मूवी रिव्यू- एलिटा: बैटल एंजेल
कलाकार – रोजा सालाजार, क्रिस्टोफ वाल्ट्ज, जेनेफिर कोनेली, महेरशाला अली आदि।
निर्देशक – रॉबर्ट रॉड्रिग्ज। पटकथा – जेम्स कैमरॉन, रॉबर्ट रॉड्रिग्ज, ए कालोग्रिडिस
रेटिंग – ***1/2 साढ़े तीन स्टार
किसी एक फिल्म की मेकिंग के दौरान लगने वाले समय पर जब भी भविष्य में चर्चा होगी तो टर्मिनेटर, टाइटैनिक और अवतार बनाने वाले जेम्स कैमरॉन की इस फिल्म का जिक्र भी जरूर आएगा। जापान के मशहूर क्रिएटर युकितो किशोरा के बनाए किरदार एलिटा पर फिल्म बनाने का फैसला कैमरॉन ने 19 साल पहले किया था।
जाहिर है पिछले दो दशक में सिनेमा को बनाने के तकनीक के साथ साथ कहानियां कहने का तरीका भी काफी कुछ बदल गया है लेकिन, एलिटा: बैटल एंजेल अपने स्पेशल इफेक्ट्स और मशीनों में जागती मानवीय संवेदनाओं के लिए हमेशा याद रखी जाएगी।
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हिंदी सिनेमा को हॉलीवुड सिनेमा की चुनौती साल दर साल बढ़ती जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह है हिंदी सिनेमा का अब भी देश की हिंदी पट्टी के दर्शकों तक उतनी मजबूती से न पहुंच पाना, जितनी ऊर्जा से हॉलीवुड फिल्में हिंदी में डब होकर देश के छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंच बना रही हैं। एलिटा की कहानी भले थोड़ी पुरानी और टिपिकल फिल्मी फॉर्मूले वाली लगती हो लेकिन इसका असर इन गैर मेट्रो शहरों के दर्शकों पर ही सबसे ज्यादा होने वाला है।
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भविष्य की कहानी कहती एलिटा फिल्म कहानी है कबाड़ में पड़ी एक मशीन के पुनर्जीवित होकर अपनी शक्तियों को पहचानने की और खुद को खत्म करने के लिए उतारू मशीनों से मुकाबले की। कहानी में पिता और बेटी के अद्भुत रिश्ते को दिखाने के साथ साथ एक प्रेम कहानी भी अंतर्धारा में चलती रहती है।
कहानी का हर किरदार बहुत ही करीने से सजाया गया है और हर किरदार को ये भी पता है कि उसे करना क्या है। हो सकता है कि फिल्म के लीड किरदार के ग्राफ की तमाम समानताएं भी दर्शकों को पहले रिलीज हो चुकी हॉलीवुड फिल्मों से दिखें, लेकिन इसके बावजूद एलिटा का किरदार ऐसा है जिसके प्यार में पड़ने से दर्शक खुद को रोक नहीं पाएंगे।
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एक काल्पनिक संसार की कहानी रचते समय बतौर स्क्रिप्ट राइटर जेम्स कैमरॉन ने अपने साथियों के साथ वैसी ही काबिलियत दिखाई है, जैसी उनकी फिल्मों टर्मिनेटर या अवतार में देखने को मिल चुकी है। एलिटा का संसार अपने आप में संपूर्ण है और, कोई संसार पूरी तरह से निखरता तभी है जब अच्छाई के साथ इसमें बुराई भी मौजूद हो। राम को महान बनाने के लिए एक रावण की जरूरत हर युग में होती है। एलिटा के संदर्भ भी गुड और बेड के इन्हीं संदर्भों से प्रेरणा पाते हैं।
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फिल्म का सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट है इसके कलाकारों का अभिनय। मोशन कैप्चर तकनीक से बनी फिल्म में रोजा सालाजार ने एलिटा के लिए बहुत ही जबरदस्त तरीके से भाव प्रकट किए हैं। ऑस्कर जीत जुके क्रिस्टोफ वाल्ट्ज उनके संरक्षक बने हैं और दोनों के बीच की केमिस्ट्री फिल्म को एक नई ऊंचाई तक ले जाती है। हाउस ऑफ कार्ड्स से शोहरत बटोर चुके महेरशाला अली का किरदार थोड़ा कमजोर दिखता है, लेकिन कहानी के हिसाब से वह भी खुद को क्लाइमेक्स तक साबित कर ही देते हैं।
तकनीकी तौर से फिल्म सौ में सौ नंबर पाने वाला काम करती है। फिल्म के स्पेशल इफेक्ट्स ढंग से देखने हो तो फिल्म को थ्री डी या आईमैक्स सिनेमाघरों में ही देखन चाहिए लेकिन, आपके शहर में अगर इसकी सुविधा नहीं भी है तो भी फिल्म आपका इस वीकएंड का भरपूर मनोरंजन है। सिनमैटोग्राफी लाजवाब है और फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक है सोने पर सुहागा। अमर उजाला वीकली रिव्यू में फिल्म एलिटा: बैटल एंजेल को मिलते हैं साढ़े तीन स्टार।