{"_id":"68f22c91550f606bb008071f","slug":"kantara-chapter-1-actor-gulshan-devaiah-exclusive-interview-praises-rishab-shetty-2025-10-17","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"'कांतारा की ओपनिंग रजनीकांत की फिल्म से बड़ी थी', गुलशन देवैया ने अमर उजाला से की खास बातचीत","category":{"title":"Entertainment","title_hn":"मनोरंजन","slug":"entertainment"}}
'कांतारा की ओपनिंग रजनीकांत की फिल्म से बड़ी थी', गुलशन देवैया ने अमर उजाला से की खास बातचीत
सार
Gulshan Devaiah Exclusive Interview: अभिनेता गुलशन देवैया ने हाल ही में अमर उजाला से खास बातचीत करते हुए 'कांतारा चैप्टर 1' की सफलता और अपने करियर पर बात की है।
विज्ञापन
गुलशन देवैया
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
फिल्म 'कांतारा चैप्टर 1' में नजर आ रहे अभिनेता गुलशन देवैया ने अमर उजाला से खास बातचीत की है। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों को लेकर बात की है। साथ ही अपने काम के अनुभव को भी साझा किया है। चलिए जानते हैं गुलशन ने क्या कुछ कहा है।
विज्ञापन
लोग अक्सर बॉक्स ऑफिस पर फिल्मों की तुलना करते हैं। इस पर आपका क्या कहना है?
मैं नहीं मानता कि फिल्मों की तुलना करना सही है। हर फिल्म की अपनी आत्मा होती है, हर डायरेक्टर की अपनी समझ होती है। किसी को फिल्म पसंद आई या नहीं, बात वहीं तक रखनी चाहिए। कभी-कभी लोग कहते हैं..इस फिल्म की ओपनिंग उस फिल्म से ज्यादा है या कांतारा की ओपनिंग रजनीकांत की फिल्म से बड़ी थी। लेकिन क्या ये तुलना ठीक है? रजनीकांत जैसी लेजेंडरी हस्ती की मेहनत, उनकी विरासत और उनके करियर को इस तरह से मापना उचित नहीं है। उन्होंने वर्षों की मेहनत से जो मुकाम बनाया है, उसका सम्मान होना चाहिए। मैंने भी कहा था कि तुलना करना अपने आप में एक तरह की असम्मानजनक बात है। फिल्म आपको पसंद आई या नहीं, वहीं तक बात खत्म हो जानी चाहिए। हर किसी का हक है अपनी राय रखने का, लेकिन तुलना नहीं करनी चाहिए।
विज्ञापन
Trending Videos
गुलशन देवैया
- फोटो : इंस्टाग्राम
पीआर या मार्केटिंग सही न होने की वजह से उसे पहचान नहीं मिली?
ऐसा नहीं है कि मैं किसी को दोष देता हूं। सच तो यह है कि फिल्म को प्रमोट करना आसान नहीं है। पैसे लगते हैं ...प्रिंट्स, प्रमोशन, सबका खर्च होता है। मुफ्त में कुछ भी नहीं होता। वर्ड ऑफ माउथ सबसे असरदार चीज है, लेकिन आजकल इतने डिस्ट्रैक्शन हैं कि किसी एक फिल्म पर ध्यान टिकाना बहुत मुश्किल हो गया है। कई बार छोटे बजट की फिल्में बहुत अच्छी होती हैं, लेकिन उनके पास प्रमोशन के लिए पैसा नहीं होता। लोग फिर कहते हैं कि सिनेमा नहीं जाएंगे, घर पर देख लेंगे। इससे थिएटर और सिनेमा के बिजनेस पर असर पड़ता है। सिनेमा हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है और आगे भी रहेगा। नए फॉर्मैट्स, जैसे सीरीज या डिजिटली रिलीज़ होने वाली फिल्में, अपने साथ नए चैलेंज लेकर आती हैं। हमें बस ईमानदारी से उन चुनौतियों का सामना करते रहना है।
कुछ कलाकारों की बड़ी टीमों की वजह से निर्माता अच्छी कहानियां नहीं बना पाते। आप मानते हैं ऐसा होता है?
देखिए, यह हर किसी के साथ नहीं होता। कुछ खास कलाकारों के साथ ऐसा देखने को मिलता है, लेकिन इसे सब पर लागू नहीं किया जा सकता। मैंने कई वरिष्ठ कलाकारों के साथ काम किया है जो बिल्कुल अकेले आते हैं, उनके साथ कोई बड़ा दल नहीं होता। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि सभी ऐसे हैं। हां, कुछ लोगों के अपने कारण होते हैं। कई बार लोग अपनी छवि बनाए रखने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। कुछ अपने व्यक्तित्व और छवि को एक निश्चित ढांचे में रखना चाहते हैं, इसलिए कुछ रणनीतियां बनाते हैं। कभी-कभी ये तरीके सफल हो जाते हैं, लेकिन कई बार उलटा असर भी डालते हैं और निर्माता के लिए भारी पड़ जाते हैं।
मैं यह नहीं कहूंगा कि यह सही है या गलत, लेकिन इतना जरूर मानता हूं कि हमें संतुलन बनाए रखना चाहिए। कलाकारों को भी समझदारी और सादगी के साथ काम करना चाहिए ताकि पूरी टीम और फिल्म का हित बना रहे। आखिरकार, सिनेमा सामूहिक प्रयास से बनता है।
ऐसा नहीं है कि मैं किसी को दोष देता हूं। सच तो यह है कि फिल्म को प्रमोट करना आसान नहीं है। पैसे लगते हैं ...प्रिंट्स, प्रमोशन, सबका खर्च होता है। मुफ्त में कुछ भी नहीं होता। वर्ड ऑफ माउथ सबसे असरदार चीज है, लेकिन आजकल इतने डिस्ट्रैक्शन हैं कि किसी एक फिल्म पर ध्यान टिकाना बहुत मुश्किल हो गया है। कई बार छोटे बजट की फिल्में बहुत अच्छी होती हैं, लेकिन उनके पास प्रमोशन के लिए पैसा नहीं होता। लोग फिर कहते हैं कि सिनेमा नहीं जाएंगे, घर पर देख लेंगे। इससे थिएटर और सिनेमा के बिजनेस पर असर पड़ता है। सिनेमा हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है और आगे भी रहेगा। नए फॉर्मैट्स, जैसे सीरीज या डिजिटली रिलीज़ होने वाली फिल्में, अपने साथ नए चैलेंज लेकर आती हैं। हमें बस ईमानदारी से उन चुनौतियों का सामना करते रहना है।
कुछ कलाकारों की बड़ी टीमों की वजह से निर्माता अच्छी कहानियां नहीं बना पाते। आप मानते हैं ऐसा होता है?
देखिए, यह हर किसी के साथ नहीं होता। कुछ खास कलाकारों के साथ ऐसा देखने को मिलता है, लेकिन इसे सब पर लागू नहीं किया जा सकता। मैंने कई वरिष्ठ कलाकारों के साथ काम किया है जो बिल्कुल अकेले आते हैं, उनके साथ कोई बड़ा दल नहीं होता। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि सभी ऐसे हैं। हां, कुछ लोगों के अपने कारण होते हैं। कई बार लोग अपनी छवि बनाए रखने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। कुछ अपने व्यक्तित्व और छवि को एक निश्चित ढांचे में रखना चाहते हैं, इसलिए कुछ रणनीतियां बनाते हैं। कभी-कभी ये तरीके सफल हो जाते हैं, लेकिन कई बार उलटा असर भी डालते हैं और निर्माता के लिए भारी पड़ जाते हैं।
मैं यह नहीं कहूंगा कि यह सही है या गलत, लेकिन इतना जरूर मानता हूं कि हमें संतुलन बनाए रखना चाहिए। कलाकारों को भी समझदारी और सादगी के साथ काम करना चाहिए ताकि पूरी टीम और फिल्म का हित बना रहे। आखिरकार, सिनेमा सामूहिक प्रयास से बनता है।
विज्ञापन
गुलशन देवैया
- फोटो : इंस्टाग्राम @gulshandevaiah78
इस इंडस्ट्री में खुद को बनाए रखने के लिए आपकी क्या रणनीति रहती है?
मैंने कभी अपनी क्षमताओं को दूसरों की राय पर आधारित नहीं किया। मुझे खुद पता होता है कि मैं अच्छा काम कर रहा हूं या नहीं। मुझमें अपने सफर को लेकर एक भरोसा है। वो मेरा है और उसके फैसले भी मैं ही लूंगा। कई बार सही निर्णय होते हैं, कई बार गलत, लेकिन वो मेरे निर्णय होते हैं। मैं किसी को दोष नहीं देता। अगर गलती हो भी जाए तो उससे सीखता हूं, बस। शुरू में लोगों को लगता था कि मैं पागल हूं, लेकिन मेरे अंदर हमेशा एक योजना रही है, भले वो बार-बार बदलती रहती है। मेरा मानना है कि इंसान को अपनी दिशा खुद तय करनी चाहिए। जहाँ सिनेमा मुझे ले जाएगा, मैं वहीं जाऊंगा। फिलहाल सब ठीक चल रहा है और आगे क्या होगा, वो वक्त बताएगा।
यह खबर भी पढ़ें: इश्क से रोशन हुईं बॉलीवुड की दिवाली पार्टी, सुहाना-अगस्त्य से लेकर ये रूमर्ड कपल्स साथ नजर आए
मैंने कभी अपनी क्षमताओं को दूसरों की राय पर आधारित नहीं किया। मुझे खुद पता होता है कि मैं अच्छा काम कर रहा हूं या नहीं। मुझमें अपने सफर को लेकर एक भरोसा है। वो मेरा है और उसके फैसले भी मैं ही लूंगा। कई बार सही निर्णय होते हैं, कई बार गलत, लेकिन वो मेरे निर्णय होते हैं। मैं किसी को दोष नहीं देता। अगर गलती हो भी जाए तो उससे सीखता हूं, बस। शुरू में लोगों को लगता था कि मैं पागल हूं, लेकिन मेरे अंदर हमेशा एक योजना रही है, भले वो बार-बार बदलती रहती है। मेरा मानना है कि इंसान को अपनी दिशा खुद तय करनी चाहिए। जहाँ सिनेमा मुझे ले जाएगा, मैं वहीं जाऊंगा। फिलहाल सब ठीक चल रहा है और आगे क्या होगा, वो वक्त बताएगा।
यह खबर भी पढ़ें: इश्क से रोशन हुईं बॉलीवुड की दिवाली पार्टी, सुहाना-अगस्त्य से लेकर ये रूमर्ड कपल्स साथ नजर आए
गुलशन देवैया
- फोटो : इंस्टाग्राम @gulshandevaiah78
15 साल पहले के खुद को क्या सलाह देंगे?
सबसे बड़ी सलाह यही होगी कि सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल सीखो। उस समय मुझे इसके बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था। मैं बस सेल्फी लेता और पोस्ट कर देता था, जैसे सब लोग कर रहे थे। मेरे पास नोकिया फोन था, जो अच्छी तस्वीरें खींचता था, लेकिन मैं इसे क्रिएटिव तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता था। बस फुटलेस सेल्फी डालना ही मेरी आदत थी।
सच कहूं तो यह कोई बड़ी गलती नहीं थी। मैंने हमेशा वही किया जो मुझे करना था। गलतियाँ कभी-कभी हो जाती हैं, या लोग मेरे एक्शन से नाराज़ हो जाते हैं, लेकिन हर किसी को खुश करना संभव नहीं है। मैं हमेशा अपने निर्णय पर भरोसा करता हूं और जो मुझे सही लगता है, वही करता हूं।
करियर में ब्रेकथ्रू पल कब आया?
मेरे लिए ऐसा पल 'शैतान' के समय आया। जब हम इसे शूट कर रहे थे, मुझे लगा कि कुछ अलग हो रहा है। यह अच्छा होगा या बुरा, मैं नहीं कह सकता था, लेकिन यह अलग था। हम कुछ नया कर रहे थे और मुझे लगता था कि लोग इसे अलग तरीके से रिसीव करेंगे। हमने फिल्म की बहुत पब्लिसिटी भी की और मुझे उस समय एक अहसास था कि इससे कुछ बदलाव होगा।
सबसे बड़ी सलाह यही होगी कि सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल सीखो। उस समय मुझे इसके बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था। मैं बस सेल्फी लेता और पोस्ट कर देता था, जैसे सब लोग कर रहे थे। मेरे पास नोकिया फोन था, जो अच्छी तस्वीरें खींचता था, लेकिन मैं इसे क्रिएटिव तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता था। बस फुटलेस सेल्फी डालना ही मेरी आदत थी।
सच कहूं तो यह कोई बड़ी गलती नहीं थी। मैंने हमेशा वही किया जो मुझे करना था। गलतियाँ कभी-कभी हो जाती हैं, या लोग मेरे एक्शन से नाराज़ हो जाते हैं, लेकिन हर किसी को खुश करना संभव नहीं है। मैं हमेशा अपने निर्णय पर भरोसा करता हूं और जो मुझे सही लगता है, वही करता हूं।
करियर में ब्रेकथ्रू पल कब आया?
मेरे लिए ऐसा पल 'शैतान' के समय आया। जब हम इसे शूट कर रहे थे, मुझे लगा कि कुछ अलग हो रहा है। यह अच्छा होगा या बुरा, मैं नहीं कह सकता था, लेकिन यह अलग था। हम कुछ नया कर रहे थे और मुझे लगता था कि लोग इसे अलग तरीके से रिसीव करेंगे। हमने फिल्म की बहुत पब्लिसिटी भी की और मुझे उस समय एक अहसास था कि इससे कुछ बदलाव होगा।