Eternals Review: लौट आया बड़े परदे का जादू, सनातन धर्म की एमसीयू के चश्मे से दिलचस्प व्याख्या
धर्म की जय हो। अधर्म का नाश हो। प्राणियों में सद्भावना हो। विश्व का कल्याण हो। सनातन धर्म के ये जयघोष देश के हिंदी भाषी राज्यों में धार्मिक आयोजनों के बाद हर तरफ लगाए जाते हैं। इनकी ध्वनि झंकृत हुई है अब जाकर मार्वेल सिनेमैटिक यूनीवर्स में। 2008 में मार्वेल ने अपनी पहली सुपरहीरो फिल्म बनाई ‘आयरनमैन’। सब कुछ अमेरिका का, अमेरिका के लिए और अमेरिका जैसा ही बनाया इसके निर्माता मार्वेल स्टूडियोज के केविन फाइगी ने। किसने सोचा होगा कि अपनी 25वीं फिल्म तक आते आते मार्वेल को अपनी कहानियों के विश्वव्यापी विस्तार के लिए अपना एक सुपरहीरो भारतीय पृष्ठभूमि से भी लेना होगा। फिल्म ‘इटर्नल्स’ सिर्फ मार्वेल सिनेमैटिक यूनीवर्स का ही नहीं बल्कि इसे बनाने वाले, इसे देखने वाले और इसमें काम करने वालों के लिए भी एक ऐसा अध्याय है जहां से पुराने नियम बदल रहे हैं, अब ये यूनीवर्स उनको ध्यान में रखकर आगे बढ़ने वाला है जो मौजूदा समय में टीन एजर्स हैं। पिछले 13 साल से इस दुनिया को देखते पसंद करते रहे एमसीयू के प्रशंसकों के लिए ये बदलाव की बड़ी छलांग है।
फिल्म ‘इटर्नल्स’ की कहानी भारतीय संदर्भ में देखें तो सनातन धर्म की उस अवधारणा को आगे बढ़ाती है कि जब कुछ नहीं था तो एक सर्वशक्तिमान था और उसने अपने अंश से अवतार लिए। मानवता को बार बार बचाया। कई बार आततायियों का अत्याचार अपनी आंखों के सामने पनपते देखा और इसमें हस्तक्षेप तभी किया जब शिशुपाल सरीखों के अपराधों की गिनती सौ पार कर गई। मिस्र में ईसा से पांच हजार साल पहले हुए घटनाक्रम के अलावा फिल्म भारत में गुप्तकाल का भी संदर्भ लेती है। जैक किर्बी के लिखे ‘इटर्नल्स’ से भी फिल्म फिल्म ‘इटर्नल्स’ की लेखन टीम ने तमाम संदर्भ लिए हैं। फिल्म की कहानी एमसीयू में अब तक का सबसे विशाल विस्तार लेती दिखती है और इसके 10 सुपरहीरो भी इसकी कहानियों को लंदन से लेकर मुंबई तक आ जाते हैं। फिल्म की कहानी बस इतनी सी है कि ये 10 सुपरहीरो एक बार फिर धरती के संभावित विनाश को बचाने के लिए एक जुट हो रहे हैं। एमसीयू के पारंपरिक दर्शकों के लिए कुछ झटके भी हैं जैसे कि फिल्म में दिखे समलैंगिंक संदर्भ या पलक झपकते ही खत्म हो जाने वाला दैहिक संबंध दृश्य।
फिल्म ‘इटर्नल्स’ कई मायनों में भविष्य की कहानी है। ये मार्वेल सिनेमैटिक यूनीवर्स की आगे आने वाली फिल्मों का पूर्वावलोकन सरीखी है यानी कि कर्टेन रेजर। इसे देखना वैसा ही एहसास है जिसमें सब कुछ साफ साफ नहीं दिखता बस आने वाले विहंगम दिनों की झलकियां दिखती हैं। निर्देशक क्लोए झाओ की प्रसिद्धि उनकी मानवीय संवेदनाओं वाली कलात्मक फिल्मों को लेकर रही है। ‘नोमडलैंड’ में मिले ऑस्कर ने उनके कद को फिल्म ‘इटर्नल्स’ के बनने और रिलीज होने के बीच ही इतना बढ़ा दिया कि इस फिल्म को लोग एमसीयू की फिल्म की तरह कम और एक ऑस्कर विजेता निर्देशक की फिल्म के तौर पर ज्यादा देख रहे हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय शूटिंग करने की अपनी थाती वह इस फिल्म में भी ले आई हैं, लेकिन उनके सामने इस बार चुनौती काफी बड़ी रही है। एमसीयू के पहले से प्रचलित सुपरहीरो के साथ फिल्म बनाना और एक साथ 10 नए सुपरहीरो बनाना कुछ कुछ वैसा ही है जैसे ‘तुम बिन’ बनाने वाले निर्देशक अनुभव सिन्हा को शाहरुख खान की ‘रा वन’ निर्देशित करने का मौका मिलना।
शाहरुख खान और ऋतिक रोशन की शख्सीयतों के हिसाब से अपना किरदार किंगो गढ़ने वाले कुमैल ननजियानी फिल्म ‘इटर्नल्स’ में नंबर वन रहे हैं। दर्शकों का मनोरंजन करने से ज्यादा आने वाली फिल्मों के प्लेटफॉर्म तैयार करने वाली फिल्म ‘इटर्नल्स’ में कुमैल और हरीश पटेल की जोड़ी जब भी परदे पर आती है, दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान लाने में कामयाब रहती है। रिचर्ड मैडन की शोहरत ‘गेम्स ऑफ थ्रोन्स’ से दुनिया भर में हुई है। वेब सीरीज या टेलीविजन धारावाहिकों से निकले कलाकार बड़े कैनवस पर अपना वैसा ही असर क्यों नहीं छोड़ पाते हैं, रिचर्ड मैडन इस अध्ययन का नया विषय बन सकते हैं। एमसीयू में वापसी करने वाली जेमा चैन ने जरूर अपनी जिम्मेदारी को पूरी शिद्दत से निभाया है। उनका आभामंडल उनके किरदार के अनुरूप ही है। हां, सलमा हाएक और एंजेलीना जोली के प्रशंसकों को जरूर फिल्म ‘इटर्नल्स’ में उनके किरदारों की अवधि देखकर निराशा हो सकती है।
फिल्म ‘इटर्नल्स’ का सबसे मजबूत पहलू ये है कि ये फिल्म आखिर तक बोर नहीं करती। ये इसके बावजूद कि फिल्म में खलनायक की समस्या काफी गंभीर है। इसके अधिकतर दानव न तो बोल सकते हैं और न अभिनय कर सकते हैं। फिर भी 10 सुपरहीरो एक साथ उनका विनाश करने निकले हैं। अच्छाई और बुराई की इस जंग में फिल्म को इसके बैकग्राउंड म्यूजिक और स्पेशल इफेक्ट्स से भी मदद मिलती है। बेन डेविस की सिनेमैटोग्राफी लाजवाब है और पुरस्कारों की हकदार है। ‘एवेंजर्स एंडगेम’ के बाद मार्वेल सिनेमैटिक यूनीवर्स की ये दूसरी सबसे लंबी अवधि की फिल्म है। 156 मिनट तक फिल्म में कुछ न कुछ ऐसा होता ही रहता है कि दर्शक अपना ध्यान परदे पर बनाए रखते हैं और फिल्म का असली सरप्राइज इसके एंड क्रेडिट सीन में है।