किस किस को प्यार करूं समीक्षा: बाबाजी का ठुल्लू
-निर्माताः रतन जैन
-निर्देशकः अब्बास-मुस्तन
-सितारेः कपिल शर्मा, वरुण शर्मा, मंजरी फड़नीस, सिमरन कौर मुंडी, सई लोकुर, एली अवराम, अरबाज खान, शरद सक्सेना, सुप्रिया पाठक
रेटिंग **
शादी अपने आप नहीं चलती बल्कि बड़ी कोशिशों से चलाई जाती है। शादीशुदा लोग यह बात जानते हैं और जिनकी शादी नहीं हुई उन्हें जाननी चाहिए। किस किस को प्यार करूं को सच ना मानें। यह सिर्फ एक कॉमिक फंतासी है, जिसमें एक आदमी की तीन शादियां हो जाती हैं और किसी को पता तक नहीं चलता कि वे कैसे आराम से चल रही हैं!
कुमार एसआरके उर्फ शिव राम कृष्णन (कपिल शर्मा) की तीन शादियां उन हादसों में होती हैं, जिनमें वह लड़कियों को मुश्किलों से निकालता है। चूंकि मां ने कहा कि बेटा किसी लड़की का दिल और घर नहीं तोड़ना तो वह तीनों का साथ निभाए चला जा रहा है।
लेकिन उसका दिल धड़कता है दीपिका (एली अवराम) के लिए। एसआरके को लगता है कि तीनों शादियां उसने मर्जी से तो की नहीं, ऐसे में एक मन की करी ही जा सकती है! एसआरके का वकील दोस्त (वरुण शर्मा) फिल्म का एंकर है। वह न केवल एसआरके को मुश्किलों से निकालता है बल्कि उसकी कहानी आपको सुनाते चलता है।
वक्त है और दिमाग सिनेमा हॉल से बाहर रखने का मन है तो देखने जाएं
किस किस को प्यार करूं ऐसी फिल्म नहीं है कि जिसके बारे में सोचें कि देखूं या ना देखूं। अगर आपके पास वक्त है और दिमाग सिनेमा हॉल से बाहर रखने का मन है तो देखें। वर्ना फिल्म आपके लिए हादसा साबित हो सकती है।
देख कर सिनेमाघर से निकलेंगे और कोई आपको पूछेगा कि क्या मिला तो मुंह से सहज ही जवाब निकलेगा, बाबाजी का ठुल्लू। कारण यह कि कपिल शर्मा यहां अपने कॉमेडी शो से अलग और आगे नहीं हैं। उनका अंदाज वही है।
ऊंचे पैमाने रखेंगे तो कपिल निराश करेंगे। ऐसे में कहा जा सकता है कि सिर्फ कॉमेडी नाइट्स के फैन ही इस फिल्म से संतुष्ट होंगे। हां, नायिका एक भी प्रभावित नहीं करती। सबके डायलॉग एक जैसे लगते हैं।
असर छोड़ते हैं तो अरबाज खान और शरद सक्सेना। दोनों जब जब पर्दे पर आते हैं फिल्म की एकरसता को भंग करते हैं। वरुण भी अपनी भूमिका में जमे हैं। डीजे बजेगा तो पप्पू नचेगा जैसा एकाध गीत ही ठीक लगता है, परंतु वह भी तब बजता है जब फिल्म खत्म हो जाती है और आप बाहर निकल रहे होते हैं।
सामान्य स्तर की है ऐक्टिंग और कॉमेडी
किस किस को प्यार करूं जैसी शादी के चक्कर को मजाक बनाने वाली फिल्में (नो एंट्री, गरम मसाला, मैंने प्यार क्यों किया, वेलकम 1-2) आप पहले भी देख चुके हैं। सितारों, ऐक्टिंग और कॉमेडी के स्तर पर किस किस को प्यार करूं को उनसे बीस नहीं कह सकते।
निर्देशक के रूप में अब्बास-मुस्तन का नाम न आए तो फिल्म देख कर आप विश्वास नहीं करेंगे कि फिल्म उन्होंने डायरेक्ट की है। उत्तर भारत और पंजाब में खास तौर पर सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में इस फिल्म से निर्माता उम्मीद कर सकते हैं। इसके अलावा फिल्म बाकी जगहों पर हादसा भी साबित हो सकती है।