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विवादास्पद इंटरव्यू में सलमान ने स्वीकारी अपनी शादी की बात

Thu, 23 Jun 2016 11:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुंबई
ब्यूरो/अमर उजाला, मुंबई Updated Thu, 23 Jun 2016 11:39 AM IST
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Salman khan talking about marriage to lulia!

पिछले हफ्ते सलमान खान द्वारा फिल्म सुल्तान के प्रमोशन के दौरान मीडिया के एक समूह को दिए गए इंटरव्यू की कुछ बातों ने इस सितारे को मुश्किल में डाल दिया है। पढ़िए मुंबई के महबूब स्टूडियो में हुई इस बातचीत के चुनिंदा अंश।

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इस फिल्म से पहले आपकी पहलवानों  के बारे में क्या राय थी?
मैं इससे पहले एक ही पहलवान को जानता था, जिसका नाम है गामा। वह एकमात्र बेहतरीन पहलवान थे। उनके बाद दारासिंह और रंधावा।

और इस फिल्म के बाद?
सुल्तान पहलवान!!

क्या सुल्तान ने गामा पहलवान को फॉलो किया?
हमने गामा के बारे में अपने पिता से काफी सुन रखा था। यही नहीं हमने एक स्क्रिप्ट भी तैयार की थी गामा पर...।

उस पर फिल्म बनने की खबरें थीं!
जी हां, वह होगी अभी।

फिल्म के लिए कुश्ती सीखने में कितनी मेहनत लगी?
सीख तो गए लेकिन इसकी ट्रेनिंग बहुत कठिन है। आपके पास वैसा शरीर होना चाहिए। फुर्ती और पैरों में ताकत। जब तक आप उनकी (पहलवान) तरह ट्रेनिंग नहीं करेंगे, आप वैसे नहीं लगेंगे। मेरी और आमिर की जैसी ट्रेनिंग हुई है वह उन पहलवानों से ज्यादा ही हो गई। वेट ट्रेनिंग, दांव-पेंच। सुबह-शाम ढाई-ढाई घंटे। मुझे मिट्टी पर भी कुश्ती सीखनी पड़ी और मैट पर भी। पंचिंग-किकिंग और मार्शल आर्ट्स भी सीखे। अगर आप इतनी ट्रेनिंग नहीं करेंगे तो फ्रॉड जैसे दिखेंगे। इसके बाद जो शूटिंग करते थे तब छह घंटे जो उठा-पटक होती थी, जो अविश्वसनीय है। फिल्म के लिए 120 किलो के आदमी को उठा कर मुझे दस बार पटकना पड़ता था। पांच अलग-अलग एंगिल से। जबकि कुश्ती मैच में यह एक-दो बार होता है। छह घंटे तक यह चलता था और बेहद कठिन होता था। जब मैं रिंग से बाहर निकलता था तो सचमुच वह ऐसा होता था कि जैसे कोई रेप की शिकार महिला आ रही हो। ओह...मुझे नहीं लगता यह कहना चाहिए था! फिर मैं बाहर आता था, खाता था और वापस जाता था। यह मेरी जिंदगी की सबसे कठिन फिल्म थी।

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'अब तो किसी का हाथ पकड़ना है'

Salman khan talking about marriage to lulia!

शारीरिक रूप से फिट रहने के अलावा फिल्म और किन बातों के लिए प्रेरित करती है?
पर्दे पर फिटनेस का पक्ष तो विशेष महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि तकनीक से आज बहुत कुछ हो सकता है। चाहे किसी को लंगोट पहना दो, किसी को कुश्ती का कॉस्ट्यूम पहना दो। खास है, स्क्रिप्ट। जिस पर अली अब्बास जफर ने काम किया है। फिल्म ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो जीवन में उठता है, गिरता है। गिर कर उठता है। फिल्म में कोई विलेन नहीं है। यह कहानी सुल्तान के नजरिये से है। सब नाम, इज्जत और पैसे कमाना चाहते हैं।

अब आप स्टार हैं। इस मुकाम पर कितनी मेहनत करनी पड़ती है?
इसी मुकाम पर मेहनत करनी पड़ती है। पहले के मुकाम तो निकल जाते हैं। आप देखें कि इसी उम्र (50 के आस-पास) में आकर स्टार बाहर निकल जाते हैं। एक-एक विकेट डाउन होना शुरू होते हैं। मैंने नए सिरे से ट्रेनिंग शुरू की है। जितना हम मेहनत करेंगे उतना दर्शकों को मजा आएगा। यही संतोष है। डायटिगं, वर्कआउट, अनुशासन का पालन। मैं कहता था कि हर सेकेंड-बेस्ट-बैड चीज छोड़ो। छूटते-छूटते हर चीज छूट गई। जैसे पहले कॉफी-सिगरेट में से कॉफी, फिर सिगरेट-अल्कोहल में से सिगरेट, फिर एल्कोहल-वीमन (महिला) में से अल्कोहल।

क्या आप वीमन को बुरी चीजों में गिनते हैं?
लास्ट में कौन आता है... फर्स्ट ही आता है ना! नीचे से चलें ऊपर तो... किसके लिए हर चीज छोड़ रहे!!

सलमान, अब क्या छोड़ना बाकी है?
अब क्या छोड़ना बाकी है! बस, पकड़ना बाकी है। किसी का हाथ पकड़ना है

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