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Farzi Review: शाहिद कपूर की अति से याद आए रहीम, प्यादे सों फरजी भयो, टेढ़ो टेढ़ो जाए

Sat, 11 Feb 2023 03:39 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Sat, 11 Feb 2023 03:39 PM IST
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Farzi Review in Hindi by Pankaj Shukla Amazon Prime Video Raj & DK Shahid Kapoor Vijay Sethupathi
फर्जी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
Movie Review
फर्जी
कलाकार
शाहिद कपूर , विजय सेतुपति , के के मेनन , राशि खन्ना , भुवन अरोड़ा और अमोल पालेकर आदि
लेखक
राज और डीके , सीता आर मेनन और सुमन कुमार
निर्देशक
राज और डीके
निर्माता
डी 2 आर फिल्म्स
ओटीटी
अमेजन प्राइम वीडियो
रिलीज डेट
10 फरवरी 2023
रेटिंग
2/5

फिल्म ‘कबीर सिंह’ से बड़े पर्दे पर शाहिद कपूर ने अपना करिश्मा वापस पाया। फिर तीन साल बाद फिल्म ‘जर्सी’ में इसे गंवा भी दिया। उनका रुआब रहा है हिंदी सिनेमा में। अभिनय भी वह अपनी लय में हों तो कमाल का करते हैं। कहने वाले कह सकते हैं कि राज और डीके ने शाहिद कपूर की ‘कबीर सिंह’ के बाद बनी रौनक को वेब सीरीज ‘फर्जी’ में भुनाने की कोशिश की है, लेकिन चर्चा ये भी रही है कि राज और डीके ने शाहिद कपूर की एक क्राइम ड्रामा फिल्म कोई नौ साल पहले ऑफर की थी। बात बनते बिगड़ते और फिर बनते बनते यहां तक पहुंची कि वह फिल्म एक वेब सीरीज जैसी फैल गई और अब ‘फर्जी’ की शक्ल में तकरीबन घंटे, घंटे भर के आठ एपिसोड की शक्ल में प्राइम वीडियो पर है। राज और डीके का ओटीटी पर रौला रहा है। ‘फैमिली मैन’ के दो कमाल के सीजन के बाद उनकी पांचों अंगुलियां घी में हैं। हो ये भी सकता है ‘फैमिली मैन’ के तीसरे सीजन में तिवारी और माइकल साथ मिलकर कुछ बड़ा धमाका भी करें।

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Farzi Review in Hindi by Pankaj Shukla Amazon Prime Video Raj & DK Shahid Kapoor Vijay Sethupathi
फर्जी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

‘फैमिली मैन’ के डीएनए का नया रूप ‘फर्जी
वेब सीरीज ‘फर्जी’ की कहानी का डीएनए कुछ कुछ ‘फैमिली मैन’ जैसा ही है, लेकिन वहां श्रीकांत तिवारी हीरो है, यहां माइकल सेकेंड लीड में है। हीरो जो है वह एंटी हीरो है। नाना उसके क्रांति लाना चाहते हैं। नाती भी क्रांति लाना चाहता है। बस दोनों के रास्ते अलग अलग हो जाते हैं। असली की कद्र इस देश में कुछ लोग ही कर सकते हैं। हर आदमी रेफरेंस के पीछे भाग रहा है। कमाल की नकली पेंटिंग बनाने वाले को अपने हुनर पर हद से ज्यादा भरोसा हो जाता है। नाना की आर्थिक स्थिति वह अपने दोस्त फिरोज के साथ बचपन से कैसे ठीक करता रहा है, इसके जरिये कहानी का आधार इसके लेखक शुरू में ही बना देते हैं। बचपन में जो काम तारीफ के लायक दिखता है, बड़े होकर वही काम ये कानून के खिलाफ जाकर करना शुरू कर देते हैं। कहानी विचार के स्तर पर अच्छी है। बचपन में सताए गए बच्चे बड़े होकर कैसे खुराफाती बन जाते हैं, ये विचार ही अपने आप में अनमोल है, लेकिन इस बड़े बच्चे का रोल अगर शाहिद कपूर को करना हो तो थोड़ा विचार करने की जरूरत होती है।

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फर्जी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

‘फैमिली मैन सीजन 3’ की तैयारी
राज और डीके की नई वेब सीरीज ‘फर्जी’ से उनके अपने बनाए देश प्रेमियों के यूनिवर्स का विस्तार होता दिखता है। कहानी पूरी वही है जो अब्दुर्रहीम खान-ए-खाना उर्फ रहीम ने बरसों पहले लिख दी धी, जो रहीम ओछो बढ़ै, तौ अति ही इतराए। प्यादे सों फरजी भयो, टेढ़ो टेढ़ो जाए। सीरीज शाहिद कपूर के लिए बनी है। शुरू से लेकर शाहिद कपूर ये किरदार करते भी यही ध्यान रखकर हैं कि वे शाहिद कपूर हैं। एक दो भावुक सीन्स को छोड़ दें तो शाहिद कपूर का स्वैग इस सीरीज में उनके किरदार सनी को इतराने की खूब ढील देता है। वेब सीरीज का पूरा खेल ही यही है कि बड़े कलाकारों के नाम पर व्यूज बटोरना। इस सीरीज के भी रिकॉर्ड व्यूज की खबरें जल्द ही सामने आनी शुरू हो जाएंगी। लेकिन, सीरीज देखना खत्म करने के बाद दर्शक के हिस्से खास कुछ इस सीरीज से आता नहीं है। सम सामयिक राजनीति में जाली नोटों के कारोबार की कहानी का कॉकटेल बनाकर राज और डीके ने खुद को ही दोहरा दिया है। और, इसके चलते वेब सीरीज ‘फर्जी’ न तो शाहिद कपूर के अभिनय का कुछ भी अलग कलेवर दर्शकों को परोस पाती है और न ही राज और डीके का रचयिता के तौर पर आभामंडल विस्तारित करती है।

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फर्जी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

‘फर्जी’ को स्मार्ट टीवी पर देखना भी चुनौती
पटकथा के नाम पर पिटी वेब सीरीज ‘फर्जी’ के संवादों पर अलग से शोध किया जा सकता है। प्राइम वीडियो की क्रिएटिव टीम को भी देखना चाहिए कि क्या हिंदी में बनी सीरीज में ये सब इतना ही जरूरी हैं। जब जाली नोटों के कारोबार पर इतना ज्ञान देना ही था तो फिर इसे क्या सिर्फ वयस्कों के लिए बिल्ले के साथ रिलीज करने से ही व्यूज की संख्या बढ़ सकती थी? वेब सीरीज को पैसा देकर देखने वाले अक्सर इन्हें अपने स्मार्ट टीवी पर ही देखते हैं और अगर स्मार्ट टीवी ऑन करने के बाद उसे ब्लूटूथ हेडफोन से जोड़ना पड़े तो देखने का मजा जाता रहता है। ओटीटी वालों को ये समझना भी जरूरी है कि मोबाइल पर सीरीज देखने की आदत डालने में उनका ही नुकसान है क्योंकि फिर टेलीग्राम के चैनल इसके लिए काम आते हैं। कथा, पटकथा और संवाद के स्तर पर प्रभावहीन रही वेब सीरीज ‘फर्जी’ में शाहिद को खूब चमकाने की कोशिश की गई लेकिन आभामंडल विजय सेतुपति का ही यहां बढ़ता दिखा। दक्षिण भारतीय उच्चारण के साथ बोली गई उनकी हिंदी कमाल है। हालांकि शाहिद और विजय के बीच सीधे टकराव के हिंदी फिल्मों जैसे धमाकेदार दृश्य तो फिल्म में नहीं है लेकिन, दर्शकों को चौंकाते रहने की कोशिश राज और डीके ने पूरी की है।

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फर्जी में के के मेनन और राशि खन्ना - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

के के मेनन और राशि खन्ना चमके
वेब सीरीज ‘फर्जी’ में जिन कलाकारों ने बेहतरीन काम किया है, उनमें के के मेनन का नाम अव्वल नंबर पर है। इंसानी फितरत को अपने चेहरों के भावों के जरिये पेश कर देना के के के करिश्मे में शुरू से शामिल रहा है। ओटीटी पर उन्हें अपने अभिनय की रेंज दिखाने का मौका खूब मिल रहा है और वह इसे दोनों हाथों से भुना भी खूब रहे हैं। अमोल पालेकर की मौजूदगी कथा विस्तार की दमक बढ़ाने के लिए है और वह इसमें अपना पूरा योगदान भी देते हैं। राशि खन्ना का किरदार अच्छा गढ़ा गया है। वेब सीरीज ‘रुद्र’ से वह यहां दो कदम आगे बढ़ी हैं। राशि खन्ना अपने किरदार के जरिये जिस तरह का कौतूहल गढ़ती है, वह गौर करने लायक है। उनकी अदाकारी में एक अलग तरह का नैसर्गिक आकर्षण है, और ये आकर्षण ही उन्हें ओटीटी का बेहतरीन कलाकार बनाता है। और, वेब सीरीज ‘फर्जी’ में जिस एक कलाकार ने अपने अभिनय से सबको प्रभावित किया है, वह हैं भुवन अरोड़ा। जब भी वह कहानी से दूर होते हैं, दर्शक उनकी कमी महसूस करने लगते हैं और यही एक कलाकार की सबसे बड़ी जीत है।

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फर्जी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

राज और डीके की ब्रांडिंग का सहारा
‘गो गोवा गॉन’, ‘हैपी एंडिंग’ और ‘ए जेंटलमैन’ में राज और डीके ने बड़े परदे पर खूब प्रयोग किए लेकिन बात इसलिए वहां नहीं बनी क्योंकि वह उन्हें खुद पर जरूरत से ज्यादा भरोसा हो गया था। वेब सीरीज ‘फर्जी’ में भी दोनों वही गलती फिर दोहराते दिख रहे हैं। वह इस सीरीज में कहानी दिखाते कम और बताते ज्यादा है। सिनेमा दिखाने का माध्यम है। उसे हवा महल जैसा रेडियो नाटक बनने से बचाना ही निर्देशक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। प्राइम वीडियो के साथ फायदा ये है कि उसके अधिकतर ग्राहक अमेजन शॉपिंग के लिए बने हैं, स्ट्रीमिंग सर्विस इन ग्राहकों के लिए अतिरिक्त मुनाफा है। यही सीरीज अगर नेटफ्लिक्स पर आई होती तो इसका हाल क्या होता, समझना आसान है। मुश्किल यहां ये है कि शाहिद कपूर और विजय सेतुपति के नाम पर बनी वेब सीरीज ‘फर्जी’ में असल कुछ नहीं है, सब कुछ वही है जो दर्शक शाहिद कपूर की फिल्मों और राज, डीके की सीरीज में पहले ही देख चुके हैं।

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