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Shakeel Badayuni: जब शकील बदायूंनी के पास नहीं थे इलाज के पैसे, मसीहा बनकर आया था यह शख्स
Thu, 20 Apr 2023 10:54 AM IST
साक्षी पांडेय
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: साक्षी पांडेय
Updated Thu, 20 Apr 2023 10:54 AM IST
सार
शकील बदायूंनी ने अपने करियर के दौरान 'ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आया, जाने क्यूँ आज तिरे नाम पे रोना आया...' जैसे कई सुपरहिट गाने गाए हैं। 20 अप्रैल 1970 में शकील ने दुनिया को अलविदा कह दिया।
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शकील बदायूंनी
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
शकील बदायूंनी ने अपने करियर के दौरान 'ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आया, जाने क्यूँ आज तिरे नाम पे रोना आया...' जैसे कई सुपरहिट लिखे हैं। शकील का जन्म तीन अगस्त सन् 1916 में उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवसिर्टी से पढ़ाई पूरी की और इसके बाद दिल्ली में सप्लाई ऑफिसर के रुप में नौकरी करने लगें।
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ऐसे हुई नौशाद से मुलाकात
इसके बाद साल 1944 में शकील मुंबई आ गए और यहां उनकी मुलाकात फिल्म मेकर ए आर करदार से हुई। करदार ने उन्हें नौशाद से मिलवाया ,जिसके बाद उनकी जिंदगी ने अलग मोड़ ले लिया। नौशाद से मिलते के बाद शकील सफलता की सीढ़ियां चढ़ने लगें। पहली मुलाकात में नौशाद ने उनसे कुछ लिखने को कहा, जिसके बाद शकील ने अपने अल्फाजों को कोरे कागज पर उकेर दिया। उन्होंने लिखा, 'हम दर्द का अफसाना, दुनिया को सुना देंगे। हर दिल में मोहब्बत की आग लगा देंगे।'
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इन हिट फिल्मों के लिखे गाने
उनका यह गीत नौशाद को बेहद पसंद आया। इसके बाद शकील ने कई हिट फिल्मों के गाने लिखे। इस लिस्ट में साल 1951 में आई फिल्म 'दीदार', 1952 में आई फिल्म 'बैजू बावरा', 'मदर इंडिया', साल 1960 में आई फिल्म 'मुग्ल-ए-आजम', 'गंगा जमुना' और 1963 में आई फिल्म 'मेरे मेहबूब शामिल' है।
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टीबी की बिमारी से झूझ रहे थे शकील
इस दौरान दोनों की दोस्ती बेहद गहरी हो गई। शकील टीबी जैसी गंभीर बिमारी से झूझ रहे थे। उनके पास इलाज कराने के लिए ज्यादा पैसे भी नहीं थे। ऐसे में नौशाद उनकी मदद को आगे आए। उन्होंने शकिल को तीन फिल्मों में काम करने का मौका दिया और इसके लिए उन्होंने उन्हे अच्छी खासी फीस भी दी थी।
20 अप्रैल को हुआ था निधन
नौशाद के अवाला शकील ने अपने करियर के दौरान हेमंत कुमार और संगीतकार रवि के साथ भी काम किया। उन्होंने साहेब बीवी और गुलाम, चौदवीं का चांद, और बीस साल बाद जैसी फिल्मों में शानदार काम किया। उन्होंने अपने करियर में करीब 89 फिल्मों के लिए गाने लिखे। उन्होंने कई ऐसी गजलें भी लिखीं जिनमें बेगम अख्तर ने अपनी आवाज दी। 20 अप्रैल 1970 में शकील ने दुनिया को अलविदा कह दिया।
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