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Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Azaad Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Ajay Devgn Aaman Devgan Rasha Thadani Abhishek Kapoor

Azaad Movie Review: इंसान और जानवर की दोस्ती की कमाल फिल्म बनाने से चूके अभिषेक, अमन और राशा अभी तैयार नहीं

Fri, 17 Jan 2025 12:16 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 17 Jan 2025 12:16 PM IST
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Azaad Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Ajay Devgn Aaman Devgan Rasha Thadani Abhishek Kapoor
आजाद - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
आजाद
कलाकार
अजय देवगन , अमन देवगन , राशा थडानी , डायना पेंटी , मोहित मलिक और पीयूष मिश्रा आदि
लेखक
रितेश शाह , सुरेश नाय , अभिषेक कपूर और चंदन अरोड़ा आदि
निर्देशक
अभिषेक कपूर
निर्माता
रॉनी स्क्रूवाला और प्रज्ञा कपूर
रिलीज:
17 जनवरी 2025
रेटिंग
2/5

फिल्म बनाना अगर शरबत बनाने जैसा हो तो एक बोतल में थोड़ी सी ‘बेताब’, थोडी सी ‘मर्द’ और एक चुटकी ‘लगान’ भी मिलाकर डाली जाए तो 1920 के कालखंड में बनी फिल्म ‘आजाद’ तैयार होगी। के पी सक्सेना की कोई 24 साल पहले ‘लगान’ के लिए रची बोली को आधार बनाकर लिखे गए संवादों से सांसें पाती फिल्म ‘आजाद’ से दो नए सितारे हिंदी सिनेमा में पदार्पण कर रहे हैं। एक हैं अमन देवगन, जिनकी मां नीलम से शायद उनके भाई अजय देवगन ने कभी अपने भांजे को हीरो बनाने का वादा रक्षा बंधन पर कर दिया होगा और दूसरी हैं राशा थडानी (या ठडानी) जिनके पिता अनिल थडानी देश के नंबर वन फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर हैं और जिनकी मां रवीना टंडन की अदाओं पर लोग अब तक फिदा हैं।

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Azaad Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Ajay Devgn Aaman Devgan Rasha Thadani Abhishek Kapoor
आजाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म ‘आजाद’ की एंड क्रेडिट्स में एक नाम संजय भारद्वाज का भी नजर आता है, जिनकी जिम्मेदारी फिल्म में स्क्रिप्ट का अनुवाद करने की रही। मतलब कि मूलत: ये हिंदी में महसूस की गई पटकथा नहीं है। मालूम ये भी होता है कि फिल्म ‘आजाद’ को देश का दिल समझे जाने वाले मध्य प्रदेश में शूट किया गया है और इसकी कहानी भी आजाद भारत के वहीं कहीं के एक इलाके में सेट की गई है। कहानी में चूंकि बागी भी हैं। चंबल की खंतियां और खाइयां भी हैं और लड़के को मोड़ा और लडकी को मोड़ी कहने का संयोग भी है तो माना जा सकता है कि ये फिल्म बुंदेलखंड की कहानी कहती है। ‘आजाद’ यहां उस घोड़े का नाम है जो समय से पहले जन्मा। शरीर से कमजोर था तो अंग्रेज अफसर ने उसे मार देने का मन बनाया लेकिन अपना हीरो विक्रम सिंह उर्फ ठाकुर उर्फ सरदार उसे अपनी मेहनत की कमाई से खरीद लाता है। दोनों की दोस्ती परवान चढ़ती है। आजाद बड़ा होकर एक ऐसा घोड़ा बनता है जो है तो मारवाड़ी लेकिन अपनी चाल, ढाल, फुर्ती और चपलता से कतई अरबी लगता है।

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Azaad Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Ajay Devgn Aaman Devgan Rasha Thadani Abhishek Kapoor
आजाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

मालिक और उसके सहायक के बीच की समन्वयता यानी ट्यूनिंग कैसी होनी चाहिए, उसे श्याम नारायण पाण्डेय ने क्या ही खूबसूरती से अपनी कविता में लिखा है, राणा की पुतली फिरी नहीं तब तक चेतक मुड़ जाता था..! यहां कहानी इसी चेतक के किस्से से ही शुरू होती है। नानी का दुलारा नवासा आजाद को देखता है तो देखता ही रह जाता है। उसे बागी सरदार के इस घोड़े से  प्यार हो जाता है। और, इसी बीच उसे इलाके के जमींदार की बेटी से भी प्यार हो जाता है। कौन सा प्यार है, और कौन सा आकर्षण, इसे सुलझाने में फिल्म गुजर जाती है। आजाद का मालिक ठाकुर है। पहले किसान था। अब बागी है। नानी के नवासे का नाम गोविंद है। उसकी प्रेमिका नाम राधा, रुक्मिणी कुछ भी हो सकता था लेकिन लिखने वालों को त्रेया और द्वापर का संगम कराना, अर्ध कुंभ की दौड़ वाले क्लाइमेक्स की फिल्म में अच्छा लगा होगा, सो जमींदार की लड़की सबने मिलकर रखा, जानकी! गोविंद की प्रेमिका जानकी समझने की मति में ही इस फिल्म का असल मर्म छिपा है। 

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Azaad Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Ajay Devgn Aaman Devgan Rasha Thadani Abhishek Kapoor
आजाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

आजाद दारू पीता है। ठाकुर के सिवा किसी दूसरे को अपनी काठी पर सवार नहीं होने देता। बागी ऐसे हैं कि 1920 में रात होते ही इक्कीसवीं सदी के म्यूजिक पर बना आइटम नंबर देखते हैं। और, हीरो ऐसा कि सपने में पहली बार अपनी प्रेमिका ‘जानकी’ को देखता है तो वह उसे आइटम नंबर करती दिखती है। किसी नवोदित अभिनेत्री का ऐसा फूहड़ परिचय (इंट्रो) किसी दूसरी हिंदी फिल्म में पहले भी रहा होगा, याद नहीं पड़ता। रवीना की पहली फिल्म ‘पत्थर के फूल’ इस बीच मुझे खूब याद आती रही। और, रवीना पर फिल्माए गए ‘टिप टिप बरसा पानी’ जैसे तमाम कामुक गाने शायद फिल्म ‘आजाद’ बनाने वालों को जरूर याद आते रहे होंगे। नहीं तो, पहली ही फिल्म में राशा से ‘उई अम्मा’ कराने का तुक फिल्म की कहानी के हिसाब से कहीं नहीं है। राशा और अमन दोनों को समय से पहले लॉन्च कर दिया गया है, शायद बस इसलिए कि दूसरे स्टार किड्स जो हाल फिलहाल में लॉन्च हुए, उनमें से कोई भी बड़े परदे पर अपने बूते पूरी फिल्म चलाने लायक है ही नहीं। ऐसा करिश्मा हिंदी सिनेमा में आखिरी बार साल 2000 में फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ में हुआ था। 

Azaad Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Ajay Devgn Aaman Devgan Rasha Thadani Abhishek Kapoor
आजाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म ‘आजाद’ अभिषेक कपूर की बतौर निर्देशक सातवीं फिल्म है। लेकिन, हिंदी सिनेमा के दर्शकों के बीच वह अब भी ट्विंकल खन्ना के एक्स बॉयफ्रेंड गट्टू के नाम से पहचाने जाते हैं। अजय देवगन के भांजे को लेकर ये फिल्म बनाने वाले गट्टू अभिनेता जीतेंद्र के भांजे हैं। जीतेंद्र की बहन मधुबाला के बेटे। अभिषेक के सिनेमा पर पश्चिम सिनेमा के तगड़ा असर साफ देखा जा सकता है। ‘आजाद’ में वह ‘बेताब’ और ‘मर्द’ जैसी नकचढ़ी हीरोइन गढ़ना चाहते हैं लेकिन फिर उनका दिल ‘लगान’ की गौरी पर भी मचल जाता है। फिल्म का हीरो कौन है, इसे लेकर अभिषेक काफी कन्फ्यूज दिखते हैं। दो तिहाई फिल्म अजय देवगन खींचते हैं और फिर जब बारी अमन की आती है तो ढप्पा हो जाता है। फिल्म के संवाद बहुत अटपटे हैं। खड़ी बोली से अवधी मिश्रित भोजपुरी और भोजपुरी मिश्रित बुंदेलखंडी में भटकती रहने वाली इस फिल्म में एक डायलेक्ट कोच भी है, ये जानकर और हैरानी होती है।

Azaad Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Ajay Devgn Aaman Devgan Rasha Thadani Abhishek Kapoor
आजाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

रितेश शाह की लिखी दो फिल्में एक साथ सिनेमाघरों में पहुंची हैं। ‘इमरजेंसी’ में उनके लिखे की मरम्मत खुद ‘बाहुबली’ के लेखक के वी विजयेंद्र प्रसाद ने की है। यहां, उनके लिखे को सुधारने की कोशिश चंदन अरोड़ा ने की है, लेकिन बात बनी नहीं। फिल्म कहानी, पटकथा और संवाद तीनों स्तर पर बेहद कमजोर है। अजय देवगन का किरदार इकलौता ऐसा किरदार है जो फिल्म की रीढ़ बनता दिखता है, लेकिन वहां भी लोचा है। उनकी और आजाद की दोस्ती पर ही ये फिल्म बनी होती तो ये नई सदी की ‘हाथी मेरे साथी’ या ‘तेरी मेहरबानियां’ जैसी हिट फिल्म बन सकती थी। धन्यवाद मेनका गांधी का, कि फाइनली हम लोग हिंदी फिल्मों में जानवरों पर आधारित फिल्में देख सकते हैं। ऐसी अगली कोशिश जरूर कामयाब हो, ऐसी दुआ हर हिंदी फिल्म दर्शक की रहेगी। लेकिन, अधपकी फिल्म है ‘आजाद’ और वैसा ही अधपका इसका निर्देशन, संगीत और फिल्मांकन है। 

Azaad Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Ajay Devgn Aaman Devgan Rasha Thadani Abhishek Kapoor
आजाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म में जमींदार बने पियूष मिश्रा का किरदार और फिल्म ‘आजाद’ की प्रोडक्शन डिजाइन एक जैसी है, बोले तो रुआबदार बनने की कोशिश करती एक देसी आत्मा। पियूष का देसीपन निर्देशक को समझ नहीं आया और रुआबदार बनने की कोशिश में पियूष बड़े परदे पर पहले भी फेल हो चुके हैं। डायना पेंटी की  तारीफ करने का मन जरूर होता है कि अरसे बाद वह बड़े परदे पर दिखीं और जमींदारों के घरों में कैद एक प्रेमिका का किरदार बहुत ही शालीन तरीके से निभा ले गई हैं। क्रूर जमींदार के किरदार में मोहित मलिक ने अमिताभ बच्चन की ‘कुली’ का डैन धनोआ बनने की पूरी कोशिश की लेकिन विफल रहे। हंटर, चाबुक, लॉन्ग बूट पहनने के बाद किरदार क्या होता है, इसे समझने के लिए उन्हें प्राण के विलेन वाले दौर के किरदारों को देखना चाहिए।  

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