क्या चल पाएगा प्रियंका चोपड़ा का ठुमका?
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इन दिनों प्रियंका चोपड़ा अपनी आने वाली फिल्म ‘रामलीला’ के आइटम सॉन्ग को लेकर लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं।
इसके दो कारण हैं, पहला यह है कि फिल्म के डायरेक्टर संजय लीला भंसाली को जहां आइटम सॉन्ग से परहेज रहता है, वही प्रियंका भी आइटम सॉन्ग के नाम पर दूरी बनाती रही हैं।
फिल्म को हिट कराने के लिए आइटम सांग्स से अच्छा कोई भी कारगर तरीका नहीं हो सकता।
धूम मचाते हैं आइटम सांग्स
इसके पहले प्रियंका फिल्म ‘जंजीर’ के रिमेक में भी आइटम सॉन्ग में ठुमके लगाते नजर आई थीं। आइटम सॉन्ग का यह क्रेज पहली बार देखने को नहीं मिल रहा है। इस ट्रेंड को बड़ी से बड़ी अभिनेत्रियों ने अपनाया है।
फिल्म चले या न चले, लेकिन आइटम सॉन्ग की धूम तो हर जगह होती है। यह अलग बात है कि कोई तो उसकी धुन पर थिरकता है है तो कोई नाक भौहें सिकोड़ता है।
50-60 के दशक में ही हो गई थी शुरूआत
पचास से साठ के दशक में इस तरह के सेक्स अपीलिंग सॉन्ग और डांस का आगमन तो हो ही चुका था। लेकिन उस दौरान इन गानों को आइटम सॉन्ग से नहीं बुलाया जाता है।
बॉलीवुड में वयजंती माला और पदमिनी को फिल्म में आइटम नंबर लाने का श्रेय दिया जाता है। फिल्म ‘नागिन’ के गाने ... मन डोले मेरा तन डोले ... को पहला हिंदी सिनेमा का आइटम सॉन्ग माना जाता है।
उस दौर कीहेलन को वैम डांसर से प्रसिद्धि मिली। उस दौरान हेलेन ने फिल्म हावड़ा ब्रिज के गाने...'मेरा नाम चिन-चिन', फिल्म कारवां का गाना...'पिया तू अब तो आ जा', फिल्म शोले का
गाना 'महबूबा...महबूबा' और फिल्म ‘डॉन’ के गाने...'ये मेरा दिल...' में खूब आइटम नंबर दिया। सत्तर के दशक में बिंदू, अरुणा ईरानी, जीनत अमान और परवीन बॉबी की एंट्री ने हेलन के एकाधिकार को समाप्त कर दिया।
तेजाब ने कायम किया नया दौर
इसके बाद फिल्म ‘तेजाब ’ के गाने 'एक दो तीन' से माधुरी दीक्षित ने एक नया दौर कायम किया। माधुरी के 'चोली के पीछे क्या है...'
'धक-धक करने लगा...जैसे गाने काफी हिट हुए। फिल्म ‘शूल’ के गीत...'मैं आई हूं यूपी बिहार लूटने...' में शिल्पा शेट्टी ने भी सबको हैरान कर दिया।
आइटम सॉन्ग फिल्म को हिट कराने का दम तो भरते हैं। हालांकि इनका फिल्म की स्टोरी लाइन से ताल्लुक नहीं होता। देखना दिलचस्प होगा कि प्रियंका को ‘रामलीला’ के आइटम सॉन्ग से कितना फायदा मिलता है और संजय लीला भंसाली का यह प्रयोग कितना कारगर होता है।