Big Girls Don't Cry Review: स्कूल, जिस्मानी रिश्ते और सनसनी का बोरिंग कॉकटेल, जमी नहीं करण-नित्या की जुगलबंदी
जब बच्चे बड़े हो जाते हैं, तो यह माना जाता है कि अब वह इतने परिपक्व हो चुके होंगे कि अपने जीवन के सही और गलत का फैसला ले सके। लेकिन मां- बाप के फैसले को नजरअंदाज करके क्या वह अपने जीवन में सही और गलत का आकलन कर सकते हैं ? यह एक बहुत बड़ा सवाल है। प्राइम वीडियो की सीरीज 'बिग गर्ल्स डोंट क्राई' वैसे तो लड़कियों के बोर्डिंग स्कूल की जिंदगी पर आधारित है, जिसमें रिश्तों के कई रंग देखने को मिलेंगे, लेकिन यह सीरीज शुरू से अंत तक दर्शकों को बांधे रहने में पूरी तरह से असफल रही है। सीरीज में बस चेरिन पॉल और कबीर तेजपाल की सिनेमैटोग्राफी देखने लायक है। परमिता घोष और दीपिका कालरा का संपादन बहुत ही कमजोर है, प्रत्येक एपिसोड को कम से कम 10 मिनट कम किया जा सकता है।
वेब सीरीज 'बिग गर्ल्स डोंट क्राई' की कहानी वंदना वैली गर्ल्स कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियों की बोर्डिंग जिंदगी पर आधारित है। इस सीरीज की कहानी मुख्य रूप से कॉलेज में पढ़ने वाली सात लड़कियों और कॉलेज की प्रिंसिपल के इर्द - गिर्द घूमती है। इस सीरीज में दिखाया गया है कि किस तरह से लड़कियां अपनी - अपनी सोच को लेकर आगे बढ़ती हैं। जिसमें पहले प्यार, आकर्षण, टूटना, एक दूसरे के प्रति स्पर्धा, द्वेष की भावना के साथ - साथ पितृसत्ता, भाईचारा जैसे तमाम मुद्दों के साथ सीरीज की कहानी आगे बढ़ती है। और, कहानी एक ऐसे मोड़ पर पहुंच जाती है कि दशकों को यह बात समझ में नहीं आती है कि आखिर में नित्या मेहरा इस सीरीज के माध्यम से कहना क्या चाहती हैं।
कॉलेज में बच्चे उम्र के जिस पड़ाव पर पहुंचते हैं, उनके जिंदगी का यह बड़ा ही अहम पड़ाव होता है। बनने और बिगड़ने की यही उम्र होती है। इस उम्र में बच्चों को सही मार्गदशर्शन अगर ना मिले तो उनके बिगड़ने के मौके सबसे ज्यादा होते हैं। चाहे वह सही मार्गदर्शन उनके माता- पिता या फिर शिक्षक से मिले या किसी और से। फिल्म 'बार बार देखो' और वेब सीरीज 'मेड इन हैवन' का निर्देशन कर चुकी नित्या मेहरा ने इस शो का निर्देशन सुधांशु सरिया, करण कपाड़िया और कोपल नैथानी के साथ मिलकर किया है।
नित्या मेहरा खुद भी देहरादून में बोर्डिंग स्कूल वेल्हम गर्ल्स स्कूल में पढाई कर चुकी हैं। उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर इस सीरीज को सुधांशु सरिया,राधिका मल्होत्रा,सुनयना कुमारी और अदवितिया केरेंग दास के साथ मिलकर लिखा है, लेकिन इस विषय के साथ पूरी तरह से न्याय करने में सफल नहीं रही। इस विषय पर बहुत ही खूबसूरत सीरीज बनाई जा सकती थी। जैसा कि सीरीज के शुरुआत में लड़कियों का स्पोर्ट के प्रति रुझान और नेतृत्व करने की भावना को दिखया गया था, लेकिन जैसे - जैसे सीरीज की कहानी आगे बढ़ती है, अपने मूल कॉन्सेप्ट से भटक जाती है और कहानी बोझिल सी लगने लगती है।
सीरीज की कहानी इस सोच के साथ आगे बढ़ती है कि खरगोश अपनी परछाई के साथ -साथ आगे बढ़ता है और कुएं में गिर जाता है, जहां से उसे खुद ही बाहर निकलना है। सीरीज में दिखाए गए लड़कियों की कहानी भी ऐसी हैं, जिसकी जैसी सोच उसी के हिसाब से आगे बढ़ती है, लेकिन जब मुश्किल में फंसती है तो खुद को अकेला ही पाती है। इस सीरीज में इस बात पर जोर दिया गया है कि खुद को पहचानो और उस हिसाब से अपने करियर को प्लान करो, लेकिन इस सीरीज में सेक्स, कंडोम के फ्लेवर और समलैंगिकता को लेकर लड़कियों के रुझान को जिस तरह से दिखया है वह अप्रांसगिक लगता है। यह सीरीज इस बात की वकालत करती है कि जो मन चाहे करो, भले ही सामाजिक नजरिए से वह गलत ही क्यों ना हो ?
इस सीरीज में पूजा भट्ट ने कॉलेज की प्रिंसिपल की भूमिका निभाई है, काफी हद तक उन्होंने अपनी भूमिका के साथ न्याय करने की कोशिश की है, लेकिन उनसे और भी बेहतर परफॉर्मेंस की उम्मीद की जा सकती है। डॉली के माता - पिता की भूमिका में राइमा सेन और मुकुल चड्ढा का भी परफॉर्मेंस सामान्य है। वंदना वैली गर्ल्स कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियों की भूमिका में अवंतिका वंदनपु, अनीत पड्डा, अक्षिता सूद, दलाई, विदुषी, तेनजिन लाकीला और अफरा सैयद में से किसी ने भी अपने परफॉर्मेंस से प्रभावित नहीं किया है। इस फिल्म में वैसे तो आठ गीत हैं, लेकिन 'बिग गर्ल्स डोंट क्राई' के टाइटल ट्रैक और 'एकला चलो' के अलावा बाकी गीत प्रभावित नहीं करते हैं। अन्विता दत्त के लिखे टाइटल ट्रैक के संगीत की रचना अमित त्रिवेदी ने की है और इस गीत को खुद ही सिंगर माली के साथ गाया है। वहीं, हुसैन हैदरी के लिखे गीत 'एकला चलो' के संगीतकार कनिष्क सेठ है और इस गीत को गायिका हनीता भांबरी ने गाया है।