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डिजिटल रिव्यू : जब बच्चे के तर्कों से हार गया मस्जिद का मौलवी
Thu, 07 Feb 2019 10:43 AM IST
anand anand
मुंबई डेस्क, अमर उजाला
मुंबई डेस्क, अमर उजाला
Published by: anand anand
Updated Thu, 07 Feb 2019 10:43 AM IST
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LADDOO
- फोटो : youtube
डिजिटल रिव्यू: लड्डू (शॉर्ट फिल्म)
कलाकार: कुमुद मिश्रा, कबीर साजिद, मानसी पारेख आदि। निर्देशक: समीर और किशोर साधवानी
यूट्यूब चैनल: लार्जशॉर्ट फिल्म्स
डिजिटल मीडिया की आम आदमी के मोबाइल पर हो चुकी धमक के फायदे और नुकसानों की बहस के बीच कभी कभी इस माध्यम पर ऐसी कहानियां भी दिख जाती हैं, जिन्हें लोग एक दूसरे के साथ शेयर करना शुरू कर देते हैं। मशहूर निर्देशक नीरज पांडे की कंपनी की बनाई शॉर्ट फिल्म लड्डू ऐसी ही एक कहानी है, जो हो सकता है अब तक आपके मोबाइल पर किसी व्हाट्सऐप संदेश की तरह पहुंच भी चुकी है। नए साल की सबसे ज्यादा वाइरल हो चुकी इस शॉर्ट फिल्म को लेकर कॉपीराइट कानूनी विवाद भी चल रहा है, लेकिन इसके बावजूद इस कहानी की खूबसूरती अपनी जगह कायम है।
घर पर सुपरहीरो का खेल खेलते बच्चे को उसकी मां एक टिफिन में खाना भरकर मंदिर के पुजारी को खिला आने को कहती है। ऐसा इसलिए ताकि बच्चे के दादाजी की बरसी पर दिवंगत आत्मा को तृप्ति मिल सके। बच्चा दादाजी तक खाना पहुंच जाने की बात सुनकर घर से निकल भी पड़ता है। लेकिन, मंदिर बंद है। पास की मस्जिद के मौलवी से वह ईश्वर को जानने की कोशिश करता है और मौलवी के तमाम तर्कों के बाद भी वह उन्हें ही दादाजी के लिए निकाला गया खाना खिलाकर ही दम लेता है।
कहानी छोटी सी है। इतनी छोटी की इस पर बनी पूरी फिल्म व्हाट्सऐप की मार्फत पूरे देश में घूम रही है। यूट्यूब पर भी लोग इसे देख रहे हैं। लेकिन, कहानी का संदेश बहुत बड़ा है। ईश्वर अल्ला तेरो नाम, हम सब सिर्फ राष्ट्रीय पर्वों पर ही गाते हैं, या इसे जीवन में भी उतारते हैं? एक बच्चे की मार्फत इसके मेकर्स ने सीधे दिल को लगने वाली बात कह दी है। मौलवी बने कुमुद मिश्रा का अभिनय तो दमदार है ही, लेकिन पोते के किरदार में कबीर साजिद की अदाकारी उन्हें फिल्म का हीरो बनाती है। ये ऐसी फिल्म है जिसे आपको भी ढूंढकर देखना चाहिए।
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कलाकार: कुमुद मिश्रा, कबीर साजिद, मानसी पारेख आदि। निर्देशक: समीर और किशोर साधवानी
यूट्यूब चैनल: लार्जशॉर्ट फिल्म्स
डिजिटल मीडिया की आम आदमी के मोबाइल पर हो चुकी धमक के फायदे और नुकसानों की बहस के बीच कभी कभी इस माध्यम पर ऐसी कहानियां भी दिख जाती हैं, जिन्हें लोग एक दूसरे के साथ शेयर करना शुरू कर देते हैं। मशहूर निर्देशक नीरज पांडे की कंपनी की बनाई शॉर्ट फिल्म लड्डू ऐसी ही एक कहानी है, जो हो सकता है अब तक आपके मोबाइल पर किसी व्हाट्सऐप संदेश की तरह पहुंच भी चुकी है। नए साल की सबसे ज्यादा वाइरल हो चुकी इस शॉर्ट फिल्म को लेकर कॉपीराइट कानूनी विवाद भी चल रहा है, लेकिन इसके बावजूद इस कहानी की खूबसूरती अपनी जगह कायम है।
घर पर सुपरहीरो का खेल खेलते बच्चे को उसकी मां एक टिफिन में खाना भरकर मंदिर के पुजारी को खिला आने को कहती है। ऐसा इसलिए ताकि बच्चे के दादाजी की बरसी पर दिवंगत आत्मा को तृप्ति मिल सके। बच्चा दादाजी तक खाना पहुंच जाने की बात सुनकर घर से निकल भी पड़ता है। लेकिन, मंदिर बंद है। पास की मस्जिद के मौलवी से वह ईश्वर को जानने की कोशिश करता है और मौलवी के तमाम तर्कों के बाद भी वह उन्हें ही दादाजी के लिए निकाला गया खाना खिलाकर ही दम लेता है।
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कहानी छोटी सी है। इतनी छोटी की इस पर बनी पूरी फिल्म व्हाट्सऐप की मार्फत पूरे देश में घूम रही है। यूट्यूब पर भी लोग इसे देख रहे हैं। लेकिन, कहानी का संदेश बहुत बड़ा है। ईश्वर अल्ला तेरो नाम, हम सब सिर्फ राष्ट्रीय पर्वों पर ही गाते हैं, या इसे जीवन में भी उतारते हैं? एक बच्चे की मार्फत इसके मेकर्स ने सीधे दिल को लगने वाली बात कह दी है। मौलवी बने कुमुद मिश्रा का अभिनय तो दमदार है ही, लेकिन पोते के किरदार में कबीर साजिद की अदाकारी उन्हें फिल्म का हीरो बनाती है। ये ऐसी फिल्म है जिसे आपको भी ढूंढकर देखना चाहिए।
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