Jaideep Ahlawat: 'कॉलेज से घर लौटकर पिता के गले लगते थे जयदीप', अमर उजाला संवाद में बोले- 'मैंने बैरियर तोड़ा'
Uttarakhand Samwad 2025: आज मंगलवार 10 जून को देहरादन में आयोजित अमर उजाला के प्रतिष्ठित कार्यक्रम संवाद में दिग्गज अभिनेता जयदीप अहलावत ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने अपने अभिनय, फिल्मों और स्ट्रगल सहित कई पहलुओं पर बात की।
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अभिनेता जयदीप अहलावत आज मंगलवार को देहरादून में आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने यहां अपने करियर और निजी जिंदगी से जुड़ी कई दिलचस्प बातें साझा कीं। साथ ही उन्होंने अपने पिता से जुड़ा एक दिल छू लेने वाला किस्सा भी शेयर किया।
बोले- 'एक वक्त बाद मुझे अहसास हुआ'
संवाद में जयदीप अहलावत से पूछा गया कि आप कॉलेज में थे। शनिवार-रविवार को स्कूटर से घर आते थे। आकर अपने पिताजी से गले लगते थे। आज की पीढ़ी में भी पिता के गले लगते हुए झिझक होती है। आपने वह बैरियर कैसे तोड़ा? इस पर जयदीप ने कहा, 'यह सबके साथ है। हमारी पूरी पीढ़ी ने शायद यह फील किया होगा कि पिताओं ने कभी गले नहीं लगाया। पता नहीं उनके डीएनए में नहीं है यह चीज। लेकिन, आप भी सोचते हो कि ऐसा क्या है जो मां इतने प्यार से बात करती है और पिता वहीं तीन-चार सवाल करते हैं कि पढ़ाई ठीक चल रही है। एक बड़ी वजह यह रही कि मुझे साहित्य पढ़ने की जो आदत थी तो एक टाइम बाद अहसास हुआ कि यह जिम्मेदारी सिर्फ इनकी नहीं है। आपकी भी हो सकती है। आप क्यों उस बैरियर को नहीं तोड़ सकते। शायद पिता के पिता ने भी उन्हें कभी गले नहीं लगाया होगा। उन्हें भी वह महसूस हुआ। मुझे भी लगा कि इसे तोड़ना पड़ेगा'।
दोनों हाथों से गले नहीं लगाते थे पिता
एक्टर से जब पूछा गया कि आप जब पहली बार पिता से गले लगे, तो उनका क्या रिएक्शन था? इस पर उन्होंने कहा, 'यह तो याद नहीं। लेकिन, वह भी कभी दोनों हाथों से गले नहीं लगाते थे। एक ही हाथ से गले लगाते थे'।
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देहरादून से जुड़ी हैं यादें
संवाद में एक्टर से पूछा गया कि देहरादून की आपकी कई यादें जुड़ी हैं। आपने एसएसबी की परीक्षा के जरिए वह सपना भी संजोया कि एक बार क्लियर हो जाए तो इंडियन आर्मी का ऑफिसर बन जाऊं। जब वह सपना टूटा तो क्या टूटा? इस पर जयदीप अहलावत ने कहा, 'पहला रिश्ता तो देहरादून से वही बना था। 12वीं क्लास में। एसएसबी क्लियर न होना, सबसे पहले तो वह सच्चाई टकराती है। लेकिन फिर आप कोई न कोई रास्ता खोजते हो। जीवन कभी रुकता नहीं है। 19-20 साल का एक लड़का उस वक्त फेलियर जो महसूस कर सकता था और फिर उससे आगे बढ़ना'।