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इतनी सिगरेट क्यों पीते हो शाहरुख?
हिमानी दीवान
Updated Sun, 25 Aug 2013 07:38 AM IST
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मौका तो खुशियां बांटने का था फिर धुआं क्यों? धुआं इतना कि चेहरे के हाव-भाव के साथ कुछ सवाल भी यूं ही उड़ गए। जानें तीन दिन में सौ करोड़ कमाने के बाद किस तरह मीडिया से रू-ब-रू हुए शाहरुख..
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तीन दिन में सौ करोड़ की कमाई! बेशक बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान के लिए यह खुशी का मौका है। बादशाह इस खुशी को मीडिया और अपने प्रशंसकों के साथ बांटना चाहते हैं। वह अपने आने की खबर भिजवाते हैं और तय वक्त से देरी से आते हैं। कुछ पत्रकार उनसे पहले भी मिल चुके हैं और कुछ पहली बार मिलने वाले हैं।
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मगर बेचैनी हर तरफ बराबर ही है। आखिर लोगों की इसी बेचैनी ने दिल्ली के एक लड़के शाहरुख खान को मुंबई (बॉलीवुड) का बादशाह बनाकर दुनिया के सामने पेश किया है। शाहरुख अब आ रहे हैं! शाहरुख अब आने वाले हैं! हर तरफ सिर्फ सुगबुगाहट! एक चीज है, जो बॉलीवुड के इस बादशाह के आने की खबर को पुख्ता कर देती है।
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दृश्य कुछ इस तरह था...टेबल सज चुकी थीं। कुर्सियां लग चुकी थीं। चेन्नई एक्सप्रेस का पोस्टर भी चस्पा कर दिया गया था। इतने में एक आवाज आई, ‘अरे टेबल पर एश ट्रे रख दी क्या! जल्दी से टेबल पर एश ट्रे रख दी जाती है।
एश ट्रे का यूं रखा जाना मुगलों के जमाने में बादशाह के आने से पहले होने वाले ऐलान से कुछ कम नहीं था, क्योंकि उसके कुछ मिनट बाद ही शाहरुख हमारे बीच मौजूद थे। मगर ये क्या! बातचीत के दौरान सिगरेट के धुएं को नजरअंदाज कर सभी ने सवालों पर गौर करना ज्यादा लाजिमी समझा। `
आप रियलिस्टिक सिनेमा में कहीं दिखाई नहीं देते शाहरुख?’ `चेन्नई एक्सप्रेस’ को आपकी पुरानी फिल्मों का ही मिक्सचर कहा जा रहा है?’ `आलोचकों ने फिल्म को पसंद नहीं किया है। आप कुछ कहना चाहेंगे?’
वह कहते हैं, ‘मैं ऐसी फिल्में बनाना पसंद करता हूं, जिसे कोई भी अपने परिवार के साथ बैठकर देख सके। ऐसी फिल्में जिन्हें मेरे बच्चे देख सकें और खुश हो सकें। मैं अपनी फिल्मों में गाली-गलौच या अश्लीलता नहीं डाल सकता, क्योंकि ऐसा कुछ भी करते वक्त मेरे जेहन में यह ख्याल आता है कि इसे मेरे बच्चे नहीं देख पाएंगे।‘
यह भी अजीब कश्मकश है कि अपने बच्चों और भारतीय परिवारों की मानसिकता का इतना ख्याल रखने वाले शाहरुख के जेहन में यह नहीं आता कि बातचीत के दौरान उनका इस तरह सिगरेट पीना भी किसी के लिए परेशानी बन सकता है। खैर, खुशियों के साथ नाराजगी भी साझा की गई। अपनी फिल्म की सफलता को लेकर बादशाह जितने खुश थे, मीडिया की कवरेज पर उतने ही खफा।
कहते हैं कि कुछ सवाल और कुछ बातें ऐसी हैं जिनसे झुंझलाहट होती है और जिनसे बुरा लगता है। जैसे यह सवाल कि क्या आप करन-अर्जुन में दोबारा नजर आएंगे? दीपिका के साथ काम करके कैसा लगा? या फिर ऐसे सवाल पूछ लिए जाते हैं जिनके बारे में शायद मीडिया को भी पूरी जानकारी नहीं होती, जैसा कि सरोगेसी वाले मुद्दे पर हुआ।
खैर..अगला सवाल था कि फिल्म की सफलता के लिए प्रमोशन कितना जरूरी है? आपको कितना समय लगता है प्रमोशन की पूरी योजना बनाने में? ‘सिर्फ पांच मिनट’, शाहरुख तुरंत जवाब देते हैं। कहते हैं, ‘इसमें ज्यादा समय नहीं लगता मैं सिर्फ पांच मिनट अपनी टीम के साथ बैठता हूं। फिल्म की रिलीज से पहले हम सिर्फ तीन दिन का समय तय करते हैं और अखबार, टीवी, रेडियो, सोशल नेटवर्क... हर प्लेटफॉर्म के लिए वक्त और दिन तय कर देते हैं। बस फिर इस योजना को पूरी शिद्दत से पूरा करते हैं।‘
यकीन हो न हो लेकिन शिद्दत के मामले में तो उनकी बात माननी ही पड़ेगी। इतने सारे सवाल और इतने सधे हुए जवाब। मगर इन सब सवालों के बीच एक सवाल था जो पूछा नहीं जा सका- इतनी सिगरेट क्यों पीते हो शाहरुख? मौका तो खुशियां बांटने का था फिर धुआं क्यों? पता नहीं बॉलीवुड के बादशाह इस सवाल का क्या जवाब देते?