Bahubali Crown Of Blood Review: ‘बाहुबली’ के नाम पर धोखा निकली राजामौली की नई सीरीज, लचर कहानी, घटिया एनीमेशन
हिंदी पट्टी के दर्शकों ने निर्देशक एस एस राजामौली की दोनों फिल्मों ‘बाहुबली द बिगनिंग’ और ‘बाहुबली द कन्क्लूजन’ को बहुत प्यार दिया। ‘आरआरआर’ में उन्हें इसका फायदा मिला। अब राजामौली खुद ब्रांड हो चुके हैं। हालांकि, नेटफ्लिक्स जैसे ओटीटी ने उनका गुरुर उनकी बनाई वेब सीरीज को शूटिंग के बाद रद्द करके कुछ कम किया लेकिन डिज्नी प्लस हॉटस्टार के ‘आलमपनाह’ अब भी ब्रांड ‘बाहुबली’ पर फिदा है। इस ब्रांड को लेकर अब तक न जाने क्या क्या नहीं बन, बिक चुका है। वीडियो गेम्स हैं। मर्चेंडाइज है। और तो और ‘बाहुबली द लॉस्ट लीजेंड्स’ नाम से एक सीरीज भी इसकी बन चुकी है। पांच सीजन वाली ये सीरीज लोगों को अब याद तक नहीं। और, अब ये नई सीरीज ‘बाहुबली क्राउन ऑफ ब्लड’। सीरीज को लेकर खुद ओटीटी इतना भ्रमित है कि ओटीटी के विवरण में बाहुबली की अंग्रेजी वर्तनी कुछ और है, इसके पोस्टर पर इसकी अंग्रेजी वर्तनी कुछ और है!
फिर वही कहानी लौट आई!
साल 2015 में आई ‘बाहुबली’ की पहली फिल्म, फिर दो साल बाद आई इसकी सीक्वल और फिर उसी साल अमेजन प्राइम वीडियो पर आ धमकी ‘बाहुबली लॉस्ट लीजेंड्स’ सीरीज। ये सीरीज साल 2020 तक चली। आखिरी सीजन तक आते आते दर्शकों ने इससे तौबा कर ली। और, अब उसके चार साल बाद फिर वही महिष्मती साम्राज्य। फिर वही बाहुबली और वही भल्लालदेव। रानी शिवगामी भी हैं। कटप्पा के नाम से तो खैर इस कहानी के दीये का तेल ही जलता है। जिस दिन मैंने सिनेमाघर में एनीमेशन फिल्म ‘द गारफील्ड मूवी’ देखी, उसी दिन इस सीरीज के स्क्रीनर से भी सामना करना पड़ा। डिज्नी डेब्यू की अपनी तकनीकी दिक्कतें हैं। कंपनी का भारतीय संचलन बिकने की बात हो चुकी है तो जो भी है वह राम भरोसे ही चल रहा है।
इस सीरीज में दम नहीं है
इस अफरातफरी के बीच ही राजमौली और डिज्नी प्लस हॉटस्टार के ‘आलमपनाहों’ ने हैदराबाद जाकर अपनी इस नई वेब सीरीज ‘बाहुबली क्राउन ऑफ ब्लड’ का नगाड़ा बजाया। जमाने का असल शोर सीरीज में है। गनीमत है कि अभी दो एपिसोड ही रिलीज हुए हैं। सारे एपिसोड शायद ही इसके कोई एक साथ देख सके। बिंज वॉच तो छोड़िए सीरीज के दो एपिसोड बैक टू बैक देखना भी किसी चुनौती से कम नहीं है और वह तब जब इसका एक एपिसोड आधे घंटे का भी नहीं है।
कहानी के नाम पर धोखा
कहानी महिष्मती में वहां से शुरू होती है जहां गरुड़ राज्य के लोग महिष्मती के सैनिकों पर उनके कुल देवता की मूर्ति की चोरी करने का आरोप लगाते हैं। कालकेय आया तो लगा कि वह अनोखी भाषा भी सुनने को मिलेगी, जो फिल्म में ईजाद की गई थी। लेकिन ऐसा कुछ न हुआ। फिर रक्त देव आया। शायद क्राउन ऑफ ब्लड का मतलब समझाने। माता को लगता ही नहीं कि बाहुबली वाकई बाहुबली है। उसके लिए अब भी दोनों बालक हैं। कटप्पा इस कहानी का असली कलाकार शुरू से रहा है। यहां वह वनवास जाता है। मुखौटा लगाकर बाहुबली से लड़ता भी है। लेकिन ऐसी कहानियां तो अब बच्चे भी पसंद नहीं करते।
डिज्नी के चैनल पर ऐसा एनीमेशन!
दुनिया भर में एनीमे के बढ़ते चलन को कैश कराने की बहुत दोयम दर्ज की कोशिश है वेब सीरीज ‘बाहुबली क्राउन ऑफ ब्लड’। सीरीज में निर्देशन जैसा कुछ है ही नहीं कि दो दो निर्देशक इस काम के लिए रखने पड़ें। एनीमेशन इसका लोटपोट के किरदारों मोटू पतलू जैसी सीरीज जैसा है। किरदारों के हाव भाव और उनकी देह भाषा देखकर दर्शकों को कहीं उत्तेजना नहीं होती। महिष्मती की कहानी और इसके साम्राज्य का इतना ज्यादा दोहन अब तक हो चुका है कि अब जो कुछ भी बनाया जा रहा है, जबर्दस्ती का लग रहा है। ये बात इस पर पैसा लुटाने वाले ओटीटी को भी शायद समझ आ रही है, तभी तो सीरीज का डिजिटल ट्रैक्शन इतना खराब रहा है। और, इसी पर पर्दा डालने के लिए ओटीटी ने शुक्रवार को ‘क्रिमिनल जस्टिस’ के चौथे सीजन की रिलीज डेट का एलान भी कर दिया।
हॉटस्टार के दामन का नया दाग
पता नहीं डिज्नी प्लस हॉटस्टार में नेटफ्लिक्स और प्राइम वीडियो जैसी सीरीज व फिल्मों की खरीद फरोख्त की ऑडिट होती है कि नहीं, लेकिन ‘बाहुबली क्राउन ऑफ ब्लड’ जैसी वेब सीरीज देखकर डिज्नी जैसे ब्रांड को भी दाग जरूर लगता है। इस सीरीज में आवाज देने वाले कलाकारों में शरद केलकर और समय ठक्कर को छोड़ दें तो बाकी किसी कलाकार की आवाज में इसके किरदारों के भाव पकडने की कोशिश तक नहीं दिखती और ये तब है जबकि यही सारे कलाकार बाहुबली की पिछली सीरीज में भी आवाजें दे चुके हैं। राजामौली की अगली फिल्म महेश बाबू के साथ बनने वाली है। महेश बाबू का भी समय अच्छा नहीं चल रहा है और अगर इस सीरीज जैसी ही कहीं उनकी फिल्म बन गई तो क्या ही हो पाएगा, उस फिल्म का!