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Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Abhay Season 3 Review in Hindi by Pankaj Shukla Kunal Kemmu Ken Ghosh Zee Studios Zee5

Abhay Season 3 Review: कुणाल खेमू के लिए इस अपराध कथा से विदा लेने का समय, बेअसर रहा ‘अभय’ का तीसरा सीजन

Fri, 08 Apr 2022 01:05 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 08 Apr 2022 01:05 PM IST
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Abhay Season 3 Review in Hindi by Pankaj Shukla Kunal Kemmu Ken Ghosh Zee Studios Zee5
अभय 3 - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
अभय (सीजन 3)
कलाकार
कुणाल खेमू , विजय राज , राहुल देव , तनुज विरवानी , दिव्या अग्रवाल , आशा नेगी और निधि सिंह
लेखक
सुधांशु शर्मा , दीपत्क दास , श्रीनिवास अबरोल , शुभम शर्मा और अपर्णा नादिग
निर्देशक
केन घोष
निर्माता
जी स्टूडियोज
ओटीटी
जी5
रेटिंग
2/5

जी5 की अपने दर्शकों और अपने ग्राहकों को सहेज कर रखने की एक और कोशिश है उसकी अपराध कथा ‘अभय’ का तीसरा सीजन। दिलचस्प ही है कि जिस कंपनी सोनी में जी का विलय होने जा रहा है, उसके ओटीटी सोनी लिव ने इसी मौके पर मुकाबले में अपनी एक वेब सीरीज ‘गुल्लक’ का भी तीसरा सीजन उतारा है। मिलन से पहले के इस मुकाबले में जाहिर है सोनी लिव को ही जीतना है लेकिन उससे पहले जी5 की अपनी ब्रांडिंग दिन पर दिन कमजोर होती दिखती है। सोनी ने अपने सारी कहानियां अपने ही स्टूडियो स्टूडियो नेक्स्ट में बनानी शुरू की हैं, जी ने भी ‘अभय 3’ का निर्माण अपनी ही कंपनी जी स्टूडियोज में किया है। दूध में पानी की तरह मिल जाने की घड़ी से पहले अभी दोनों कंपनियों के बीच बहुत लिखा पढ़ी होनी है। लेकिन, इस हिसाब किताब में जब भी जिक्र ‘अभय 3’ का आएगा, ये एक बेहतरीन विचार की कमजोर परिणीति के रूप में याद किया जाएगा।

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Abhay Season 3 Review in Hindi by Pankaj Shukla Kunal Kemmu Ken Ghosh Zee Studios Zee5
अभय 3 - फोटो : social media

निर्देशक केन घोष ने ‘अभय’ नाम का जो किरदार अपने लेखकों के साथ मिलकर विकसित किया है, वह अब दिन में सपने देखने लगा है। वह भी डरावने। बेटे को लेकर उसकी अपनी अलग चिंता है। और, कहानी में इस बार चिताओं से चिंतन प्राप्त करने वाले बाबा की कहानी है। कहानी में आदि है। अंत है। मृत्यु भी है। बस मोक्ष नहीं है। विद्या को मुक्ति का साधन माना गया है। लेकिन, सत्य यही है कि कलियुग में जो जितना पढ़ लिख गया, उतना ही धनवान होने का उसका सपना गाढ़ा होता गया। ‘अभय 3’ शायद इस कहानी की मुक्ति ही हो क्योंकि अब ये कहानी आगे बढ़ती नहीं घिसटती दिखती है। देश में धर्म और पंथों की भरमार है। संप्रदाय भी इनमें से निकले लेकिन इस कहानी की बाबा घनघोर है। अघोर से आगे है। और, अभय उनके पीछे है। कहने को कहानी रोमांच जगाती है। लेकिन ये कहानी जबर्दस्ती की बनाई हुई लगती है और तभी शायद इसमें आधा दर्जन कलमवीरों को जूझना भी पड़ा है।

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Abhay Season 3 Review in Hindi by Pankaj Shukla Kunal Kemmu Ken Ghosh Zee Studios Zee5
ABHAY 3 - फोटो : Youtube grab

केन घोष हिंदी सिनेमा के काबिल निर्देशक रहे हैं। शाहिद कपूर को बड़े परदे का स्टार उन्होंने ही अपनी फिल्म ‘इश्क विश्क’ में बनाया। अब वह कुणाल खेमू को जीवनदान देने वाले निर्देशक के रूप में पहचाने जाते हैं। पर वेब सीरीज ‘अभय 3’ फिर एक बार उनके लिए खतरे की घंटी बनती दिख रही है। ये पूरी तरह भर्ती की सीरीज दिखती है। कथा. पटकथा और संवाद मिलाकर कुल पांच लोग इसे लिख रहे हैं। इस पंचायत से जो कहानी बनी है, वह बेढंगी है। विजय राज के किरदार के तिलिस्म में आकर्षण नहीं है। सम्मोहन नहीं है और ही विलक्षणा के दर्शन इसमें होते हैं। राहुल देव से उम्मीदें बहुत थीं लेकिन वह भी कथा के विस्तार का बस एक पन्ना भर बनकर रह गए। केन घोष के निर्देशन में बन रही सीरीज में जब ऐसे काबिल कलाकारों का हाल ऐसा हो तो फिर बाकी से उम्मीद ही क्या करना..

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Abhay Season 3 Review in Hindi by Pankaj Shukla Kunal Kemmu Ken Ghosh Zee Studios Zee5
abhay 3 - फोटो : Youtube grab

वेब सीरीज ‘अभय’ के तीसरे सीजन की कुछ दिक्कतें पुरानी हैं और कुछ नई ओढी हुई हैं। कहानी के हिसाब से परदे पर दिखने वाली भौगोलिक स्थितियों बीते सीजन में ही सामने आ गई थीं। लेकिन सीरीज बनाने वालों ने इसमें किसी बेहतरी की कोशिश की नहीं। किरदारों के संवादों में भी उनकी पृष्ठभूमि की कमजोरी दिखती है। ‘मनोहर कहानियां’ का वीडियो संस्करण बनाने के चक्कर में इसके लेखक अपनी कहानी की मूल आत्मा यानी इसका डीएनए ही भूल गए। आगे पीछे करके कहानी को चलाने में आनंद तो है पर इसके खतरे भी कम नहीं है और ये खतरे तब और बढ़ जाते हैं जब आपके कलाकारों के अभिनय का दायरा ऐसे मौकों पर बहुत सीमित हो।

Abhay Season 3 Review in Hindi by Pankaj Shukla Kunal Kemmu Ken Ghosh Zee Studios Zee5
abhay 3 - फोटो : Youtube grab

जी5 के पास अपनी इस अपराध कथा को देसी सत्यकथाओं का चोला पहनाने का मौका पूरा था, लेकिन बिना रिसर्च और बिना अपने दर्शकों की भावनाओं को जाने बनी वेब सीरीज ‘अभय’ के तीसरे सीजन में इसका विदागान झलकने लगा है। अगर ये सीरीज आगे खींचनी है तो इसके लेखकों को नए सिरे से मेहनत करनी ही होगी नहीं तो कुणाल खेमू को अब इस किरदार से हाथ जोड़ लेने चाहिए। जितना कुछ कुणाल इस कहानी को दे सकते थे, वह दे चुके हैं, अब अभिनय के नाम पर कुछ नया करने को उनके लिए इसमें बचा नहीं है। आशा नेगी और निधि सिंह भी बोर करते हैं। विद्या मालवडे और एलनाज नौरोजी की झलकियां कहानी में रोचक मोड़ लाती तो हैं पर इनका असर दूरगामी नहीं रहता।

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