फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Review ›   film review of mardani

आपको निराश नहीं करेगी रानी की मर्दानगी

Fri, 22 Aug 2014 02:41 PM IST
Updated Fri, 22 Aug 2014 02:41 PM IST
विज्ञापन
film review of mardani

मर्द पुलिसवाले आपने पर्दे पर बहुत देखे हैं, अब देखिए मर्दानी। मुंबई में क्राइम ब्रांच की सीनियर इंस्पेक्टर शिवानी शिवाजी रॉय। रानी मुखर्जी लंबे समय बाद आई हैं और फिल्म सीधे तौर पर उन्हें की बाजार में फिर स्थापित करने के लिए बनाई गई है। ऐसे में आप रानी के फैन हैं तो ‘मर्दानी’ जरूर देखें।

विज्ञापन


फिल्म में बच्चों, खास तौर पर लड़कियों की तस्करी के मामले को केंद्र में रखा गया है। फिल्म ‘हार्ट हिटिंग’ है। लेकिन सच्चाई के नजदीक दिखने की कोशिश में इसका ज्यादा जोर ‘च’ अक्षर वाले शब्द को बार-बार दोहराने और रानी को ऐक्शन हीरोइन के रूप में स्थापित करने का है।
विज्ञापन


यही कारण है कि पहली बार चोपड़ा कैंप सेंसर बोर्ड से यू या फिर यू/ए प्रमाण पत्र हासिल नहीं कर सका। यह एडल्ट फिल्म है और 18 वर्ष से कम आयु वालों के लिए कतई नहीं है। अगर आप परिवार के साथ फिल्म देखने की योजना बना रहे हैं तो इरादा बदल दें।
विज्ञापन
विज्ञापन

कई दृश्य चौंकाते हैं

film review of mardani

इन दिनों जब निर्देशक एडल्ट कंटेंट का सिनेमा बनाते हैं तो उनका आग्रह उसे ज्यादा से ज्यादा खुल कर दिखाने का होता है। कुछ महीने पहले निर्देशक नागेश कुकनूर ने लड़कियों की तस्करी के विषय वाली फिल्म ‘लक्ष्मी’ में यही किया था। अब प्रदीप सरकार भी इसी दिशा में आगे बढ़े हैं।

उन्होंने फिल्म में वेश्यावृत्ति के पेशे में उतारी जाने वाले लड़कियों के ऐसे सीन दिखाए हैं जो चौंकाते हैं। सवाल उठता है कि क्या निर्देशक का ध्यान फिल्म के माध्यम से कोई ठोस संदेश देने से ज्यादा ऐसे दृश्य दिखा कर बॉक्स ऑफिस पर हिट होना है?

नागेश बहुत बोल्ड फिल्म बनाने के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप थे। प्रदीप सरकार की फिल्म पर पकड़ जरूर है, लेकिन कहानी में कुछ सिरे ढीले छूट जाते हैं। फिल्म में ‘चूहों को घर में पनाह देने से प्लेग फैलता है’ जैसे संवाद निराश करते हैं।

रानी के लिए एक्‍शन के मौके

film review of mardani

फिल्म शिवानी रॉय की कहानी है। जो डॉक्टर पति के साथ रहती है। दोनों के साथ उनकी दस-बारह साल की भांजी भी रहती है। जिसकी दोस्त है ट्रेफिक सिग्नल पर फूल बेचने वाली हमउम्र प्यारी। शिवानी उसे भी बेटी की तरह मानती है।

एक दिन प्यारी गायब हो जाती है। शिवानी प्यारी तलाश में है। उसे पता चलता है कि लड़कियों को उठा लेने वाला एक गैंग मुंबई से दिल्ली तक सक्रिय है। वह गैंग के सफाए में लग जाती है। इस बीच शिवानी और गैंग लीडर करन रस्तोगी (ताहिर भसीन) के बीच चूहे-बिल्ली की दौड़ चलती है। अंत में जीत किसकी होती है यह कहने की जरूरत नहीं।

पूरा हो जाता है मिशन

film review of mardani

रानी मुखर्जी ने अच्छा अभिनय किया है और पूरी फिल्म को अपने कंधों पर लेकर चली हैं। जबकि ताहिर भसीन अपने रोल में खरे उतरे हैं। फिल्म ‘मिस लवली’ में दर्शकों के दिमाग पर छा जाने वाले अनिल जॉर्ज ताहिर के पिता के रूप में फिर प्रभाव छोड़ते हैं। फिल्म को खूबसूरती से शूट किया गया है।

तेज रफ्तार और कसी हुई इस फिल्म में गीत-संगीत की जगह नहीं थी। निर्देशक ने इस बात से न्याय किया। अंत में जब मर्दानी अपना मिशन पूरा करके निकलती है तभी उसकी तारीफ में एक गीत बजता है। एक बार इस फिल्म को देखा जा सकता है। अगर यह आपको बहुत अच्छी नहीं लगेगी, तब भी निराश नहीं करेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें Entertainment News से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे Bollywood News, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट Hollywood News और Movie Reviews आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed