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बचपन में रामलीला मंच पर गाते थे उदित नारायण
अमर उजाला ब्यूरो/नई दिल्ली
Updated Sat, 20 Oct 2012 11:49 AM IST
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बॉलीवुड के जानेमाने गायक उदित नारायण बचपन में रामलीला के स्टेज पर गाया करते थे। यह रामलीला मंच पर मिली वाहवाही थी, जिसने उदित को प्रोत्साहित किया और वे आगे भी गाते रहे। आइए सुनते हैं उनके बचपन की कहानी, उन्हीं की जुबानी-
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बचपन में बिहार की ग्रामीण रामलीलाओं में की गई गायकी ने ही बुलंदियों तक पहुंचाया है। उस समय मेरी आयु आठ वर्ष थी और मामा के घर में रहता था। रामलीलाओं में उस समय ‘रामचंद्र कह गए सिया’ गीत प्रस्तुत करता था। लोगों से खूब वाहवाही मिलती थी।
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गांव के लोगों द्वारा हौसले बढ़ाने से गीत-संगीत को जीवन का अभिन्न अंग बनाया। जब भी दुर्गापूजा में जाता तो यही आशीर्वाद मांगता कि मां भगवती मुझे एक गायक के रूप में सफल बनाओ।
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मैंने खूब मेहनत की और आशा के अनुरूप सफलता मिली। हिन्दी फिल्मी गीतों के अलावा भक्ति संगीत के अनेक गीत भगवती और शिरडी के साईं बाबा को समर्पित हैं। बचपन से ही रामलीला के प्रति जुड़ाव रहा है।
इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि मेरी जिंदगी को बदलने में रामलीलाओं की अहम भूमिका रही है। रामलीला भाई-भाई के प्रेम और त्याग को उजागर करती है। वैसे तो हर साल रामलीलाएं होती है, लेकिन यह हमेशा याद दिलाती है कि धर्म में गहरी आस्था रखो। जब-जब पृथ्वी पर पाप बढ़ेगा, भगवान उसका नाश करेंगे।
हमें रामलीलाओं से मिलनेवाली सीख को जीवन में उतारना चाहिए। खासकर बच्चों को रामलीला अवश्य दिखानी चाहिए। इससे बच्चों में आज्ञाकारी बनने की भावना जागृत होगी।
(उदित नारायण से भरत पांडेय की बातचीत पर आधारित)