{"_id":"572317434f1c1b0679a91551","slug":"film-review-baaghi","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"फिल्म समीक्षा बागी: श्रद्धा कपूर लेकर आई हैं बासी माल ","category":{"title":"Movie Review","title_hn":"फिल्म समीक्षा","slug":"movie-review"}}
फिल्म समीक्षा बागी: श्रद्धा कपूर लेकर आई हैं बासी माल
रवि बुले/अमर उजाला, मुंबई
Updated Fri, 29 Apr 2016 02:02 PM IST
सार
- -निर्माताः यूटीवी/साजिद नाडियाडवाला
- -निर्देशकः सब्बीर खान
- -सितारेः टाइगर श्रॉफ, श्रद्धा कपूर, सुधीर बाबू, सुनील ग्रोवर
- रेटिंग *
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
-यह तथाकथित नई रामायण है जिसमें रावण का नाम राघव है। वह सिया यानी सीता का अपहरण करता है। यहां राम की जगह मौजूद है, रॉनी। राघव कहता है कि इस रामायण में राम को मरना पड़ेगा। आश्चर्य कि यह निर्माता-निर्देशक द्वारा जानबूझ कर किया गया ‘खेल’ है या फिर इसे नई रचनात्मकता कहना पड़ेगा!
क्या हिंदुओं के अतिरिक्त किसी अन्य के धर्मग्रंथों/प्रतीकों/आराध्यों से ऐसी छेड़छाड़ की हिम्मत दिखाई जा सकती है? वैसे रचने वाले तर्क दे सकते हैं कि नाम में क्या रखा है? आप तो फिल्म देखिए। मगर सच्चाई यह है कि इस फिल्म में देखने जैसा कुछ नहीं है।
दशकों पुरानी घिसी-पिटी कहानी से क्या नए दर्शकों को फुसलाया जा सकता है? शर्मनाक तो यह है कि पुराने को नए सिरे से रचने में भी कोई मौलिकता नहीं दिखाई गई है।
विज्ञापन
बागी 2004 की तेलुगु फिल्म वर्षम और इंडोनेशियाई थ्रिलर द रेडः रिडंपशन का मिक्स है। हीरो-हीरोइन के प्रेम का प्रसंग वर्षम से लिया गया है कि लड़की (श्रद्धा कपूर) को उसका पिता फिल्म हीरोइन बनाता है और जब सचमुच का विलेन (सुधीर बाबू) उसे उठा लेता है तो वह हीरो (टाइगर श्रॉफ) से मदद लेता है।
विज्ञापन
क्या हिंदुओं के अतिरिक्त किसी अन्य के धर्मग्रंथों/प्रतीकों/आराध्यों से ऐसी छेड़छाड़ की हिम्मत दिखाई जा सकती है? वैसे रचने वाले तर्क दे सकते हैं कि नाम में क्या रखा है? आप तो फिल्म देखिए। मगर सच्चाई यह है कि इस फिल्म में देखने जैसा कुछ नहीं है।
विज्ञापन
दशकों पुरानी घिसी-पिटी कहानी से क्या नए दर्शकों को फुसलाया जा सकता है? शर्मनाक तो यह है कि पुराने को नए सिरे से रचने में भी कोई मौलिकता नहीं दिखाई गई है।
विज्ञापन
बागी 2004 की तेलुगु फिल्म वर्षम और इंडोनेशियाई थ्रिलर द रेडः रिडंपशन का मिक्स है। हीरो-हीरोइन के प्रेम का प्रसंग वर्षम से लिया गया है कि लड़की (श्रद्धा कपूर) को उसका पिता फिल्म हीरोइन बनाता है और जब सचमुच का विलेन (सुधीर बाबू) उसे उठा लेता है तो वह हीरो (टाइगर श्रॉफ) से मदद लेता है।
बागी की सबसे बड़ी समस्या है कि यह है
द रेड के अंदाज में विलेन यहां एक बहुमंजिला इमारत में रहता है (वह भी बैंकॉक में), जिसमें उसकी हत्यारी आर्मी हर मंजिल पर मौजूद है। सबसे ऊपर विलेन ने अपहृत हीरोइन को रखा है। हालांकि जब आप क्लाइमैक्स तक पहुंचते हैं तो आर्मी यानी फौज पचासेक लोगों से ज्यादा की नहीं दिखती!!
विलेन यहां केरल के मार्शल आर्ट कलारीपयट्टु का एक्सपर्ट है। जबकि हीरो विलेन के पिता से यह कला सीखने पहुंचा है। आप पहले से जानते हैं कि चार महीने सीखने वाला हीरो पिट-पिटा कर भी बरसों से प्रवीण विलेन को अंततः धो देगा।
बागी की सबसे बड़ी समस्या है कि यह 2016 की फिल्म होने के बावजूद बरसों बासी दिखती है। अव्वल तो कहानी में नयापन नहीं है। उस पर एक ही फिल्म पुराने टाइगर कई फिल्मों के थके हुए नजर आते हैं। रोमांटिक सीन में वह बिल्कुल अच्छे नहीं लगते। उनके सिर के बाल भी उड़े हुए नजर आते हैं। शायद इससे ध्यान हटाने के लिए उन्होंने फिल्म में अपने बालों को लंबा रखा है।
विलेन यहां केरल के मार्शल आर्ट कलारीपयट्टु का एक्सपर्ट है। जबकि हीरो विलेन के पिता से यह कला सीखने पहुंचा है। आप पहले से जानते हैं कि चार महीने सीखने वाला हीरो पिट-पिटा कर भी बरसों से प्रवीण विलेन को अंततः धो देगा।
बागी की सबसे बड़ी समस्या है कि यह 2016 की फिल्म होने के बावजूद बरसों बासी दिखती है। अव्वल तो कहानी में नयापन नहीं है। उस पर एक ही फिल्म पुराने टाइगर कई फिल्मों के थके हुए नजर आते हैं। रोमांटिक सीन में वह बिल्कुल अच्छे नहीं लगते। उनके सिर के बाल भी उड़े हुए नजर आते हैं। शायद इससे ध्यान हटाने के लिए उन्होंने फिल्म में अपने बालों को लंबा रखा है।
बागी को ऐक्शन फिल्म कह कर प्रचारित किया गया लेकिन...
बागी
नायिका श्रद्धा कपूर के चेहरे की चमक यहां फीकी है। मासूमियत तो अभी उनमें दिखती है लेकिन चंचल-चुलबुलापन कई जगह नकली मालूम पड़ता है। वैसे यह कमी निर्देशक की वजह से है। उन्होंने श्रद्धा की प्रतिभा का सही इस्तेमाल नहीं किया।
बागी को ऐक्शन फिल्म कह कर प्रचारित किया गया। लेकिन आपने अगर एक भी अच्छी हॉलीवुड एक्शन या शाओलिन सीरीज की फिल्म देखी हो तो पाएंगे कि सब्बीर खान ने ताश के पत्तों का महल खड़ा किया है, जो अपने आप ढह जाता है। रस्सियों में बांधकर हीरो और विलेन के एक्शन सीन कंप्यूटर पर तो चमत्कारी बनाए जा सकते हैं लेकिन पर्दे पर असर नहीं छोड़ते।
गीत-संगीत की टीम फिल्म में लंबी है लेकिन एक भी गीत दिल को नहीं छूता। फिल्म में हीरो विलेन के एक चीनी पार्टनर को धोते हुए कहता है कि चीन का माल ज्यादा नहीं चलता। फिल्म का हाल इससे भी बुरा है। बागी का दूसरा नाम पैसा और वक्त की बर्बादी है। यह कहने की जरूत नहीं कि इनका हमेशा सही जगह निवेश करना चाहिए।
बागी को ऐक्शन फिल्म कह कर प्रचारित किया गया। लेकिन आपने अगर एक भी अच्छी हॉलीवुड एक्शन या शाओलिन सीरीज की फिल्म देखी हो तो पाएंगे कि सब्बीर खान ने ताश के पत्तों का महल खड़ा किया है, जो अपने आप ढह जाता है। रस्सियों में बांधकर हीरो और विलेन के एक्शन सीन कंप्यूटर पर तो चमत्कारी बनाए जा सकते हैं लेकिन पर्दे पर असर नहीं छोड़ते।
गीत-संगीत की टीम फिल्म में लंबी है लेकिन एक भी गीत दिल को नहीं छूता। फिल्म में हीरो विलेन के एक चीनी पार्टनर को धोते हुए कहता है कि चीन का माल ज्यादा नहीं चलता। फिल्म का हाल इससे भी बुरा है। बागी का दूसरा नाम पैसा और वक्त की बर्बादी है। यह कहने की जरूत नहीं कि इनका हमेशा सही जगह निवेश करना चाहिए।