती हैं। अनुराग, माही और कबीर उनके इस अभिनय को अपने-अपने किरदारों से निखारते हैं। अश्विनी यहां एक बात कहना चाहती हैं। नितेश के गढ़े दृश्य इसमें उनकी मदद करते हैं।

छोटी सी फिल्म में एक बड़ी बात को कह जाने का ये अश्विनी का अपना हुनर है। फिल्म कोई भाषण नहीं देती। ज्यादा ज्ञान नहीं बघारती। अश्विनी बस एक रोजमर्रा की जिंदगी को घर का कामकाज संभालने वाली गृहणी के नजरिए से दर्शकों के सामने रख देती हैं। जाहिर है कि पुराने घाव को ठीक करने के लिए उसे कुरेदना भी होता है और जरूरत पड़े तो टिंचर भी डालना होता है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर फिल्म घर की मुर्गी ऐसी कुनैन की गोली है, जिसे हर पति, बच्चे और सास-ससुर को जरूर लेना चाहिए। घर की महिलाएं भी देख सकती हैं, बिना मन में 'घर की मुर्गी' का अपराध बोध लिए, जाइए गोवा आपका भी इंतजार कर रहा है। फिल्म 8 मार्च को ओटीटी सोनी लिव पर रिलीज हो रही है।

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