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#MeToo यौन उत्पीड़न के खिलाफ एक्ट्रेसेज ने खोला मोर्चा, जुटा लिए सवा करोड़
बीबीसी, हिन्दी
Updated Tue, 02 Jan 2018 11:39 AM IST
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अमेरिका में फिल्म उद्योग और दूसरी कामकाजी जगहों पर यौन उत्पीड़न के मुकाबले के लिए एक अभियान की शुरुआत की गई है। इस प्रोजेक्ट में तीन सौ से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं। इनमें नताली पोर्टमैन सहित कई अभिनेत्रियां, लेखक और निर्देशक शामिल हैं। इस अभियान को नाम दिया गया है 'टाइम्स अप'। न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार में एक पन्ने का विज्ञापन देकर इस अभियान के बारे में जानकारी दी गई है।
इसमें कहा गया है, "मनोरंजन जगत की महिलाओं की ओर से हर जगह मौजूद महिलाओं से बदलाव के लिए एकजुट होने की अपील"। ये अभियान फिल्म प्रोड्यूसर हार्वे वाइनस्टीन पर कई हाई प्रोफाइल अभिनेत्रियों की ओर से लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद शुरू किया गया है।
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इसमें कहा गया है, "मनोरंजन जगत की महिलाओं की ओर से हर जगह मौजूद महिलाओं से बदलाव के लिए एकजुट होने की अपील"। ये अभियान फिल्म प्रोड्यूसर हार्वे वाइनस्टीन पर कई हाई प्रोफाइल अभिनेत्रियों की ओर से लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद शुरू किया गया है।
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कानूनी मदद
इस अभियान को सैंकड़ों अभिनेत्रियों का समर्थन हासिल है। इनमें नताली पोर्टमैन, रीस वीदरस्पून, केट ब्लैंनचेट, इवा लोंगोरिया और एमा स्टोन शामिल हैं। अभियान के तहत डेढ़ करोड़ डालर जुटाने का लक्ष्य रखा गया है और ये अभिनेत्रियां 1 करोड़ 30 लाख डॉलर जमाकर चुकी हैं। इस रकम का इस्तेमाल काम की जगह उत्पीड़न का शिकार हुए महिलाओं और पुरुषों की कानूनी मदद के लिए होगा।
इस अभियान का बुनियादी मकसद खेती या फिर फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों, केयरटेकर और वेटर का काम करने वालों की मदद करना है। जिनके पास अपना बचाव करने के लिए धन नहीं होता है। इस अभियान के जरिए "लैंगिक असमानता और शक्ति के असंतुलन को दूर करने" की मांग भी उठाई जाएगी। इसके जरिए प्रभाव की जगहों पर ज्यादा महिलाओं को मौके देने और वेतन की असमानता को दूर करने पर भी जोर दिया जाएगा।
दिसंबर में टाइम मैगजीन ने यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिलाओं और पुरुषों को "द साइलेंस ब्रेकर्स" के तौर पर साल 2017 का "पर्सन ऑफ द ईयर" करार दिया था।।बीते साल #MeToo हैशटैग के तहत दुनिया भर की महिलाओं और पुरुषों ने यौन उत्पीड़न से जुड़ी अपनी कहानियां साझा की थीं। अक्टूबर से दिसबंर 2017 के बीच ट्विटर और फेसबुक पर ये हैशटैग 60 लाख बार इस्तेमाल हुआ था।
इस अभियान का बुनियादी मकसद खेती या फिर फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों, केयरटेकर और वेटर का काम करने वालों की मदद करना है। जिनके पास अपना बचाव करने के लिए धन नहीं होता है। इस अभियान के जरिए "लैंगिक असमानता और शक्ति के असंतुलन को दूर करने" की मांग भी उठाई जाएगी। इसके जरिए प्रभाव की जगहों पर ज्यादा महिलाओं को मौके देने और वेतन की असमानता को दूर करने पर भी जोर दिया जाएगा।
दिसंबर में टाइम मैगजीन ने यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिलाओं और पुरुषों को "द साइलेंस ब्रेकर्स" के तौर पर साल 2017 का "पर्सन ऑफ द ईयर" करार दिया था।।बीते साल #MeToo हैशटैग के तहत दुनिया भर की महिलाओं और पुरुषों ने यौन उत्पीड़न से जुड़ी अपनी कहानियां साझा की थीं। अक्टूबर से दिसबंर 2017 के बीच ट्विटर और फेसबुक पर ये हैशटैग 60 लाख बार इस्तेमाल हुआ था।