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रिदम कला महोत्सव: कैसा है कजाखस्तान का कल्चर, क्या आप वहां कर सकते हैं प्रोग्राम? डॉ. नवाब मीर नासिर अली खान ने की कल्चरल एक्सचेंज प्रोग्राम पर बात

Sat, 05 Mar 2022 04:52 PM IST
वर्तिका तोलानी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: वर्तिका तोलानी Updated Sat, 05 Mar 2022 04:52 PM IST
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Rhythm Kala Mahotsav: Dr. Nawab Mir Nasir Ali Khan and Dr. RAJKAMAL NAYAK Shared Their Views On Kajakhasta, Kavya and Rangmanch
रिदम कला महोत्सव - फोटो : अमर उजाला

रिदम कला महोत्सव अपने अंतिम चरण पर है। अंजना वेलफेयर सोसायटी के सहयोग से 'रिदम कला महोत्सव' का आयोजन 26 जनवरी से किया गया था और अब यह अपने अंतिम छोर पर आ पहुंचा है। 45 दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव 12 मार्च, 2022 को समाप्त होने वाला है। बीते 8 सालों से आयोजित हो रहे 'रिदम कला महोत्सव' का मकसद युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ना है। यही कारण है कि महोत्सव के दौरान संगीत एवं नृत्य की कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है और साप्ताहांत आयोजिक कार्यशालाओं के लिए कला के क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाता है। 

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कार्यशाला के दौरान अंजना वेलफेयर सोसायटी की फाउंडर माया कुलश्रेष्ठ ने दर्शकों को बताया कि अंजना वेलफेयर सोसाइटी बीते 8 सालों से कला के क्षेत्र में और कलाकारों के लिए काम कर रहा है। अपने नौवां साल के आखिरी ऑनलाइन कार्यशाला में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के लिए कजाखस्तान गणराज्य के मानद कौंसल डॉ. नवाब मीर नासिर अली खान से खास बात-चीत की गई है। पढ़िए...

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एक कलाकार होने के नाते मैं जानती हूं कि कला के क्षेत्र से जुड़े हर व्यक्ति के लिए कल्चरल एक्सचेंज प्रोग्राम कितना महत्वपूर्ण होता है। इसलिए आज हमने कजाखस्तान के कल्चर काे समझने के लिए डॉ. नवाब मीर नासिर अली खान को आमंत्रित किया है। डॉ. नवाब, कजाखस्तान कि सबसे खास चीज क्या है? वहां का खाने, रहन-सहन के तरीके, म्यूजिक के बारे में हमारे दर्शकों को अवगत कराइए।
दुनिया के देशों में क्षेत्रफल के हिसाब से कजाखस्तान नौवें स्थान पर है। आर्थिक और राजनीतिक रूप से कजाखस्तान और भारत के बहुत अच्छे रिश्ते हैं। भारत में 80 फीसदी यूरेनियम कजाखस्तान से आता है। इसके साथ ही दोनों देशों में बहुत सारी समानताएं भी हैं। वहां भी हमारे ही तरह पुलाव (बिरयानी), कबाब, समोसा जैसी मध्य एशियाई फुड खाते हैं। वहां भी भारत की ही तरह विभिन्न कल्चरल प्रोग्राम्स आयोजित किए जाते हैं। यहां भी योगा को बहुत महत्व दिया जाता है। अभी हम यहां गांधी म्यूजियम बनाने की भी तैयारी कर रहे हैं। हालांकि इस म्यूजियम में सिर्फ महात्मा गांधी के स्मारक नहीं होंगे। बल्कि कल्चरल और आर्ट प्रोग्राम्स के लिए ऑडिटोरियम भी होंगे। ताकि हम भारत के लोगों को अपना कल्चर दिखाने और हमारे कल्चर के बारे में जानने के लिए आमंत्रित कर सकें। 

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क्या कजाखस्तान का कल्चर तर्की से प्रभावित है? अगर कोई एनजीओ कजाखस्तान के साथ कल्चर एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत जुड़ना चाहता है, तो उसके लिए क्या प्रक्रिया अपनानी होगी?

अलग-अलग देश के बहुत सारे लोग कजाखस्तान से योगा के माध्यम से जुड़े हुए हैं। यदि कोई कजाखस्तान में प्रोग्राम करना चाहता है या जुड़ना चाहता है, तो वो कजाखस्तान के कोई भी लोकल ऑर्गेनाइजेशन के साथ गठबंधन कर सकता है। 

वहां युवा कालाकारों को बढ़ावा देने के लिए क्या किया जाता है। आप अपने कल्चर और अपनी ऑर्गेनाइजेशन के जरिए कालाकारों को कैसे प्रमोट करते हैं?
मैं कजाखस्तार का प्रतिनिधित्व करता हूं और भारत के दो राज्यों का काउंसिल जनरल हूं। इस पद पर मेरी नियुक्ति कजाखस्तान की सरकार और भारत के राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से हुई है। यानी मैंने दोनों देशों के लिए काम करता हूं। मेरी जिम्मेदारी दोनों देशों के बिजनेस को प्रमोट करना है। हालांकि दोनों देशों के लिए लोगों को एक दूसरे से कनेक्ट करने के लिए कल्चर का एक्सचेंज होना बहुत जरूरी है। इसलिए हम अंजना वेलफेयर सोसायटी जैसे एनजीओ के साथ मिलकर भारत के खाने और कपड़े की एक्जीबिशन लगवा सकते हैं। डांस और म्यूजिक को प्रमोट कर सकते हैं। अमर उजाला इसमें मीडिया पार्टनर है।



 

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