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भारतीय सिनेमा में नया नहीं रीमेक और सीक्वल का दौर
अनुराधा गोयल
Updated Thu, 02 May 2013 07:30 AM IST
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वैसे तो 100 सालों में हिंदी सिनेमा की काया ही पलट गई है लेकिन इसके साथ ही बॉलीवुड में कई नए ट्रेंड आए और गए। इन्हीं में से एक ट्रेंड है फिल्मों के रीमेक और उनके सीक्वल का।
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बहुत कम लोग ही जानते होंगे बॉलीवुड में फिल्मों के रीमेक और सीक्वल का ट्रेंड नया नहीं है।
जी हां, जब से हिंदी सिनेमा की शुरूआत हुई है तभी से फिल्मों के रीमेक और सीक्वल की परछाई दिखाई पड़ती है लेकिन पिछले दो दशकों में इस ट्रेंड ने जोर पकड़ा है।
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आइए जानें, बॉलीवुड में पनपे रीमेक और सीक्वल के इस ट्रेंड के बारे में जो शुरू से आज तक कायम है।
‘राजा हरिशचंद्र‘ का बना रीमेक
1913 में दादा साहब फाल्के की फिल्म ‘राजा हरिशचंद्र‘ थी। इस फिल्म को लेकर कुछ फिल्म इतिहासकारों का विश्वास है कि 1917 में इस फिल्म का इसी नाम से रीमेक बनाया गया था।
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कई रूपों में आई ‘देवदास‘
1928 में शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘देवदास‘ पर पहली बार नरेश मित्रा ने फिल्म बनाई। इसी उपन्यास को लेकर 1935 में प्रथमेश बरूआ ने भी फिल्म बनाई।
1955 में बिमल रॉय ने ‘देवदास‘ एक बार फिर बनाई। ‘देवदास‘ फिल्म को अलग-अलग रूपों में बनाने का सिलसिला यही नहीं थमा बल्कि इस क्लासिक उपन्यास को अब तक तकरीबन 11 बार फिल्मी परदे पर उतारा जा चुका है।
2002 में संजय लीला भंसाली ने अपने मॉडर्न साज-सज्जा के सेट के साथ ‘देवदास‘ का निर्माण किया। ‘देवदास‘ का मोह लोगों के प्रति यही खत्म नहीं हुआ। बल्कि बॉलीवुड निर्माता-निदेशक अनुराग कश्यप ने ‘देवदास‘ का आधुनिक वर्जन 'देव-डी' के नाम से बनाया।
'नगीना' और 'वास्तव' का सीक्वल
जब सीक्वेल का चलन नहीं था, तब भी कुछ निर्माता-निर्देशकों ने सीक्वेल बनाने की हिम्मत जुटाई थी। सन 1986 में रिलीज हुई फिल्म ‘नगीना‘ का 1989 में ‘निगाहें‘ के नाम से सीक्वल बना। इसी तरह से 1999 में आई फिल्म ‘वास्तव‘ का 2002 में फिल्म 'हथियार' के नाम से सीक्वल बना।
हॉलीवुड से प्रेरित है सीक्वल का ट्रेंड
यूं तो सीक्वल और रीमेक की बॉलीवुड में शुरू से ही नींव दिखाई पड़ रहा है लेकिन पिछले दो दशकों में ये ट्रेंड हॉलीवुड से ज्यादा प्रभावित दिख रहा है।
दरअसल, हॉलीवुड के दर्शक सीक्वल फिल्में देखने के आदी है। इसीलिए वहां सीक्वल और रीमेक फिल्में हिट होती है। भारत में कई हॉलीवुड फिल्में इंग्लिश और हिंदी में रिलीज हुई जिनके सीक्वल को भी भारतीय दर्शकों ने खूब पसंद किया।
आज भी हॉलीवुड के सीक्वल और रीमेक के भारतीय दर्शक दीवाने है इसी का नजीता है ‘स्पाइडर मैन‘ के रीमेक और ‘ट्विलाइट‘ के सीक्वल ने अकेले भारत में खूब कमाई की।
निश्चित तौर पर हॉलीवुड की इसी सफलता को बॉलीवुड भी भुनाना चाहता है, यही कारण है कि यहां धड़ल्ले से सीक्वल और पुरानी फिल्मों के रीमेक बनते जा रहे हैं।
इस साल दिखेंगे कई रीमेक और सीक्वल
अपने दर्शकों को बांधे रखने के लिए निर्माता-निर्देशक इस साल कई और रीमेक और सीक्वल फिल्में ला रहे हैं।
'वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई 2', 'शूटआउट एट वडाला', 'वेलकम 2', 'यमला पगला दीवाना 2', 'रागिनी एमएमएस 2', 'धूम 3', 'कृष 3', 'दोस्ताना 2', 'रॉक ऑन 2', 'तनु वेड्स मनु 2', और 'जिस्म 3' जैसी फिल्मों के जहां सीक्वल आ रहे हैं।
वहीं 'जंजीर' जैसी मशहूर फिल्मों के रीमेक बन रहे हैं। साथ ही बॉलीवुड साउथ सिनेमा से प्रेरित हो साउथ में हिन्दी फिल्मों के रीमेक बन रहे है। प्रकाश झा की फिल्म ‘सत्याग्रह‘ इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
दिलचस्प बात ये है कि बॉलीवुड में साउथ के सिनेमा, मराठी सिनेमा, बंगाली सिनेमा या अन्य भाषा की सिनेमा की फिल्मों का रीमेक बनाने का ट्रेंड भी पुराना ही है।
दर्शकों को भा रहा है ये नया ट्रेंड
मजे की बात तो ये है दर्शक वर्ग भी रीमेक और सीक्वल फिल्मों को खूब पसंद करता है। इससे रीमेक और सीक्वल के ट्रेंड को आगे बढ़ने में मदद मिल रही है।
वहीं आलोचक भी इस ट्रेंड को बहुत बुरा नहीं मान रहें। ऐसे में इस ट्रेंड को फलने-फूलने में खूब मदद मिल रही है।