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Chhorii Movie Review: भूमि के बाद प्राइम वीडियो का नुसरत पर दांव, देखिए कहां चूके विक्रम और विशाल

Fri, 26 Nov 2021 11:25 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 26 Nov 2021 11:25 AM IST
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Chhorii Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Nushratt Bharuccha Vishal Furia Mita Vashisht
छोरी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
Movie Review
छोरी
कलाकार
नुसरत भरूचा , मीता वशिष्ठ , राजेश जैस , सौरभ गोयल , पल्लवी अजय और यानीना भारद्वाज
लेखक
विशाल फूरिया और विशाल कपूर
निर्देशक
विशाल फूरिया
निर्माता
भूषण कुमार , विक्रम मल्होत्रा , जैक डेविस और शिखा शर्मा
ओटीटी
अमेजन प्राइम वीडियो
रेटिंग
2/5

विक्रम मल्होत्रा और प्राइम वीडियो की जुगलबंदी ने हिंदी सिनेमा को ‘शकुंतला देवी’ और ‘शेरनी’ जैसी कुछ बेहतरीन फिल्मों से परिचित कराया है। लेकिन, नई पीढ़ी की अभिनेत्रियों को लेकर उनका प्रयोग उतना शानदार नहीं रहा। फिल्म ‘दुर्गामती’ के जरिये विक्रम और प्राइम वीडियो ने भूमि पेडनेकर पर दांव खेला और हार गए। अब उनका नया दांव नुसरत भरूचा पर है। लव रंजन फिल्ममेकिंग स्कूल से निकली कार्तिक आर्यन के बाद नुसरत दूसरी कलाकार हैं, जिनको खुद पर सोलो लीड के तौर पर फिल्म चला ले जाने का पूरा भरोसा है। इसी कोशिश में उन्होंने फिल्म ‘छोरी’ की है। फिल्म के निर्देशक विशाल फूरिया खुद बताते हैं कि ये कहानी वह पहले भी हिंदी में ही बनाने वाले थे लेकिन तब किसी निर्माता ने इसे तवज्जो नहीं दी। फिर विशाल ने इसे मराठी में ‘लपाछपी’ नाम से बनाया। फिल्म हिट रही। और, इसे हिट बनाने में इसकी दोनों नायिकाओं उषा नायक और पूजा सावंत का खास योगदान रहा।

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Chhorii Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Nushratt Bharuccha Vishal Furia Mita Vashisht
छोरी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म ‘छोरी’ को निर्देशक विशाल फूरिया ने अपनी ही मराठी फिल्म ‘लपाछपी’ के रीमेक के तौर पर बनाया है। मूल फिल्म में जो रोल उषा नायक और पूजा सावंत ने किए, उनको इस हिंदी संस्करण में मीता वशिष्ठ और नुसरत भरुचा ने निभाया है। फिल्म चूंकि रीमेक है तो जाहिर है कि इसकी तुलनाएं भी होंगी। हाल के दिनों में ‘धड़क’ और ‘मिमी’ जैसी फिल्में भी मराठी फिल्मों की ही रीमेक रही हैं। फिल्म ‘छोरी’ वही गलती दोहराती है जो शशांक खेतान ने ‘सैराट’ का रीमेक ‘धड़क’ बनाते हुए की। किसी क्षेत्रीय भाषा की छोटे बजट की फिल्म को अधिक विस्तार वाली भाषा में बनाने के पीछे एक सोच तो यही होती है कि इसे ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचाया जाए। दूसरी वजह रीमेक की ये होती है कि फिल्म मेकिंग के जो अरमान मूल फिल्म में पूरे नहीं हो पाए, उन्हें रीमेक में पूरा किया जाए। बेहतर बजट, बड़े सितारे, धमाकेदार संगीत और कमाल के स्पेशल इफेक्ट्स के लिए ज्यादा पैसा। लेकिन, रीमेक के दौरान इन सबसे ज्यादा जरूरी है फिल्म की आत्मा।

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Chhorii Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Nushratt Bharuccha Vishal Furia Mita Vashisht
छोरी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म ‘लपाछपी’ की कहानी का सार ये है कि इसमें एक गर्भवती महिला एक ऐसे परिवार के बीच फंस जाती है जिसके अतीत की कहानियां दिल दहला देने वाली हैं। दो भाइयों के परिवार के संयुक्त परिवार में कुछ ऐसे हादसे होते हैं कि अब उन्हें किसी ऐसी गर्भवती महिला का इंतजार अरसे से है जो उनके घर में आकर तय संख्या की रातें सकुशल गुजार ले। शापित कहानियों के काले टोटकों की कहानी हाल ही में दर्शक नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘काली खुही’ में भी देख चुके हैं जिसमें लड़कियों को जन्म लेते ही जहर देकर मार दिया जाता है। मामला कुछ कुछ यहां भी वैसा ही है। लेकिन, यहां ध्यान ये रखना चाहिए कि फिल्म ‘लपाछपी’ चार साल पहले बनी फिल्म है। ‘छोरी’ उस साल 2021 में रिलीज हो रही है जिसमें देश में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा हो चुकी है।

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Chhorii Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Nushratt Bharuccha Vishal Furia Mita Vashisht
छोरी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

सिनेमा की कहानियां हमेशा भविष्य को ध्यान में रखकर बनानी होती हैं ताकि फिल्म जब तक बनकर तैयार हो तो उस समय के समय के साथ वह तालमेल कर सके। हॉलीवुड के बड़े बड़े स्टूडियोज इसी काम के लिए क्रिएटिव कंसल्टेंट रखते हैं जो धरातल की सच्चाई और भविष्य के संभावित के बीच संतुलन बनाए रखने में फिल्म निर्माताओं की मदद करते हैं। फिल्म ‘छोरी’ वनमैन शो है। इसकी कामयाबी का सेहरा अगर विशाल के सिर बंधता तो इसकी नाकामी के जिम्मेदार भी वही हैं। फिल्म को गांव तक लाने से पहले वह जो माहौल बनाने की कोशिश करते हैं, उसमें फिल्म के शुरू के 17 मिनट खराब हो जाते हैं। आधी फिल्म तक तो दर्शक धैर्य भी खोने लगते हैं और फिल्म की नायिका साक्षी का ये सवाल कि पत्नी को पति के बाद ही खाना क्यों खाना चाहिए, फिल्म की थीम का समय से पहले ही खुलासा कर देता है।

Chhorii Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Nushratt Bharuccha Vishal Furia Mita Vashisht
छोरी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

जैसा कि नाम से ही विदित है फिल्म ‘छोरी’ छोरियों की बात करती हैं। फिल्म की लीड कलाकार नुसरत भरुचा को भी ये साबित करना है कि छोरियां छोरों से कम नहीं होतीं और चाहें तो फिल्म का पूरा भार अपने कंधों पर भी उठा सकती हैं। इस लिहाज से नुसरत की तारीफ भी करनी चाहिए कि उन्होंने इस फिल्म में काम करने की बात मानी। फिल्म में पूरा फोकस उन्हीं पर है। बाकी किरदार आते जाते रहते हैं। एक गर्भवती युवती की चाल ढाल, हाव भाव लाने की वह कोशिश भी खूब करती हैं लेकिन आठ महीने के गर्भ का जो सुख देने वाला दर्द मां के चेहरे पर दिखता है, वह यहां प्रकट नहीं होता। ढाई तीन सौ किलोमीटर का सड़क के रास्ते सफर करने के दौरान भी। नुसरत को इस फिल्म की शूटिंग करने से पहले रामगोपाल वर्मा की ‘भूत’ देखनी चाहिए थी। किसी डरावनी फिल्म में नायिका के भाव प्रकटन की इसे टेक्स्ट बुक माना जा सकता है।

Chhorii Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Nushratt Bharuccha Vishal Furia Mita Vashisht
छोरी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म ‘छोरी’ को गंवई अंदाज देने के लिए विशाल फुरिया ने इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के किसी सीमावर्ती गांव जैसी पृष्ठभूमि दी है। संवादों में इन तीनों राज्यों की बोलियों का मिश्रण है और साथ में है ताई। ताई महाराष्ट्र में बहन है और उत्तर भारत में पिता के बड़े भाई की पत्नी। गांव की पृष्ठभूमि में बनी फिल्मों में वहां की परंपराओं का ध्यान भी फिल्म में नहीं है। चारपाई पर दो लोग अगर बैठे हैं तो काम देने वाला हमेशा सिरहाने ही बैठेगा। यहां सरकार पैताने बैठे हैं और उनको सरकार कहने वाला सिरहाने बैठकर हुक्का ऑफर कर रहा है। फिल्म को अपने संगीत से भी कोई खास मदद नहीं मिलती। हां, इसका कैमरावर्क अच्छा है जिसके लिए अंशुल चौबे को पूरे नंबर मिलते हैं। हॉरर फिल्मों के शौकीन दर्शकों को करीब दो घंटे की ये फिल्म पहले एक घंटे काफी सुस्त फिल्म लग सकती है और बाद के एक घंटे में जो कुछ होता है वह सब इतनी रफ्तार और इतने सेट पैटर्न पर होता है कि कहीं से कोई सिहरा देने वाली अनुभूति नहीं होती।


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