Roopantara: 'रूपंतरा' में दिखा वर्तमान और भविष्य का चतुराई भरा संगम, निर्देशक ने फिल्म को लेकर खोले कई राज
'रूपंतरा' को फिल्म आलोचकों और दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। इस फिल्म में भविष्य की दुनिया को दिखाया गया है, जिसे काफी पसंद भी किया गया। अब फिल्म के निर्देशक ने इसे लेकर कई दिलचस्प खुलासे किए हैं।
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फिल्म 'कल्कि 2898 एडी' के बाद इस साल एक और फिल्म रिलीज हुई, जिसमें भविष्य की दुनिया को दिखाया गया। इस साल जुलाई में रिलीज हुई कन्नड़़ फिल्म 'रूपंतरा' में भी डायस्टोपियन दुनिया दिखाई गई है। फिल्म को आलोचकों से काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और बतौर निर्देशक डेब्यू कर रहे निर्देशक मिथिलेश एडावल्थ को भी सराहा गया था। डायस्टोपियन युग या कहे भविष्य की दुनिया पर आधारित यह संभवत एकमात्र कन्नड़ फिल्म है। हाल में फिल्म के निर्देशक ने खुलासा किया है कि उन्हें निर्माता को राजी करने में महज दो घंटे और एक कप कॉफी लगी।
सिनेमैटोग्राफर प्रवीन श्रीयन ने बनाई भविष्य की दुनिया
निर्देशक ने कहा कि उनकी शुरुआती स्किफ्ट में भविष्य की दुनिया बस एक बंजर जमीन के तौर पर थी, लेकिन उनके सिनेमैटोग्राफर प्रवीण श्रीयन ने उसे और विश्वसनीय बनाने की जिम्मेदारी ली। निर्देशक ने कहा," हमें लगा कि अगर आप किसी बंजर भूमि पर जाएं, जैसे कि राजस्थान का रेगिस्तान, तो ऐसा लगेगा कि यह फिल्म राजस्थान में ही बनी है। हम गुजरात के कच्छ में एक भूतहा गांव में गए, लेकिन फिर हमें एहसास हुआ कि यह हमारी फिल्म के लिए सही जगह नहीं है।" निर्देशक ने आगे बताया कि इसके बाद श्रीयन ने वीएफएक्स का सुझाव दिया। उन्होंने इसके लिए काफी शोध किया, इसलिए 'रुपंतरा' में दिखी दुनिया उनके द्वारा बनाई गई थी।
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वर्तमान और भविष्य का दिखा चतुराई भरा संगम
'कल्कि 2898 एडी' से काफी कम बजट में बनी फिल्म भविष्य की उस डरावनी दुनिया का चित्रण करने में कामयाब रहती है। फिल्म में बहुत चतुराई से वर्तमान और भविष्य के बीच कहानी आगे-पीछे होती रहती है, जिससे पूरी फिल्म में वीएफएक्स का उपयोग नहीं करना पड़ा। इस दौरान अपने फिल्मी सफर को लेकर एडावल्थ ने कहा कि उनकी यात्रा भी वैसी ही रही, जैसी बिना फिल्मी पृष्ठभूमि वाले ज्यादातर लोग करते हैं। मिथिलेश ने मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में बतौर सहायक निर्देशक काम किया। इस दौरान उन्होंने एक स्क्रिप्ट तैयार कर ली थी, अब उन्हें बस एक निर्माता की जरुरत थी। इस बीच उन्होंने राज शेट्टी की 'ओंडू मोट्टेया काथे' देखी। उन्होंने इसके बारे में पता किया, तो उन्हें जानकारी मिली कि इस फिल्म को शेट्टी के दोस्त सुहान प्रसाद ने बनाया है। खुश्किस्मती से उनके एक दोस्त का संपर्क सुहान से था। इस बीच मिथिलेश ने बताया कि एक कप कॉफी और एक घंटे के अंदर उन्होंने निर्माता को फिल्म के लिए मना लिया था।
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राज शेट्टी के जुड़ने से फिल्म में आई गहराई
निर्देशक ने आगे बताया कि उनके पास तीन लघु फिल्मों की स्क्रिप्ट थी, वो हमेशा से कई कहानियों वाली फिल्म बनाना चाहते थे। इस वजह से उन्होंने तीनो लघु फिल्मों पर काम रना शुरू किया, ताकि वह इन्हें एक साथ जोड़ सकें। इस दौरान उन्हें एहसास हुआ कि उन सभी कहानियों में कुछ समानता भी है, इसलिए उन्होंने सभी को एक हाइपरलिंक शैली में बदल दिया। उन्होंने आगे कहा कि राज शेट्टी के जुड़ने से, रुपंतरा को उनकी कल्पना से अधिक गहराई मिली। इस फिल्म से पहले भी शेट्टी, 'गरुड़ गमना वृषभ वाहना' में एक गरममिजाज गैंगस्टर का किरदार निभा चुके थे। इस फिल्म में भी उन्होंने अपने क्षेत्रीय स्वाद से भरे डायलॉग्स से फिल्म को एक अलग लेवल पर पहुंचा दिया। इस दौरान निर्देशक ने बताया कि राज ने उनकी कहानी का सांस्कृतिक अनुवाद भी किया, क्योंकि इस फिल्म की स्क्रिप्ट उन्होंने पहले अंग्रेजी में लिखी थी। इस फिल्म को कन्नड़ के दर्शकों से मिले प्यार को देखते हुए उन्होंने कहा कि वह और कन्नड़ फिल्में बनाना चाहते हैं।
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