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Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Criminal Justice Season 4 Review in Hindi by Pankaj Shukla Rohan Sippy Pankaj Tripathi Surveen Chawla Zeeshan

Criminal Justice Season 4 Review: माधवगिरी से महका ‘क्रिमिनल जस्टिस’ का नया सीजन, सुरवीन ने सबसे सही पकड़ा सुर

Fri, 30 May 2025 02:20 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 30 May 2025 02:20 PM IST
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Criminal Justice Season 4 Review in Hindi by Pankaj Shukla Rohan Sippy Pankaj Tripathi Surveen Chawla Zeeshan
क्रिमिनल जस्टिस रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
क्रिमिनल जस्टिस सीजन 4
कलाकार
पंकज त्रिपाठी , सुरवीन चावला , मोहम्मद जीशान अयूब , श्वेता बसु प्रसाद , आशा नेगी , खुशबू अत्रे , आत्मप्रकाश मिश्र , बरखा सिंह और खुशी भारद्वाज आदि
लेखक
हरमान वडाला , राहुल वेद प्रकाश , वर्षा रामचंद्रन , रिया पुजारी , संदीप जैन , समीर मिश्रा और अनुराग पांडे
निर्देशक
रोहन सिप्पी
निर्माता
अप्लॉज एंटरटेनमेंट
रिलीज
29 मई 2025
रेटिंग
3/5

क्रिमिनल जस्टिस यानी कि आपराधिक न्याय, भारतीय दंड संहिता की बजाय भारतीय न्याय संहिता के हिसाब से हो रही अपराधों की छानबीन के समय में जियो हॉटस्टार की सीरीज ‘क्रिमिनल जस्टिस’ का चौथा सीजन साल 2023 में घटे एक अपराध की कहानी है। ये सीरीज देखने वालों को ये तो पता ही है कि इसकी कहानी एक तयशुदा फरमे मे चलती है। एक देसी वकील है, हिंदी और कभी कभी बेहद शुद्ध हिंदी बोलने वाला। अंग्रेजीदां कंपनियां उसके चेहरे को आम आदमी का हितैषी बनाकर अपनी तरफ से पेश करती हैं और आम आदमी के ‘हित’ की बात करने वाला ये वकील अपने फेफड़े गंवाने की कगार पर पहुंच चुके मरीज को मुआवजे के लिए 60 लाख की बजाय एक करोड़ रुपये दिलाकर ये चेहरा बचा भी लेता है। लेकिन, कहीं न कहीं जमीर पर चोट खा बैठता है। क्योंकि, कंपनी वाले तो तीन करोड़ तक का चेक लेकर आए थे। जो दो करोड़ बचे, उसका एक हिस्सा चमचमाती एसयूवी के दौर पर वकील माधव मिश्रा को तोहफे में मिल जाता है। बीवी खुश, साला सवा खुश लेकिन, डेढ़ सयाना बनने की कोशिश में लगे रहने वाला वकील माधव मिश्रा समझ जाता है कि कि उसकी आत्मा के साथ ‘गेम’ हो गया है।

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चालबाजों के बीच फंसा सीधा सादा माधव
इन दिनों जीवन ऐसे ही चल रहा है। जो सहज हैं, सीधे हैं, सरल हैं और अपने काम में लगे हुए हैं, उनका दामन किसी तरह दागदार करके अपने जैसा बना लेने की कोशिशें हर तरफ हो रही हैं। जो चालबाज है, वह सारा खेल यूं पेश करता है कि जैसे वही पीड़ित है और जो काम कर रहा है, उसे ये लोग अपराधी बनाकर पेश कर देते हैं और जम्हूरियत में सियासत का आलम ये है कि टीम का लीडर भी अब राजा की तरह बर्ताव करता नजर आता है। माधव मिश्रा के लिए इस बार के सीजन की यही चुनौती है। ‘क्रिमिनल जस्टिस’ का चौथा सीजन जहां से शुरू होता है, वहां माधव मिश्रा के दामन पर ऐसे ही कुछ छीटें उड़ते तो हैं लेकिन कहानी के तीसरे एपिसोड तक आते आते माधव अपना दामन पाक साफ करने की जुगत में लग जाता है। लाल चमचमाती एसयूवी भी वापस कर आता है। 
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Criminal Justice Season 4 Review in Hindi by Pankaj Shukla Rohan Sippy Pankaj Tripathi Surveen Chawla Zeeshan
क्रिमिनल जस्टिस रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

लव ट्रांएगल की मर्डर मिस्ट्री
‘क्रिमिनल जस्टिस’ का चौथा सीजन शहर के एक मशहूर डॉक्टर की होते होते रह गई दूसरी बीवी के मर्डर की कहानी है। डॉक्टर बाबू और उनकी पत्नी दोनों एक आलीशान इमारत के एक ही फ्लोर पर रहते हैं। आमने-सामने। तेरे घर के सामने टाइप कुछ दोनों के बीच कभी हुआ, ये सीरीज अब तक तो नहीं बताती लेकिन ये जरूर बताती है कि दोनों अलग हो चुके हैं। दोनों के एक टीनएजर बच्ची है। मामला जियो हॉटस्टार का है तो बीमारी भी उसी लेवल की है, एस्पर्गर सिंड्रोम जैसा कुछ बताया जाता है। खैर, बीमारी पर मत जाइए, इस बात पर अक्ल लगाइए कि इस बीमारी में बच्चा हिंसक हो जाता है। स्कूल में म्यूजिक की क्लास तक में हमलावर हो जाता है और ये बच्चा उस समय वहीं पाया जाता है जहां इस डॉक्टर की माशूक का कत्ल हो गया है। फर्मा समझ आ गया है तो अब ये भी समझ आ गया हो कि वकील माधव मिश्रा को करना क्या है?

असली जैसी कहानी का नकली जैसा कलेवर
इस सीरीज का पिछला सीजन हॉटस्टार पर आया था, चौथा सीजन आते आते हॉटस्टार अब जियो का हो चुका है और इसे बनाने वाली कंपनी अप्लॉज एंटरटेनमेंट ने अच्छा ये किया है कि बीते सीजन की तरह इस बार भी कहानी बहुत देसी टाइप रखी है। कहानी बहुत साधारण सी है लेकिन इसे लिखने में सात लोग क्यों लगे हैं, ये सवाल अमिताभ बच्चन चाहें तो कौन बनेगा करोड़पति के अगले सीजन में पूछ सकते हैं। प्रोडक्शन डिजाइन भी सुस्त सुस्त सा है। न घर, घर जैसा लगता है और न थाना, थाने जैसा। पोस्टमार्टम हाउस के लिए स्ट्रेचर पर पड़ी लाश के अंगूठे में फंसे टैग पर मोबाइल नंबर तक 10 अंकों का नहीं लिख पाए हैं, ये लोग। अगर सीरीज में इसके कलाकारों का अभिनय निकाल दिया जाए तो पूरी की पूरी सीरीज धड़ाम हो जाती है और वह इसलिए कि इस सीरीज को सिर्फ बनाने के लिए बनाया गया दिखता है। 

माधव मिश्रा पर फिर हावी पंकज त्रिपाठी
पंकज त्रिपाठी जैसा कलाकार अंटी में हो तो कौन ही प्रोडक्शन हाउस सीजन दर सीजन नहीं बनाना चाहेगा, ये और बात है खुद पंकज त्रिपाठी ने भी ऐसी कहानियों के लिए अपने अभिनय का एक अलग फरमा रख छोड़ा है। दो बार गर्दन इधर, एक बार उंगली उधर और फिर तीन बार आंखों की करामातें। इसी पर हिंदी सिनेमा का एक बड़ा दर्शक वर्ग अरसे तक फिदा रहा, लेकिन सिनेमा मुश्किल होता जा रहा है, तो सीरीज कहीं आसान। पंकज त्रिपाठी यहां इस कहानी के उदंड मार्तंड हैं और उनके साथी कलाकार उनके चारों तरफ चक्कर लगाने वाली ग्रह। इन ग्रहों के अपने अपने उपग्रह भी हैं। लेकिन, पहले तीन एपीसोड में ही सुरवीन चावला की चमक इस बार सब पर भारी है। 

सुरवीन चावला नंबर वन
अपने पति और बेटी से अलग होकर रह रही महिला का दर्द सुरवीन चावला अपने चेहरे पर यूं ओढ़े रहती हैं कि लगता ही नहीं अभिनय कर रही हैं। सुरवीन चावला की जैसे जैसे उम्र बढ़ती जा रही है, उनके अभिनय का निखार उन्हें एक दमदार अभिनेत्री के तौर पर स्थापित करता चल रहा है। टेलीविजन के बाद उनका ‘हेट स्टोरी’ अवतार कौन भूल सकता है भला? फिर ‘डीकपल्ड’ में माधवन संग भी उनकी जोड़ी खूब जमी। यहां मोहम्मद जीशान अयूब भले उनके जोड़ीदार जैसे नही लगते हों लेकिन ये अटपट-खटपट ही इन दोनों की अनबन को स्थापित भी करती है। मोहम्मद जीशान अयूब को अभी तक की कहानी में खास कुछ करने को मिला नहीं है, उनसे ज्यादा दमदार काम पुलिस इंस्पेक्टर बनी कल्याणी मुले न कर दिखाया है। देखने वाली बात ये है कि वह भी अपने पति से अलग है। 

ऐसे तो नहीं होते हिंदुस्तानी परिवार
देसी कहानी के नाम पर यहां ये दो कपल जिस तरह से दिखाए गए हैं, वे मुंबई के लेखकों पर पड़ते सामाजिक असर की भी बानगी हैं। मेट्रो शहरों की ये आम बात है कि पति-पत्नी अलग हो गए, पर फिर भी रोज मिल सकते हैं, बात कर सकते हैं। काम भी साथ कर सकते हैं। लेकिन, ऐसी कहानियां आम भारतीय अभिरुचि की होने में दिक्कत है क्योंकि अधिसंख्य परिवारों की ये आदर्श स्थितियां नहीं हैं। छोटे शहरों के टूटे-बिखरे परिवार वैसे तो कम ही होते हैं, लेकिन अगर होंगे तो फिर इतने सामान्य नहीं होंगे। वहां रिश्ते फिर ‘नीले ड्रम’ तक पहुंचकर ही मानते हैं। क्रिमिनल जस्टिस’ का चौथा सीजन इसके सहायक कलाकारों को भी काफी कुछ कर दिखाने का मौका दे रहा है। निर्देशक रोहन सिप्पी ने अपने पिता रमेश सिप्पी की इस विरासत को संभाले रखा है कि कलाकार छोटा हो या बड़ा, उसका सीन जब भी हो वो दमदार हो। माधव मिश्रा की पत्नी के भाई बने आत्मप्रकाश मिश्रा का कूड़ा उठाने वाला का पीछा करके उसका राजफाश करने वाला सीक्वेंस जोरदार है। वहीं पत्नी का किरदार कर रही खुशबू अत्रे यूं लगता है कि हर सीन शूट करने से पहले ‘हप्पू की उलटन पलटन’ देख ले रही हैं, वह रत्ना कम राजेश ज्यादा नजर आती हैं, और भले बात मजाक में कही गई हो पर उनकी गांधीगिरी जैसी रत्नागिरी ज्यादा जम नहीं पाई है। श्वेता बसु प्रसाद के किरदार के पर निकलने अभी बाकी हैं, ओटीटी ने अभी सीरीज के तीन एपिसोड ही रिलीज किए हैं।

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